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रविवार, 29 जून, 2008 को 20:27 GMT तक के समाचार
 
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समलैंगिकों ने अधिकारों के लिए रैली निकाली
 

 
 
समलैंगिकों की रैली
समलैंगिक
भारत में भी समलैंगिकता को क़ानूनी दर्जा देने की मांग ज़ोर पकड़ने लगी है.

रविवार को देश विदेश से आए समलैंगिकों और उनके समर्थकों ने दिल्ली में एक रैली निकाली.

अनूठे अंदाज़, गाने बाजे और नारों के साथ इन लोगों ने सरकार से भारतीय दंड संहिता की धारा 377 को ख़त्म करने की मांग की जिसके तहत समलैंगिकता एक दंडनीय अपराध है.

रैली में लोगों का कहना था कि ये एक प्राकृतिक कृत्य है और आज़ाद देश में हर व्यक्ति को राजनीतिक आज़ादी के साथ साथ सेक्सुअल आज़ादी भी चाहिए. यानी इन्हें समलैंगिक संबंधों के लिए क़ानूनी बंदिश मंजूर नहीं.

दिल्ली में जुटे समलैंगिकों में न सिर्फ़ युवक युवतियाँ, बल्कि अनेक उम्रदराज़ लोग भी पूरे जोशोख़रोश के साथ हिस्सा ले रहे थे.

जुटे समलैंगिक

लेकिन इस मांग के अलावा इस प्रदर्शन का कुछ और भी मकसद था.

मुंबई से आए एक पत्रकार जो खुद भी समलैंगिक हैं, उनका कहना था कि अभी इन लोगों की कोशिश ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को जागरूक करना है कि ये कोई असामाजिक काम नहीं है बल्कि जीवन का एक हिस्सा है.

 इस रैली का मकसद अधिक से अधिक लोगों को जोड़ना है और ये बताना है कि इसमें ऐसा कुछ नहीं जिसे छिपाया जाए.
 
सुनील गुप्ता

लेकिन अनेक लोग ऐसे भी थे जो रैली में तो आए थे और उनका दावा था कि वे खुद भी समलैंगिक हैं.

रैली में हिस्सा लेनेवाले सुनील गुप्ता का कहना था कि इस रैली का मकसद अधिक से अधिक लोगों को जोड़ना है और ये बताना है कि इसमें ऐसा कुछ नहीं जिसे छिपाया जाए.

लेकिन मीडिया से बातचीत में रैली में हिस्सा ले रहे लोगों को झिझक महसूस हो रही थी और वे इससे बच रहे थे.

ऐसी स्थिति में वे कैसे इस क़ानून को खत्म करने की मांग कर सकते हैं, इसका उनके पास कोई जवाब नहीं था.

बावजूद इसके सैकड़ों समलैंगिक इस रैली को लेकर काफ़ी उत्साहित थे और उन्हें पूरा विश्वास था कि आने वाले दिनों में उनके अभियान में न सिर्फ हज़ारों लोग शामिल होंगे बल्कि वे इसे क़ानूनी मंजूरी दिलाने में भी कामयाब होंगे.

 
 
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