गुरुवार, 08 मई, 2008 को 10:06 GMT तक के समाचार
तिब्बत के निर्वासित धर्मगुरु दलाईलामा के प्रतिनिधि कसूर लोदी ग्याल्तसेन ग्यारी का कहना है कि पिछले हफ़्ते चीन के अधिकारियों के साथ बेबाक बातचीत हुई.
चीन से वापस लौटे लोदी ग्यारी ने बातचीत पर अपनी पहली प्रतिक्रिया में कहा तिब्बत में हाल में हुई घटनाओं के कारणों के बारे में दोनो ही पक्षों के स्थिर और अलग-अलग विचार थे.
चीन के शेनज़ेन शहर में हुई इस बातचीत में चीन की तरफ़ से उपमंत्री झू वेक्वन और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के सिथार ने भाग लिया.
चीन की नीतियाँ ज़िम्मेदार
दलाईलामा का प्रतिनिधित्व कसूर लोदी ग्याल्तसेन ग्यारी और केल्सांग ग्याल्तसेन ने किया.
ग्यारी ने कहा कि उन्होंने चीन के अधिकारियों के उन आरोपों का कड़ा खंडन किया जिनमें दलाईलामा पर आरोप लगाया गया था कि वह तिब्बत में अशांति को बढ़ावा दे रहे हैं.
ग्यारी ने कहा, "हमने उनसे कहा कि तिब्बत की स्थिति के लिए वहाँ के लोगों के ख़िलाफ़ चीन की कई दशकों से जारी नीतियाँ ज़िम्मेदार हैं."
"तिब्बत के लोगों में बेहद ग़ुस्सा है, उन्हें ढेर सारी शिकायते हैं और इन सबका कारण चीन सरकार की नीतियाँ हैं. चीन सरकार को तिब्बत के लोगों की जायज़ चिंताओं के समाधान की कोशिश करनी चाहिए."
ग्यारी ने कहा कि बातचीत में उन्होंने चीन के अधिकारियों से तिब्बत में कथित रूप से जारी दमन को बंद करने को कहा.
उनका कहना था, "हमने उनसे जेल में बंद क़ैदियों की रिहाई की माँग की. हमने उनसे आग्रह किया कि वह घायलों को चिकित्सा सुविधाएँ मुहैया करवाएँ और मीडिया को इजाज़त दें कि वह कहीं भी जा सके."
ग्यारी ने कहा कि उनके दल ने इन आरोपों को नकार दिया कि दलाई लामा चीन में होने वाले ओलंपिक 2008 में विघ्न डालने की कोशिश कर रहे हैं.
"हमने स्पष्ट कर दिया कि दलाई लामा बीजिंग में होने वाले ओलंपिक का शुरु से ही समर्थन करते रहे हैं और उसमें कोई शक की गुंजाइश नहीं है."
दलाई लामा के दूत ने कहा कि दोनों ही पक्षों ने कुछ ठोस प्रस्ताव दिए हैं जो भविष्य में होने वाली बैठकों का हिस्सा होंगी.
उन्होंने कहा कि सातवें दौर की बातचीत की तारीख़ की घोषणा जल्द ही की जाएगी.
ग्वारी ने मीडिया को बताया कि वह चीन के दलाई लामा राष्ट्रपति के उस बयान का स्वागत करते हैं जिसमें कहा गया कि उनकी सरकार बातचीत के बारे में गंभीर है.