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मुंबई के दिल पर हमला
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मुंबई के चरमपंथी हमलों ने शहर की विरासत माने जाने वाले ताज होटल को भी नहीं बख्शा है और इस हमले में होटल को ज़बर्दस्त नुकसान
हुआ है.
चरमपंथियों ने न केवल होटल में धमाके किए बल्कि लोगों को बंधक भी बना रखा. होटल का अत्यंत सुंदर गुंबद टूट गया है और इसे धू धू जलते देख लगता है कि मानो मुंबई टूट कर गिर रही हो. मुंबई की तस्वीर जहां कहीं भी दिखाई जाती है तो इसकी तस्वीर गेटवे ऑफ इंडिया और ताज होटल ही दिखती है. यह मात्र होटल नहीं एक प्रतिबिंब है मुंबई में मौजूद इमारतों के वास्तुशिल्प का जो उस शहर के इतिहास की याद ताजा करता है. अब चरमपंथियों के इस हमले में होटल की सुंदरता को ठेस मिली है और शिल्प को भी नुकसान पहुंचाया है. ब्रितानी काल में अंग्रेज़ों द्वारा बनाए गए सबसे सुंदर इमारतों में ताज होटल का नाम शुमार होता है. इसका निर्माण 1903 में हुआ था और जब यह बना था तो भारत का पहला लक्ज़री होटल था. इसके निर्माण में क़रीब ढाई लाख पाउंड लगे थे और यह वो जगह थी जहां भारत के वायसराय महाराजओं और बड़े लोगों से मिला करते थे. आज़ादी के बाद भी इसकी सुंदरता न केवल बरकरार रही बल्कि इसका महत्व भी वैसा ही बना रहा. हर साल इस इमारत में बदलाव होते रहे और नई इमारतें जुड़ती रहीं लेकिन इसकी ख़ूबसूरती कभी घटी नहीं, बढ़ती ही रही. अरब सागर की लहरों के थपेड़े हमेशा ताज होटल और यहां ठहरने वालों को थपकियां देकर सुलाते रहे लेकिन अब यहां आने वाले भी चरमपंथियों के हमले से सहम गए होंगे. कह सकते हैं कि मुंबई के दिल पर किया गया यह हमला एक बार को पूरी मुंबई को झकझोर कर रखने की क्षमता रखता है. इस ताज होटल का निर्माण 1903 |
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