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'ऊर्जा संकट का ग़रीबी से सीधा संबंध'
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कांग्रेस महासचिव और युवा सांसद राहुल गांधी ने कहा है ऊर्जा संकट का ग़रीबी से सीधा संबंध है और इस समझौते से ग़रीबों का भला
हो सकता है.
लोकसभा में यूपीए सरकार के विश्वासमत पर चल रही बहस में हिस्सा लेते हुए उन्होंने कहा कि परमाणु समझौता देश के भविष्य के लिए ज़रुरी है. महासचिव और राहुल गांधी को भी अपने भाषण के शुरुआत में विपक्षी टोका-टाकी का सामना करना पड़ा. विपक्षी सदस्यों के लगातार हस्तक्षेप के बीच लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने सदस्यों से चुप रहने की अपील की लेकिन इसका असर न होने पर सदन की कार्यवाही भोजनावकाश के लिए स्थगित करनी पड़ी. दो हिस्सों में दिए गए अपने भाषण में राहुल गांधी ने किसी भी राजनीतिक दल पर हमला नहीं किया और आंकड़ों का ज़िक्र करने से बचते रहे. भारतीय की तरह राहुल गांधी ने अपने भाषण की शुरुआत करते हुए कहा कि वे अपनी बात किसी राजनीतिक दल के सदस्य के रुप में नहीं बल्कि एक भारतीय की तरह करेंगे.
उनका कहना था कि वे मानते हैं कि सदन में हर दल के सदस्य अपनी बात एक भारतीय की तरह ही रख रहे हैं और देशहित की बात कर रहे हैं. उन्होंने कहा, "हम इस समय देश के ऊर्जा सुरक्षा के बारे में बात करने के लिए एकत्रित हुए हैं और यह देश की एक गंभीर समस्या है." जब विपक्ष के एक सदस्य ने कहा कि ग़रीबी एक बड़ी समस्या है, तो राहुल गांधी ने कहा कि ग़रीबी का भी सीधा संबंध ऊर्जा संकट से है. उन्होंने तीन दिन पहले की अपनी विदर्भ यात्रा का ज़िक्र करते हुए बताया कि कैसे एक मज़दूर माँ-बाप के तीन बच्चे बिना बिजली के अपनी पढ़ाई कर रहे हैं. उन्होंने आत्महत्या करने वाले एक किसान की विधवा कलावती का भी ज़िक्र किया जिसने अपने नौ बच्चों के लालन-पालन के लिए कई नए उपाय किए हैं और अपने भविष्य को सुरक्षित किया है. इन उदाहरणों को ऊर्जा संकट से जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि देश को भी परमाणु ऊर्जा को भारत को ऊर्जा के मूल स्रोत के रुप में देखना होगा और भविष्य के लिए बीमा पॉलिसी के रुप में देखना होगा. अपील राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को परमाणु ऊर्जा के अवसर को सही समय पर पहचान लिया है. उन्होंने माना कि इससे पहले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी इसे पहचाना था और इस पर विचार किया था.
कांग्रेस के युवा सांसद ने कहा कि इस समझौते के बिना एक तो भारतीय वैज्ञानिकों को तकनीक नहीं मिल रही है और दूसरे उन्हें इस क्षेत्र में काम करने के लिए निवेश भी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है. परमाणु संयंत्रों से बनने वाली बिजली की मात्रा की बहस को बेमानी बताते हुए उन्होंने कहा, "देखना यह होगा कि हम आने वाले 30-40 साल में इसका किस तरह से उपयोग कर पाते हैं." उन्होंने कहा, "इस बात की चिंता करने की ज़रुरत नहीं है कि दुनिया का हम पर क्या असर होगा बल्कि देखना यह होगा कि हम दुनिया पर क्या असर डाल पाते हैं." राहुल गांधी ने सभी दलों के युवा सांसदों से देश के लिए साथ आने की अपील करते हुए कहा, "इस देश में कौन सी सरकार रहेगी यह महत्वपूर्ण नहीं है, अभी देश में कई सरकारें आएँगीं...ज़रुरी यह है कि हम साथ आएँ और देश की समस्या को मिलकर सुलझाएँ." उनका सुझाव था, "हम जो भी क़दम उठाएँ वह डर के साथ न उठाएँ बल्कि हिम्मत और विश्वास के साथ उठाएँ." विश्वासमत प्रस्ताव का समर्थन करते हुए राहुल गांधी ने कहा, "प्रधानमंत्री ने यह समझौता करके हिम्मत दिखाई है." |
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