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रविवार, 31 अगस्त, 2008 को 07:22 GMT तक के समाचार

हमले की जाँच में अमरीका भी शामिल

अफ़ग़ानिस्तान में पिछले दिनों एक हवाई हमले की जाँच में अमरीका साथ देने के लिए तैयार हो गया है जिसमें 91 से ज़्यादा नागरिकों की मौत हुई थी.

अमरीका के अधिकारियों का कहना है कि पश्चिमी हेरात में हुए उस हमले में जो लोग मारे गए थे उनमें से ज़्यादातर चरमपंथी थे और सिर्फ़ पाँच आम नागरिक थे.

उस मामले की जाँच संयुक्त राष्ट्र और अफ़ग़ान सरकार संयुक्त रूप से करेंगे.

अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने देश के पश्चिमी हिस्से में अमरीकी सेना की 'एकतरफ़ा कार्रवाई' और इस हमले में मारे गए नागरिकों की संख्या को लेकर कड़ी आलोचना की है.

परिणाम

बीबीसी संवाददाता के अनुसार करज़ई मानते हैं कि अफ़ग़ानिस्तान में विदेशी ताक़तों के प्रति अफ़ग़ान नागरिकों का बढ़ रहा गुस्सा उनकी सरकार को मिल रहे समर्थन को कम कर सकता है.

अफ़ग़ानिस्ताम में संयुक्त राष्ट्र मिशन के प्रवक्ता डैन मैकनोर्टन इस जाँच की पुष्टि करते हुए कहते हैं कि यह जाँच व्यापक रूप से की जाएगी.

उन्होंने कहा, "हम मानते हैं कि यही सही रास्ता है और हम इसमें सहयोग ज़रूर देंगे."

अफ़ग़ानिस्तान में नैटो के प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल रिचर्ड ब्लैंचेट ने एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि उन्हें उम्मीद है कि जाँच का परिणाम जल्द ही सामने आएगा.

उन्होंने कहा, "ज़ाहिर है कि जब तीनों (अमरीका, संयुक्त राष्ट्र और अफ़ग़ानिस्तान) को मिली विभिन्न सूचनाएँ जुटेंगी तो सिर्फ समाधान करने की देरी होगी."

भ्रामक रिपोर्ट

अमरीका की सेना ने कहा है कि यह हवाई हमला तब किया गया जब तालेबान कमांडर मुल्ला सादिक़ को गिरफ़्तार करने गए अफ़ग़ानिस्तान पुलिस और उनके साझा सैनिक क्षेत्र में गोलियों के शिकार हो गए.

इस हादसे में मारे गए नागरिकों और चरमपंथियों की संख्या के बारे में विरोधाभासी रिपोर्टं सामने आई हैं.

अमरीका का कहना है कि 30 चरमपंथी मारे गए और पाँच को ग़िरफ़्तार किया गया जबकि अफ़ग़ानिस्तान के अधिकारियों ने बाद में जारी एक बयान में कहा कि दर्ज़नों नागरिक मारे गए हैं.

संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि उनके पास प्रत्यक्षदर्शी की रिपोर्ट पर आधारित विश्वसनीय सबूत मौजूद हैं जिसके अनुसार 90 नागरिक मारे गए हैं जिनमें 60 बच्चे शामिल हैं. संयुक्त राष्ट्र के अनुसार यह मामला उनके लिए गहरी चिंता का विषय है.

संवाददाता का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान में मारे गए लोगों की संख्या अक्सर घटा- बढ़ा कर बता दी जाती है ताकि उन पर हंगामा हो सके.