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शनिवार, 05 जुलाई, 2008 को 02:37 GMT तक के समाचार

अल्ताफ़ हुसैन
बीबीसी संवाददाता, श्रीनगर

दरगाह में आग, विरोध में प्रदर्शन

भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर की एक महत्वपूर्ण दरगाह में आग लगने की घटना के विरोध में प्रदर्शन हुए हैं. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठी चार्ज किया और आँसू गैस छोड़ी और धायलों में तीन पत्रकार शामिल हैं.

आग लगने की घटना जेनाब साहब दरगाह में हुई है जो श्रीनगर में तीसरी सबसे महत्वपूर्ण दरगाह है जहाँ पैगंबर हज़रत मोहम्मद के स्मृति अवशेष रखे गए हैं.

आग लगने की इस घटना के विरोध में शहर के सौरा इलाक़े में औरतों और बच्चों समेत लोग सड़कों पर उतर आए. इनका आरोप है कि दरगाह में कोई बम रखा गया था जिससे वहाँ आग लगी है.

एक रोती हुई बच्ची ने बीबीसी से कहा, "मैं घर पर थी जब मैंने एक ज़ोरदार धमाके की आवाज़ सुनी और बाहर आने पर मैंने देखा कि दरगाह में आग लगी हुई है." एक युवती का कहना था, "यह आगज़नी की घटना है जिसका मक़सद हिंदू-मुसलमान को लड़ाना था."

लोगों का कहना था कि आग लगने की घटना के बाद पुलिस वाले कहीं नज़र नहीं आ रहे थे.

पुलिस के एक प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया है कि वरिष्ठ अधिकारियों ने घटनास्थल का दौरा करने के बाद कहा है कि ऐसा प्रतीत होता है कि यह एक दुर्घटना थी. उन्होंने ये भी बताया है कि जाँच चल रही है.

लाठीचार्ज के विरोध में बंद

मेरे पहुँचने से पहले आग बुझाई जा चुकी थी. दरगाह के दूसरे तल की छत को आग से नुक़सान पहुँचा है लेकिन मोहम्मद साहब के अवशेष पूरी तरह से सुरक्षित हैं.

शुक्रवार को हज़रतबल दरगाह तक जुलूस निकालने वालों पर पुलिस लाठीचार्ज के विरोध में शनिवार को घाटी में पहले से बंद है.

अमरनाथ मंदिर बोर्ड को भू-आवंटन रद्द करने के समर्थन में दरगाह मार्च कर रहे अलगाववादी नेता शब्बीर शाह पुलिस कार्रवाई में घायल हो गए थे. उनका इलाज चल रहा है.

उसी के विरोध में हुर्रियत कॉंफ़्रेंस ने शनिवार को कश्मीर घाटी में बंद का आह्वान किया है. पैंपोर, पुलवामा, अनंतनाग समेत घाटी के दूसरे शहरों में भी दुकानें बंद हैं.

जम्मू के कुछ इलाक़ों में कर्फ़्यू लागू है. लोगों को ज़रुरी सामान जुटाने में सुविधा हो, इसके लिए शुक्रवार को कर्फ़्यू में एक घंटे की ढील दी गई थी.

इस बीच पिछले सप्ताह अमरनाथ मंदिर बोर्ड को ज़मीन देने के विरोध में हुए प्रदर्शनों के दौरान आँसू गैस के खोल की चोट से ज़ख़्मी हो गए एक युवक की मौत हो गई है.

इसके साथ ही इन प्रदर्शनों में पुलिस की गोली से मारे गए लोगों की संख्या बढ़कर छह हो गई है.

मार्च को विफ़ल करने की कोशिश

हुर्रियत कॉंफ़्रेंस के नेताओं ने पहले ही घोषणा की थी कि वो ज़मीन का आवंटन रद्द करने के समर्थन में हजरतबल दरगाह तक मार्च करेंगे और जुम्मे की नमाज़ के बाद लोगों को संबोधित करेंगे.

इसे देखते हुए पुलिस ने हुर्रियत नेता मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़ और सैयद अली शाह गिलानी को नज़रबंद कर दिया था.

सरकार नियंत्रित वक़्फ़ बोर्ड ने कहा था कि हजरतबल पवित्र स्थान है और वहाँ राजनीतिक गतिविधि की अनुमति नहीं दी जाएगी. लेकिन शब्बीर शाह किसी तरह से दरगाह पहुँचने में कामयाब हो गए.

उन्होंने जुलूस की शक्ल में नमाज़ के लिए वहाँ पहुँचे लोगों को संबोधित भी किया लेकिन उसी समय पुलिस ने मार्च विफल करने के लिए लाठीचार्च किया और आँसू गैस के गोले छोड़े.