रविवार, 18 मई, 2008 को 05:44 GMT तक के समाचार
अफ़ग़ानिस्तान के पश्चिमी इलाक़े से अगवा किए गए भारतीय नागरिक को अपहरणकर्ताओं से रिहा करा लिया गया है.
इस भारतीय नागरिक के अलावा एक नेपाली नागरिक को भी रिहा कराया गया है.
इन दोनों लोगों का अपहरण 27 दिन पहले किया गया था. ये दोनों ही अफ़ग़ानिस्तान में एक निजी सुरक्षा कंपनी में काम कर रहे हैं.
अफ़ग़ानिस्तान के ख़ुफिया एजेंटों ने हेरात प्रांत के एक इलाके में बनी एक गुफ़ा में छापा मारकर इन्हें रिहा कराया.
अफ़ग़ानिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसियों ने इसी गुफ़ा से अग़वा करने वाले गिरोह के मुखिया को भी गिरफ़्तार कर लिया है.
इससे पहले शनिवार को तालेबान विद्रोहियों ने पाकिस्तान के राजदूत को भी रिहा कर दिया था.
अफ़गानिस्तान की राजधानी काबुल में भारत के राजदूत जयंत प्रसाद ने बताया कि भारतीय नागरिक मोहम्मद नईम और नेपाली नागरिक केबी गुरांग हेरात प्रांत में रविवार की सुबह अपनी कंपनी में पहुँच चुके हैं.
ये दोनों एक अमरीकी सुरक्षा कंपनी के लिए काम करते हैं.
इन लोगों को उस वक्त अगवा कर लिया गया था जब ये दोनों कंपनी की कार से आ रहे थे. तभी अपरणकर्ताओं ने घात लगाकर इनकी कार पर हमला कर इन्हें पकड़ लिया था.
इनकी कंपनी हेरात प्रांत के अद्रास्कन इलाक़े में है.
दूतावास के अधिकारियों ने जानकारी दी कि दोनों सुरक्षित हैं और स्वस्थ्य हैं. फिलहाल इनकी मेडिकल जाँच की जा रही है.
इसके बाद इन्हें अपने-अपने घर भिजवा दिया जाएगा.
शनिवार को हुई रिहाई
अपहरणकर्ताओं ने इन्हें शनिवार को रिहा कर दिया गया. इन दोनों को एक पहाड़ी इलाक़े पर छोड़ दिया गया था.
राजदूत जयंत प्रसाद ने इस पूरे मामले में अगवा किए गए लोगों की रिहाई के लिए अफ़ग़ानिस्तान सरकार का धन्यवाद किया.
प्रसाद ने कहा, "अफ़गानिस्तान ने दोनों की सुरक्षित रिहाई के लिए की गई कोशिशें सराहनीय हैं."
अधिकारियों के अनुसार इनका अपहरण हेरात के इलाक़े में अपराधों में लिप्त एक गिरोह ने ही किया था.
अफ़गानिस्तान के सुरक्षा बल और अधिकारियों के दबाव की वजह से ही इस गिरोह ने इन दोनों को रिहा किया है.
भारतीय नागरिक मोहम्मद नईम को पिछले महीने 22 अप्रैल को हेरात प्रांत से अगवा कर लिया गया था.
नईम उस वक्त एक टैक्सी पर सवार होकर हाइवे से अद्रास्कन जा रहे थे.
अफ़ग़ानिस्तान में हज़ारों भारतीय
अफ़ग़ानिस्तान में इस वक्त तक़रीबन 4 हज़ार भारतीय नागरिक अलग-अलग परियोजनाओं में काम कर रहे हैं.
भारतीय नागरिकों पर इसी तरह हर बार अपहरण किए जाने का ख़तरा बना रहता है.
अधिकतर माना जाता है कि अफ़ग़ानिस्तान में इन सारे अपहरणों के पीछे तालेबान विद्रोहियों का हाथ होता है.
दरअसल, अफ़ग़ानिस्तान में ज़रंज से देलाराम तक एक सड़क का निर्माण कार्य चल रहा है और इस काम को अंजाम दे रही हैं भारतीय निर्माण कंपनियाँ.
लेकिन तालिबान विद्रोही नहीं चाहते कि भारत इस सड़क मार्ग को बनाए.
इस सड़क के बन जाने के बाद अफ़ग़ानिस्तान मध्य एशिया के अपने पड़ोसी देशों से सीधे जुड़ जाएगा.
फिलहाल, किसी भी किस्म की व्यापारिक गतिविधियों के लिए अफ़गानिस्तान से गाड़ियों को पाकिस्तान होते हुए ईरान या भारत की तरफ़ आना-जाना पड़ता है.
इस सड़क रास्ते के बन जाने के बाद अफ़गानिस्तान ईरान और भारत से सीधे तरीक़े से जुड़ जाएगा.
भारत ने अफ़गानिस्तान में अलग-अलग निर्माण कार्यों में कई अरब रुपए लगाए हैं.
इस सड़क के बन जाने से भारत अफ़ग़ानिस्तान के रास्ते मध्य एशिया के देशों से सीधे जुड़ जाएगा.