मंगलवार, 02 सितंबर, 2008 को 14:57 GMT तक के समाचार
पश्चिम बंगाल के सिंगुर में चल रहे विवाद को देखते हुए टाटा मोटर्स ने वहाँ नैनो प्लांट का काम फ़िलहाल रोकने का फ़ैसला किया है.
कंपनी ने एक बयान में कहा है कि पिछले कई दिनों से हिंसक तरीके से कर्मचारियों को काम पर आने से रोका जा रहा था और कर्मचारियों और मज़दूरों की सुरक्षा को देखते हुए ये फ़ैसला लिया गया है.
टाटा मोटर्स के मुताबिक नैनो प्लांट को वैकल्पिक स्थान पर ले जाने के बारे में विचार चल रहा है.
कंपनी की ओर से ये भी कहा है कि पश्चिम बंगाल के कई लोग नैनो प्लांट में काम कर रहे थे और कोशिश की जाएगी कि उन्हें दूसरी जगह भी नौकरी पर रखा जाए."
टाटा मोटर्स के एक प्रवक्ता ने कहा, "नैनो प्लांट के आस-पास स्थिति ठीक नहीं है. जब तक माहौल माकूल नहीं बनता हमें समर्थन नहीं मिलता, प्लांट का काम सुचारू रूप से नहीं चल सकता. हम पश्चिम बंगाल ये सोचकर आए थे कि राज्य में रोज़गार के साधन उपलब्ध करवा सकेंगे और समृद्धि ला सकेंगे.
विवाद
पिछले कुछ समय से सिंगुर में नैनो प्लांट किसी न किसी मुश्किल में घिरा रहा है. 28 अगस्त 2008 के बाद से प्लांट पर कोई काम नहीं हो पाया है.
तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता प्लांट के विरोध में लगातार आंदोलन कर रहे हैं और पुलिस के साथ उनकी झड़प भी होती रही है. प्रदर्शनकारियों ने उन सब मार्गों को अवरुद्ध कर रखा था जहाँ से फ़ैक्ट्री में प्रवेश किया जा सकता है.
पश्चिम बंगाल सरकार ने एक हज़ार एकड़ ज़मीन का अधिग्रहण करके उसे टाटा मोर्टस को सौंप था जहाँ वह एक लाख रूपए मूल्य वाली 'जनता कार' का उत्पादन करने वाली थी.
लेकिन योजना का विरोध करने वालों का कहना है कि सिंगुर में चावल की बहुत अच्छी खेती होती है और वहाँ के किसानों को इस परियोजना की वजह से विस्थापित होना पड़ा है.
टाटा समूह के चेयरमैन रतन टाटा ने कुछ दिन पहले ही कहा था कि अगर सिंगुर में हिंसा और तनाव का माहौल जारी रहा तो वे नैनो परियोजना को कहीं और ले जाएँगे.
सिंगुर में काम जनवरी 2007 में शुरु हुआ था. पश्चिम बंगाल में हिंदुस्तान मोटर्स के बाद ऑटोमोबाइल के क्षेत्र में यह दूसरा बड़ा निवेश था.
राज्य सरकार और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी यानी माकपा कहती रही है कि लंबे अरसे बाद राज्य में ऑटोमोबाइल के क्षेत्र में बड़ा निवेश हुआ है जिसे इसे रोकने से औद्योगिक हलकों में गलत संकेत जाएगा और इसके दूरगामी नतीजे होंगे. लेकिन तृणमूल कांग्रेस 2006 से ही इस परियोजना का विरोध करती आई है.