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शनिवार, 11 अक्तूबर, 2008 को 16:17 GMT तक के समाचार
 
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सांप्रदायिक हिंसा:अब तक आठ की मौत
 

 
 
हिंसा की चपेट में बुरहानपुर
पुलिस का कहना है कि आठ में से तीन की मौत पुलिस की गोली से हुई है
मध्य प्रदेश के शहर बुरहानपुर में शुक्रवार से जारी कर्फ़्यू शनिवार को भी दिनभर जारी रहा. इस दौरान हिंसा में मरनेवालों की संख्या आठ हो गई है.

हालाँकि हालात काबू में रहे लेकिन शनिवार को दिन में पुलिस को तीन और लाशें मिलीं जिसके साथ इस हिंदू-मुस्लिम दंगे में मारे जाने वालों की कुल संख्या आठ हो गई है.

जानकारी के मुताबिक 19 लोग गंभीर रूप से घायल हैं. शनिवार को मिली लाशों में एक महिला की भी है. शनिवार सुबह तक मृतकों की तादाद पाँच बताई जा रही थी.

शनिवार को मिली तीनों लाशें पास के एक गाँव में स्थित रमजान शाह के मजार के पास से मिली हैं.

पुलिस का कहना है के यह लोग शहर के दूसरे पर बसे इलाके से, जहाँ के कुछ हिस्सों में दोनों समुदाय के बीच झड़पें हुई थीं, घायल होकर गाँव की तरफ़ भागे होंगें.

कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि यह लोग मज़ार में छुपने गए थे और पास के इलाके के दूसरे समुदाय के लोगों ने इनकी हत्या कर दी.

हालाँकि इस दावे कि अबतक कोई पुष्टि नहीं हो पाई है. मध्य प्रदेश पुलिस महानिदेशक एसके रावत ने कहा कि अब तक मारे गए लोगों में तीन पुलिस की गोली का शिकार हुए हैं जबकि अन्य पाँच बलवे में आई गंभीर चोटों की भेंट चढ़ गए.

तनाव का माहौल

बुरहानपुर निवासी नंदकिशोर देवड़ा का कहना है कि शहर में पिछले क़रीब 15 दिनों से तनाव का माहौल कायम था और पिछले हफ्ते भी बजरंग दल से जुड़े कुछ नौजवानों और चंद मुस्लिम युवकों के बीच गरमागरम बहसें हुई थीं.

शुक्रवार को दिन में जामा मस्जिद के पास मौजूद दुकानों में की गई तोड़-फोड़ और आगजनी में नंदकिशोर देवड़ा की दूकान को भी काफ़ी नुकसान पहुँचा है.

गुरूवार की रात मस्जिद के सामने कुछ लोगों द्वारा मन्दिर (अयोध्या राम मन्दिर) वहीँ बनायेंगें के नारों के बाद तनाव और गरमागरम बहस शुरू हो गई थी. बाद में पत्थरबाज़ी हुई और फिर शहर में धारा 144 लागू कर दी गई.

पुलिस सूत्रों के अनुसार इसके बावजूद उसी रात अल्पसंख्यक समुदाय के कुछ घरों में आगजनी के मामले हुए और दूसरे दिन एक स्थानीय भारतीय जनता पार्टी नेता, जो इस बार इलाके से टिकट की दावेदारी पेश करना चाहते हैं, मस्जिद के सामने धरने पर बैठ गए और प्रशासन के लाख समझाने पर भी वहां से नहीं हटे.

स्थानीय प्रशासन जुमे यानी शुक्रवार को शहर की सबसे बड़ी मस्जिद में समुदाय के लोगों के बड़ी तादाद में जमा होने की संभावना और उसके लिए पूरी तैयारी भी नहीं कर पाया.

जुमे की नमाज़ के बाद ही वहां मौजूद दुकानों में तोड़ फोड़ और आगजनी की घटनाएं हुईं जिसको काबू में लाने के लिए पुलिस ने पहले तो लाठी चार्ज की और बाद में उसे गोलियां चलानी पड़ी.

पुलिस ने शनिवार को बड़ी संख्या में लोगों को गिरफ्तार भी किया है.

विधान सभा चुनाव के कुछ दिन पहले ही ऐसे दंगे होने के कारण यह इल्ज़ाम भी सामने आ रहे हैं कि प्रशासन ने जानबूझकर मामले को हाथ से निकल जाने दिया.

हालाँकि शासन का कहना है कि उसने बलवे के शुरू होते ही कर्फ़्यू लगा दिया और बुरहानपुर में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है.

राज्य कांग्रेस अध्यक्ष सुरेश पचौरी ने राज्यपाल से मुलाक़ात कर इस मामले की जांच करवाए जाने की मांग की है और मामले की छानबीन के लिए पार्टी का एक दल बुरहानपुर भेजने की घोषणा की है.

धार्मिक यात्रा से शुरुआत

बुरहानपुर में हिंदू-मुस्लिम समुदायों के बीच तनाव गुरूवार शाम से शुरू हुआ था जब एक हिंदू धार्मिक यात्रा के दौरान दो समुदाय के लोग आमने-सामने आ गए थे.

पुलिस अधिकारियों के अनुसार दोनों समुदायों के बीच पत्थरबाज़ी हुई और अनेक लोगों को चोटें आईं. कुछ लोग तलवार, छुरे और दूसरे धारदार हथियारों से भी घायल हुए.

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने इलाक़े में निषेधाज्ञा जारी कर दी.

लेकिन दूसरे दिन सुबह ही कुछ लोग शहर की मुख्य जामा मस्जिद के सामने धरने पर बैठ गए.

नमाज़ के बाद स्थति अचानक बिगड़ गई और कुछ लोगों ने मस्जिद के पास बनी दुकानों में आग लगा दी, जिसके बाद हालात को काबू करने के लिए पुलिस को गोली चलानी पड़ी.

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने शहर में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिए हैं.

 
 
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