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गुरुवार, 20 नवंबर, 2008 को 09:09 GMT तक के समाचार
 
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काठमांडू में बंद, जनजीवन ठप्प
 
काठमाडू में विरोध-प्रदर्शन
बंद का आयोजन दो युवकों की अपहरण के बाद हुई हत्या के विरोध में किया गया है
नेपाल की राजधानी काठमांडू में बंद से जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया है. बंद का आयोजन दो युवकों की अपहरण के बाद की गई हत्या के विरोध में किया गया है.

निर्मल पंत और पुष्कर डाँगोल नाम के दो युवकों का एक महीने पहले अपहरण कर लिया गया था. उनके शव जली हुई अवस्था में काठमांडू घाटी में एक नदीं के किनारे से मंगलवार को बरादम किए गए थे.

शहर की सड़कों पर गाड़ियाँ नहीं चल रही हैं. स्कूल-कॉलेज और व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद हैं. बैंकों और सरकारी दफ़्तरों में उपस्थिति भी काफ़ी कम है.

शहर के एक पुलिस अधिकारी पवन खडके ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि रोज़मर्रा की ज़िंदगी से जुड़े सभी क्षेत्र जैसे ठप्प हो गए हैं और सड़कें खाली हैं.

बंद समर्थकों ने शहर की सड़कों पर विरोध प्रदर्शन किया और माओवादियों के ख़िलाफ़ नारे लगाए और पीड़ित परिवार को मुआवज़ा देने की माँग की.

आरोप

इस घटना के प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि दोनों युवकों का एक महीने पहले यंग कम्युनिस्ट लीग (वाईसीएल) के कार्यकर्ताओं ने अपहरण कर लिया था.

 दोनों युवकों की हत्या वाईसीएल ने नहीं की है. इस घटना की जाँच कर दोषियों की सज़ा दी जानी चाहिए.
 
गणेश मान पुन, अध्यक्ष वाईसीएल

वाईसीएल नेपाल की सत्ताधारी पार्टी कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ़ नेपाल (माओवादी) की युवा शाखा है.

दोनों युवक कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ नेपाल (मार्क्सवादी-लेलिनवादी) के सदस्य थे. यह पार्टी माओवादी पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल है.

इन दोनों पार्टियों में मतदाताओं को अपनी ओर करने और विभिन्न ट्रेड यूनियनों पर कब्ज़े को लेकर विवाद होता रहता है.

सफ़ाई

वहीं वाईसीएल ने इन आरोपों को ख़ारिज कर दिया है. उसका कहना है कि इस घटना से पहले वहाँ विरोधी पार्टी की युवा शाखा के साथ विवाद हुआ था, जिसमें एक माओवादी की मौत हो गई थी.

वाईसीएल के अध्यक्ष गणेश पुन ने संवाददाताओं से कहा कि युवकों की हत्या वाईसीएल ने नहीं की है. उन्होंने कहा कि घटना की जाँच कर दोषियों की सज़ा दी जानी चाहिए.

दोनों युवकों की मौत की पुलिस और मानवाधिकार आयोग जाँच कर रहे हैं.

इसके पहले भी इस इलाक़े में अपहरण और हत्या की घटनाएँ होती रही है. जिनमें माओवादी अपना हाथ होना स्वीकार करते रहे हैं.

राजधानी काठमाडू में इस बंद का आयोजन ऐसे समय में किया गया है जब वहाँ बहस चल रही है कि देश में जारी संसदीय प्रणाली को रहने दिया जाए या उसके स्थान पर गणतंत्र लाया जाए. इसकी नेपाल की अन्य पार्टियाँ आलोचना कर रही हैं.

 
 
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