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रविवार, 07 सितंबर, 2008 को 13:16 GMT तक के समाचार

रामदत्त त्रिपाठी
बीबीसी संवाददाता, उत्तर प्रदेश

सांप्रदायिक हिंसा में एक की मौत

उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद योगी आदित्यनाथ के काफ़िले पर हमले के बाद भड़की सांप्रदायिक हिंसा में एक व्यक्ति की मौत हो गई है और दो लोग घायल हुए हैं.

युवक का नाम मनिउल्लाह बताया गया है. ये आज़मगढ़ के पास के गाँव का रहने वाला था और रोज़गार की तलाश में आज़मगढ़ आया था.

पुलिस ने एहतियाती तौर पर पूरे शहर में कर्फ़्यू लगा दिया है. इस मामले में छह लोग गिरफ़्तार किए गए हैं.

इस बीच योगी आदित्यनाथ के समर्थकों ने उनके काफ़िले पर हमले की ख़बर मिलते ही गोरखपुर के गोलघर बाज़ार को बंद करा दिया और धरने पर बैठ गए.

राजधानी लखनऊ में भी भाजपा कार्यकर्ताओं ने आतंकवाद के ख़िलाफ़ पुतला दहन की कोशिश की लेकिन पुलिस ने इसे विफल कर दिया.

स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब गोरखपुर से भाजपा सांसद योगी आदित्यनाथ 'आतंकवाद विरोधी' रैली को संबोधित करने आज़मगढ़ पहुँचे.

जब शहर के मुस्लिम बहुल तकिया मोहल्ले से उनका काफ़िला गुजर रहा था तभी कुछ लोगों ने गाड़ियों पर पथराव शुरु कर दिया जिससे कई गाड़ियों के शीशे टूट गए.

स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि पुलिस प्रशासन ने इस मामले में सतर्कता से काम नहीं लिया. पत्रकारों के मुताबिक पहले तो यात्रा को इलाक़े से निकलने ही नहीं देना चाहिए था और साथ में और पुलिस बल तैनात होना चाहिए था.

फ़ायरिंग

पुलिस का कहना है कि भीड़ में से फ़ायरिंग भी हुई. स्थिति को क़ाबू करने के लिए पुलिस को आँसू गैस के गोले दागने पड़े और हवाई फ़ायरिंग करनी पड़ी.

बाद में इसी मोहल्ले से मुनव्वर नाम के व्यक्ति की लाश बरामद हुई. हालाँकि अधिकारी ये बताने से कतरा रहे हैं कि उसकी मौत पुलिस फ़ायरिंग में हुई या गुटीय संघर्ष में.

स्थानीय लोगों का कहना है कि योगी आदित्यनाथ के समर्थक मुस्लिम विरोधी नारे लगा रहे थे जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई.

पुलिस ने किसी तरह आदित्यनाथ को उस स्थान पर पहुँचाया जहाँ उन्हें भाषण देना था. अपने भाषण में उन्होंने आतंकवाद के लिए मुस्लिम समुदाय को ज़िम्मेदार ठहराया.

राजनीति

हाल ही में गुजरात धमाकों के सिलसिले में आज़मगढ़ से अब्दुल बशर की गिरफ़्तारी हुई थी और इससे पहले भी आज़मगढ़ से कई संदिग्ध लोगों की गिरफ़्तारी हो चुकी है.

बशर की गिरफ़्तारी के बाद कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के अलावा कई मुस्लिम नेताओं ने आज़मगढ़ का दौरा किया था और इस तरह के बयान दिए थे कि निर्दोष मुसलमानों को फँसाया जा रहा है.

दूसरी और भाजपा और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) जैसे संगठन आज़मगढ़ को आतंकवाद का गढ़ बताते रहे हैं.