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सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में वेतन वृद्धि
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भारत सरकार के सार्वजनिक उपक्रमों के कर्मचारियों के वेतन में भारी वृद्धि को मंत्रिमंडल ने मंज़ूरी दे दी है.
एनटीपीसी, ओएनजीसी और भेल जैसे 216 सार्वजनिक उपक्रमों में काम करने वाले अधिकारियों का वेतन 50 प्रतिशत से लेकर 300 प्रतिशत तक बढ़ सकता है. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में सुपरवाइज़री भूमिका निभाने वाले एक लाख 20 हज़ार अधिकारियों और बोर्ड स्तर के दो लाख 58 हज़ार अधिकारियों का वेतन बढ़ाने का निर्णय लिया गया है, ये अधिकारी किसी भी श्रम संगठन से जुड़े हुए नहीं हैं. मुनाफ़े में चल रही कंपनियों में पहली जनवरी 2007 से यह वेतन वृद्धि समान रूप से लागू होगी जबकि घाटे में चलने वाली इकाइयों के लिए उनकी वित्तीय स्थिति के हिसाब से निर्णय लिया जाएगा. इस वेतन वृद्धि में मकान किराया भत्ता और बोनस आदि में बदलाव को भी शामिल किया गया है. इस फ़ैसले की जानकारी पत्रकारों को देते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय के मंत्री पृथ्वीराज चौहान ने बताया, "हर सरकारी उपक्रम के लिए अलग से अधिसूचना जारी की जाएगी, कार्मिक मंत्रालय इस पर काम शुरू कर रहा है." इस वेतन वृद्धि के लिए कंपनियों को ए, बी, सी, डी श्रेणियों में बाँटा गया था और मोटे मुनाफ़े में चलने वाली कंपनियों को ए श्रेणी में रखा गया था और घाटे वाली इकाइयों को डी में. अब नए वेतनमान के हिसाब से ए श्रेणी की सार्वजनिक इकाई के चेयरमैन का वेतन 80 हज़ार से एक लाख पचीस हज़ार रुपए के बीच होगा. कुछ समय पहले ही केंद्र सरकार के कर्मचारियों के वेतन में छठे आयोग की सिफ़ारिशों के बाद भारी वृद्धि की गई थी और उसके बाद से लगातार माँग बढ़ रही थी कि अन्य क्षेत्रों में तनख्वाह बढ़ाई जाए. न्यायिक सेवा के अधिकारियों और जजों का वेतन बढ़ाने की माँग भी चल रही है जिस पर मंत्रिमंडल जल्द ही विचार करेगा. |
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