शनिवार, 17 मई, 2008 को 06:31 GMT तक के समाचार
भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भूटान की संसद को संबोधित करते हुए 'दक्षिण एशिया में शांति' की ज़ोरदार वक़ालत की है.
उन्होंने कहा कि पूरे क्षेत्र को सुरक्षित और समृद्ध बनाने में सहयोग के लिए भारत तैयार है.
हिमालय की गोद में बसे भूटान की यात्रा पर थिंपू गए भारतीय प्रधानमंत्री भूटान में लोकतांत्रिक ढंग से चुनी गई संसद को संबोधित करने वाले पहले विदेशी नेता हैं.
उन्होंने कहा, "भारत एक ऐसा दक्षिण एशिया देखना चाहता है जिसमें शांति हो. हम सुरक्षा, शांति और समृद्धि के दायरे को और बढ़ाने में सहयोग करना चाहते हैं."
भारतीय प्रधानमंत्री ने कहा, "द्विपक्षीय और क्षेत्रीय दोनों ही संदर्भों में हम इसी लक्ष्य के साथ भूटान के साथ आगे काम करने की ओर देख रहे हैं. भविष्य के बारे में जो हमारी सोच है उसमें एक संप्रभु, समृद्ध और सुरक्षित भूटान प्रमुख है."
द्विपक्षीय संबंधों की मज़बूती
उन्होंने कहा कि भूटान की नई और पहली निर्वाचित सरकार के साथ भारत अपने द्विपक्षीय संबंधों को और मज़बूत करने को तैयार है.
भारतीय प्रधानमंत्री ने भूटान के साथ पनबिजली परियोजना के क्षेत्र में और सहयोग बढ़ाने का इरादा जताया.
उन्होंने कहा कि 2020 तक भूटान के बिजली उत्पादन को दस हज़ार मेगावाट तक ले जाने का लक्ष्य है जिसमें से भारत को भी बिजली मिले.
मनमोहन ने भूटान को शिक्षा, तकनीक, दूरसंचार, मीडिया जैसे क्षेत्रों में अपनी विशेषज्ञता का लाभ देने की पेशकश की.
उन्होंने भारत के प्रमुख विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों में पढ़ने के इच्छुक भूटानी विद्यार्थियों के लिए 'नेहरू-वांगचुक छात्रवृत्ति' योजना की भी घोषणा की.
भूटान से कुछ सीख
भारत और भूटान के बीच रेल संपर्क कायम करने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के बीच रेल लाइन के निर्माण का ऐलान किया जिसका नाम 'स्वर्ण जयंती रेल मार्ग' होगा.
भारतीय प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देशों के संबंधों में नए युग की शुरुआत हो रही है.
हिमालय और जलवायु परिवर्तन का जिक्र करते हुए मनमोहन सिंह ने कहा कि उनका देश भूटान से पर्यावरण को कम नुक़सान पहुँचाने वाली विकास के बारे में कुछ सीखना चाहेगा.
इसके साथ ही दुनिया भर में बढ़ते तापमान के असर को कम करने और इसे रोकने में अपनी तरफ़ से योगदान देने में भी उन्होंने भूटान के साथ मिलकर काम करने की इच्छा जताई.