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गुरुवार, 15 मई, 2008 को 15:57 GMT तक के समाचार
 
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दो जान की क़ीमत दो रुपए?
 
भारत में एक बस
भारत में अक्सर बसें नियमों का पालन नहीं करतीं
इंसानी बेरहमी की इससे ज़्यादा क्रूर मिसाल शायद ही और कोई हो.

उड़ीसा में हुई एक घटना सुनकर पहली प्रतिक्रिया यही होती है कि दो जान की क़ीमत क्या दो रुपए हो सकती है?

यह घटना किसी एक व्यक्ति ही नहीं बल्कि पूरी इंसानियत पर सवाल उठाती है कि क्या कोई इंसान इतना संवेदनहीन भी हो सकता है.

उड़ीसा में हुई एक घटना के अनुसार एक बस कंडक्टर ने सिर्फ़ दो रुपए के लिए एक बाप-बेटी को चलती बस से धक्का दे दिया और नतीजा जो हुआ उसे सोचकर भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं.

नतीजा ये हुआ कि कंडक्टर ने चलती बस से जब बाप-बेटी को धक्का दिया तो वे दोनों ही चलती बस के पहिये के नीचे आ गए और अपनी जान से हाथ धो बैठे.

वह बेचारा चार साल की अपनी मासूम बेटी को लेकर किसी मंज़िल की ओर निकला था लेकिन मौत ने कंडक्टर का रूप धारण करके उन्हें मंज़िल की तरफ़ बढ़ने ही नहीं दिया.

दो रुपये ही कम थे

उड़ीसा पुलिस का कहना है कि 35 वर्षीय एक आदिवासी व्यक्ति सनीचर टोप्पो तलपतिया नामक स्थान पर बस पर चढ़ा था लेकिन उसके पास किराए के पूरे पैसे नहीं थे, सिर्फ़ दो रुपए कम पड़ रहे थे.

कंडक्टर ने सनीचर की यह फ़रियाद बिल्कुल अनसुनी कर दी कि सचमुच में ही उसके पास दो रुपए नहीं हैं. उसकी यात्रा का पूरी किराया बनता था दस रुपए, यानी उसके पास आठ रुपए तो थे लेकिन दो रुपए नहीं थे, तो वह कहाँ से लाता.

पुलिस को मिली जानकारी के अनुसार बस में बैठे अनेक यात्रियों ने कंडक्टर की बेरहमी को देखते हुए पेशकश भी की कि सनीचर के दो रुपए उनमें से कोई भी दे देगा लेकिन कंडक्टर किसी की भी सुनने को तैयार नहीं था.

पुलिस का कहना है कि उसे मिली जानकारी के अनुसार झगड़ा बढ़ा तो कंडक्टर ने सनीचर और उसकी चार साल की बेटी को एक साथ बस से कथित रूप से धक्का दे दिया. उस समय वह बस राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 10 पर चल रही थी.

बाद में उस कंडक्टर और चालक को गिरफ़्तार कर लिया गया. बस में सवार यात्रियों और स्थानीय लोगों ने बस को आग लगा दी और सड़क को भी कुछ देर के लिए जाम कर दिया. पुलिस ने पहुँचने के बाद रास्ता खुलवाया और भीड़ को वहाँ से हटाया.

राज्य के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने इस घटना पर अफ़सोस ज़ाहिर किया है और मारे गए टोप्पो के निकट संबंधियों को एक लाख रुपए का मुआवज़ा देने की घोषणा की है.

 
 
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