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घटता लिंग अनुपात एक कलंक: मनमोहन
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देश के अमीर राज्यों में घटते लिंग अनुपात की समस्या को विकट बताते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि भारत प्रतिकूल लिंग
संतुलन के कलंक के साथ जी रहा है.
दिल्ली में लड़की बचाओ विषय पर आयोजित एक राष्ट्रीय बैठक का उद्घाटन करते हुए उन्होंने कहा, "पिछली जनगणना ने घटता लिंग अनुपात दिखाया था. हमारे देश में पैत्रिक समाज की वजह से लड़कियों और महिलाओं के ख़िलाफ़ पक्षपाती रवैया बन गया है." प्रधानमंत्री का कहना था कि यह शर्मनाक है और हमें इस चुनौती को स्वीकार करना होगा. मनमोहन सिंह ने कहा कि कोई भी राष्ट्र, समाज या समुदाय जब तक इस आधी आबादी के खिलाफ़ होने वाले पक्षपात का विरोध नहीं करेगा, तब तक अपना सिर ऊँचा नहीं कर सकता और न ही वह किसी सभ्य समाज का हिस्सा होने का दावा कर सकता है. उन्होंने कहा, "हमारी सभ्यता पुरानी है और हम ख़ुद को आधुनिक देश कहते हैं. लेकिन फिर भी हम महिलाओं के खिलाफ़ सामाजिक पक्षपात की वजह से पनपे प्रतिकूल लिंग संतुलन के कलंक के साथ जी रहे हैं." अमीर राज्यों में विकट प्रधानमंत्री का कहना था, "जनगणना के आँकड़े बताते हैं कि देश के कुछ अमीर राज्यों में यह मस्या ज़्यादा विकट है जैसे पंजाब जहाँ प्रति एक हज़ार लड़कों पर सिर्फ़ 798 लड़कियाँ हैं, हरियाणा में 819, दिल्ली में 868 और गुजरात में 883 कन्याएं हैं." प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे संकेत मिलते हैं कि बढ़ती आर्थिक संपन्नता और शिक्षा के विकास ने भी इस समस्या को कम नहीं किया है. सामाजिक जागरुकता पर ज़ोर देते हुए मनमोहन सिंह ने कहा, "हमें सामाजिक जागरूकता और जन्म से पूर्व भ्रूण के लिंग परीक्षण आदि के खिलाफ़ कानून को कड़ाई से लागू कर इस समस्या को सुलझाना चाहिए." उन्होंने कहा, "मैं सभी संबंधित लोगों से अपील करता हूँ कि वे जीवन बचाने की इस तकनीक के दुरुपयोग पर रोक लगाएँ." लिंग अनुपात की घटती दर को रोकने की सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्रालय पंचायतों के चुने गए लाखों प्रतिनिधियों और स्थानीय प्रतिनिधियों के माध्यम से इस पर नियंत्रण करने की कोशिश करेगा.
मौन आपातकाल उन्होंने कहा, "इससे भी ज़्यादा ध्यान महिलाओं की शिक्षा पर दिया जाएगा ताकि आज हमारे देश में लिंग अनुपात की जो समस्या है उसके बारे में लोग भी समझें." प्रधानमंत्री ने कहा, "हमें समाज के नेताओं, ख़ासतौर पर धार्मिक नेताओं को इस दिशा में अग्रसर करने की ज़रूरत है, कि वे समाज में महिलाओं के प्रति हो रहे हर तरह के भेदभाव के ख़िलाफ़ राष्ट्रव्यापी अभियान चलाएं." महिला और शिशु विकास मंत्री रेणुका चौधरी ने घटते लिंग अनुपात को 'मौन आपातकाल' बताया. उन्होंने कहा, "ऐसा काम करने वाले लोग शिक्षित और संभ्रांत हैं. इससे उन महिलाओं पर शारीरिक दबाव भी बढ़ता है जो बेटे की ख़्वाहिश में कई संतानों को जन्म दे देती हैं." प्रधानमंत्री का कहना था कि स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ मिलकर इस समस्या से निबटने के लिए एक साझा कार्यक्रम शुरू किया जाएगा." |
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