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बुधवार, 20 अगस्त, 2008 को 03:41 GMT तक के समाचार

बीनू जोशी
बीबीसी संवाददाता, जम्मू

समिति बातचीत को तैयार, जम्मू में कर्फ़्यू

अमरनाथ मंदिर बोर्ड को ज़मीन वापस दिलाने के लिए संघर्ष कर रही संघर्ष समिति ने इस मसले के समाधान के लिए राज्यपाल के पाँच सूची प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है और बातचीत के लिए तैयार हो गई है.

दूसरी ओर अमरनाथ संघर्ष समिति ने अपना आंदोलन 25 अगस्त तक पाँच दिनों के लिए बढ़ा दिया है.

साथ ही घोषित कार्यक्रम के अनुसार बुधवार को तीसरे दिन भी ज़मीन वापस लेने के सरकार के फ़ैसले के ख़िलाफ़ गिरफ़्तारियाँ दी जाएंगीं.

मंगलवार को आंदोलनकारियों और पुलिस के बीच संघर्ष को देखते हुए पूरे जम्मू ज़िले में कर्फ़्यू लगा दिया गया है.

इधर भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन सुरक्षा हालात का जायज़ा लेने बुधवार को जम्मू कश्मीर जा रहे हैं.

अमरनाथ संघर्ष समिति के प्रवक्ता नरेंद सिंह ने बताया कि पाँच सूत्री प्रस्ताव मिलने के बाद मंगलवार की रात समिति की आपात बैठक हुई जिसमें राज्यपाल के सलाहकार सुधीर सिंह बलोरिया के नेतृत्ववाली चार सदस्यीय समिति से बातचीत का फ़ैसला किया गया.

समिति की बुधवार को फिर बैठक होगी जिसमें बातचीत के लिए संघर्ष समिति के चार सदस्यों के बारे में फ़ैसला किया जाएगा.

प्रस्ताव

सरकार ने बातचीत का जो एजेंडा सौंपा है, उसमें यात्रा के दौरान बालटाल से डोमेल के बीच 800 कैनाल ज़मीन के अमरनाथ मंदिर बोर्ड के उपयोग की व्यवस्था भी शामिल है.

इसके अलावा इसका भी आकलन किया जाएगा कि मंदिर बोर्ड को विभिन्न स्थानों पर और कितनी ज़मीन की ज़रूरत होगी.

साथ ही बोर्ड के पुनर्गठन, इसकी भूमिका और इसके अधिकारों पर भी चर्चा होगी.

इधर मंगलवार को अमरनाथ बोर्ड को आवंटित ज़मीन का फ़ैसला रद्द करने के विरोध में जम्मू में मंगलवार को भी हज़ारों लोगों ने गिरफ़्तारियाँ दीं.

उल्लेखनीय है कि पिछले लगभग 50 दिनों से जम्मू में इस मामले को लेकर उग्र प्रदर्शन हो रहे हैं और अमरनाथ संघर्ष समिति ने सोमवार से तीन दिनों का जेल भरो आंदोलन चल रहा है.

ग़ौरतलब है कि अमरनाथ मंदिर बोर्ड को 40 हेक्टेयर जंगल की ज़मीन दिए जाने और फिर उसे रद्द किए जाने के फ़ैसले के विरोध में प्रदर्शन के दौरान अब तक 12 लोगों की मौत हो चुकी है और कई लोग घायल हो चुके हैं.

सरकार ने ज़मीन अमरनाथ मंदिर बोर्ड को देने के बाद इसे वापस ले लिया था क्योंकि इसके विरोध में कश्मीर घाटी में हिंसक प्रदर्शन शुरू हो गए थे.