सोमवार, 12 मई, 2008 को 10:49 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) ने कैबिनेट से हटने का फ़ैसला किया है.
बर्ख़ास्त जजों की बहाली को लेकर पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के साथ हुए मतभेद के बाद यह फ़ैसला हुआ है. पार्टी प्रमुख नवाज़ शरीफ़ ने बताया कि उनकी पार्टी सरकार को समर्थन देना जारी रखेगी.
पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) की केंद्रीय कार्यकारी समिति की बैठक में यह फ़ैसला हुआ. पार्टी ने आपात बैठक सरकार में बने रहने के विचार के लिए बुलाई थी.
पाकिस्तान में इस समय गठबंधन सरकार है और इसका नेतृत्व पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी कर रही है. लेकिन सत्ताधारी गठबंधन में पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) की भी बड़ी संख्या है.
आपातकाल के समय बर्ख़ास्त जजों की बहाली को लेकर कुछ दिनों पहले नवाज़ शरीफ़ और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के सह अध्यक्ष आसिफ़ अली ज़रदारी के बीच सहमति हुई थी.
समझौते के मुताबिक़ बर्ख़ास्त जजों को 12 मई तक फिर से बहाल किया जाना था. लेकिन जजों की बहाली कैसे हो- इस पर दोनों दलों में मतभेद उभर आए हैं.
असर
लंदन में दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत में भी कोई निष्कर्ष नहीं निकल पाया.
लंदन में हुई बैठक के बाद नवाज़ शरीफ़ ने कहा था, "मेरा मानना है कि इस बातचीत के नाकाम हो जाने से हर पाकिस्तानी निराश है. इस मुद्दे पर हरसंभव कोशिश के बावजूद हम अड़चनों को ख़त्म करने में विफल रहे हैं."
नई सरकार ने शुरू में वादा किया था कि अप्रैल के आख़िर तक बर्ख़ास्त जजों को बहाल कर दिया जाएगा. लेकिन जजों की बहाली कैसे की जाए, इस पर विवाद था.
विवाद
10 दिन पहले नवाज़ शरीफ़ और आसिफ़ अली ज़रदारी के बीच दुबई में बातचीत हुई थी. बातचीत के बाद नवाज़ शरीफ़ ने घोषणा की थी कि बर्ख़ास्त जजों को 12 मई तक बहाल कर दिया जाएगा.
चुनाव में नवाज़ शरीफ़ की पार्टी ने वादा किया था कि सत्ता में आने के बाद वे तुरंत बर्ख़ास्त जजों को बहाल कर देंगे.
लेकिन पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के सह अध्यक्ष आसिफ़ अली ज़रदारी का मानना है कि जजों की बहाली उस बड़े संवैधानिक सुधार वाले पैकेज का हिस्सा होना चाहिए जिसके तहत उनके अधिकारों को भी कम करने की बात है.
पिछले साल नवंबर में पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने देश में आपातकाल की घोषणा करके क़रीब 60 जजों को बर्ख़ास्त कर दिया था.