शनिवार, 03 मई, 2008 को 14:10 GMT तक के समाचार
भारत में सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्ष सभी ने अमरीकी राष्ट्रपति बुश के उस बयान की आलोचना की है जिसमें उन्होंने महँगाई को भारत से जोड़ा है.
शुक्रवार को राष्ट्रपति बुश ने भारत में खाद्यान्न की बढ़ती मांग को दुनियाभर की महंगाई से जोड़ा था.
सभी राजनीतिक दलों का कहना है कि दुनियाभर में खाद्यान्न की बढ़ती क़ीमत की प्रमुख वजह अमरीका में बायो ईंधन का बढ़ता उत्पादन है जिसके कारण लोग खाद्यान्न की जगह बायो ईंधन पर ज़्यादा ध्यान दे रहे हैं.
विपक्षी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की अगुआई कर रही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भी राष्ट्रपति बुश के बयान की आलोचना की है.
पार्टी के नेता विजय कुमार मल्होत्रा ने कहा कि अमरीका में अन्न की कमी की झेंप मिटाने के लिए बुश ने यह बेतुकी बातें कही हैं.
वाणिज्य और उद्योग मंत्री कमलनाथ ने विश्व में अनाज की समस्या के लिए अमेरिका और अन्य देशों की कृषि सब्सिडी नीति को जिम्मेदार ठहराया है.
वाणिज्य राज्य मंत्री जयराम रमेश का कहना है कि राष्ट्रपति बुश का आकलन पूरी तरह ग़लत है.
जयराम रमेश ने कहा, "जॉर्ज बुश को कभी भी अर्थशास्त्र की जानकारी के लिए नहीं जाना जाता है और ये बात उन्होंने फिर साबित कर दी है कि वे इस मामले में कितने ग़लत हैं. ये कहना कि भारत में खाद्यान्न की बढ़ती मांग से दुनियाभर में महंगाई बढ़ रही है, पूरी तरह ग़लत है."
कांग्रेस ने भी राष्ट्रपति बुश के बयान की आलोचना की है और कहा है कि उनका आकलन तथ्यहीन है.
कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा, "भारत खाद्यान्न का आयातक नहीं निर्यातक है. ये आकलन कि बदलते भारत के कारण क़ीमतें बढ़ रही हैं, पूरी तरह ग़लत है."
संकट
उन्होंने कहा कि संकट की असली वजह विकसित देशों में बायो ईंधन का बढ़ता उत्पादन है और इसके लिए कृषि भूमि का इस्तेमाल हो रहा है. साथ ही मौसम का बदलता मिज़ाज भी इसकी एक वजह है.
वामपंथी दलों ने इसे बुश प्रशासन की नव-उदार आर्थिक नीति कहा है, जिसे अमरीका भारत पर थोपने की कोशिश कर रहा है. दूसरी ओर विपक्षी भारतीय जनता पार्टी ने राष्ट्रपति बुश के बयान पर केंद्र सरकार को ही आड़े हाथों लिया है.
पार्टी का कहना है कि सरकार बढ़ती क़ीमतों को रोक पाने में विफल रही है.
शुक्रवार को मिसौरी में एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति बुश ने कहा था कि भारत जैसे देशों में समृद्धि अच्छी बात है लेकिन इसके कारण बेहतर आहार की मांग बढ़ती है और अंतत: खाद्यान्न की क़ीमतें बढ़ती हैं.
पिछले दिनों अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ने भी ऐसा ही तर्क दिया था.
उन्होंने कहा था कि भारत और चीन जैसे देशों में लोगों के खान-पान के स्तर में हुई बेहतरी और खाद्यान्न सामग्रियों के निर्यात पर लगी रोक इस समय दुनियाभर में खाद्यान्न संकट के कारणों में से एक है.