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मंगलवार, 25 मार्च, 2008 को 04:22 GMT तक के समाचार

गीलानी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली

पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के नेता यूसुफ़ रज़ा गीलानी ने मंगलवार को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री पद की शपथ ले ली.

राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने इस्लामाबाद स्थित राष्ट्रपति भवन में उन्हें पद की शपथ दिलाई.

सोमवार को पाकिस्तानी संसद नेशनल असेंबली ने उनके नाम की पुष्टि कर दी थी.

इसके बाद नेशनल असेंबली की अध्यक्ष फ़हमीदा मिर्ज़ा ने यूसुफ़ रज़ा गीलानी का नाम राष्ट्रपति भवन भेज दिया था.

यूसुफ़ रज़ा गीलानी मुस्लिम लीग़ (नवाज़) के साथ मिलकर बनने वाली गठबंधन सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के रूप में चुने जाने के बाद यूसुफ़ रज़ा गीलानी के तेवर तीख़े लग रहे हैं.

संसद में चुने जाने के बाद उन्होंने राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ को विवादित मुद्दों पर चुनौती दे डाली.

पहले तो उन्होंने नज़रबंद जजों की रिहाई का वादा किया तो दूसरी ओर पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो की हत्या की संयुक्त राष्ट्र से जाँच कराने की बात कह डाली.

संसद में अपने भाषण के दौरान गीलानी ने कहा कि वे पदभार संभालते ही नज़रबंद जजों की रिहाई का आदेश दे देंगे.

अभी गीलानी संसद में अपना भाषण दे ही रहे थे कि इस्लामाबाद प्रशासन ने नज़रबंद जजों को रिहा कर दिया.

पिछले साल नवंबर में राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने देश में इमरजेंसी लगाई थी. इसके साथ ही तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश इफ़्तिख़ार मोहम्मद चौधरी और अन्य जजों को पद से बर्ख़ास्त करके नज़रबंद कर दिया गया था.

गीलानी ने संसद में कहा, "मैं नेशनल असेंबली से अनुरोध करना चाहता हूँ कि वे एक प्रस्ताव पास करें ताकि बेनज़ीर भुट्टो की हत्या की जाँच संयुक्त राष्ट्र से कराई जा सके."

निशाने पर मुशर्रफ़

दूसरी ओर जजों की रिहाई के साथ ही बड़ी संख्या में वकील, राजनीतिक कार्यकर्ता और नेता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश इफ़्तिख़ार मोहम्मद चौधरी के घर पहुँच गए और मुशर्रफ़ विरोधी नारे लगाने लगे.

जब इफ़्तिख़ार मोहम्मद चौधरी अपने घर की बालकनी में आए तो वहाँ मौजूद लोगों ने तालियाँ बजाकर उनका अभिनंदन किया. इफ़्तिख़ार चौधरी ने बालकनी से ही लोगों को संबोधित किया.

दूसरी ओर संसद में प्रधानमंत्री के चुनाव के बाद कई सांसदों ने राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ की जम कर आलोचना की.

कुछ सांसदों ने नए प्रधानमंत्री को सलाह दी कि वे नई विदेश नीति पर विचार करें और इसमें सुधार लाएँ.

जमीयत उलमा इस्लाम के प्रमुख मौलाना फ़ज़लुर रहमान ने भारत के साथ बेहतर संबंध पर ज़ोर दिया. फ़ज़लुर रहमान भी गठबंधन सरकार में शामिल हैं.