शनिवार, 01 मार्च, 2008 को 17:12 GMT तक के समाचार
सचिन गौड़
दिल्ली से
पाकिस्तान की जेल में बंद कश्मीर सिंह को माफ़ी दिए जाने के बाद वहाँ सज़ा काट रहे सरबजीत सिंह के मामले में भी उम्मीद की किरण दिखाई देने लगी है.
सरबजीत सिंह को 1990 में लाहौर और फ़ैसलाबाद में हुए चार बम धमाकों के सिलसिले में गिरफ़्तार किया गया था.सरबजीत सिंह की फांसी की सज़ा अभी भी बरक़रार है.
सरबजीत को माफ़ी नही दी गई है, उनकी पुनर्विचार याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाख़िल है और सज़ा माफ़ करने की याचिका राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के पास है.
इससे पहले पाकिस्तान में मानवाधिकार मामलो के मंत्री अंसार बर्नी के प्रयासो के मद्देनज़र कश्मीर सिंह को माफ़ी दे दी गई थी. कश्मीर सिंह पिछले 35 सालों से पाकिस्तान की जेल में बंद थे और उन्हें जासूसी के आरोप में मौत की सज़ा सुनाई गई थी.
पाकिस्तान की अंतरिम सरकार में मानवाधिकार मामलों के मंत्री अंसार बर्नी का दावा है कि कश्मीर सिंह के बारे में जानकारी भारत के इस्लामाबाद स्थित उच्चायोग को भी नहीं थी.
लेकिन अंसार बर्नी ने पाकिस्तान की विभिन्न जेलो का दौरा कर ये देखा था कि वहाँ किन हालातों में कैदी अपनी सज़ा काट रहे हैं.
घोषणा
उसके बाद पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने कश्मीर सिंह को रिहा करने का ऐलान किया और अब आशा है कि इस सोमवार को उन्हें रिहा कर दिया जाएगा.
सरबजीत सिंह की बहन दलबीर कौर का कहना है, "कश्मीर सिंह की रिहाई की बात सुनकर मेरा मन ख़ुश भी हुआ और उदास भी हुआ. ख़ुश इसलिए हुआ क्योंकि कश्मीर और सरबजीत सिंह दोनो के मामले मिलते-जुलते हैं इसलिए कश्मीर सिंह की रिहाई से सरबजीत सिंह का रास्ता भी खुल सकता है. मेरा मन उदास इसलिए है क्योंकि अच्छा होता अगर कश्मीर सिंह के साथ सरबजीत सिंह को भी रिहा कर दिया जाता."
सरबजीत सिंह को पाकिस्तान की जेलो में 20 साल हो चुके है. सरबजीत सिंह का केस लड़ रहे वकील राणा अब्दुल हमीद का कहना है कि दोनो सरकारों की हाल ही में क़ैदियों के मसले पर एक बैठक भी हुई थी और तब उन्होंने सरबजीत सिंह को रिहा करने की गुज़ारिश की थी.
सरबजीत सिंह को रिहा करने के लिए कनाडा से भी लोग आए थे और मानवाधिकार संगठनो ने इसे अन्य देशो में भी उठाया था. इसी तरह की कोशिशे पाकिस्तान में भी उच्च स्तर पर जारी है.
राणा अब्दुल हमीद कहते हैं कि इस तरह के क़ैदियो के मामले को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और उनकी रिहाई में देर नही करनी चाहिए.
राणा अब्दुल हमीद का कहना है कि जब वो सरबजीत सिंह से मिले तो वो सामान्य थे और स्वस्थ थे.ज़रूरत पड़ने पर जेल प्रशासन उन्हें चिकित्सा सुविधाएँ भी उपलब्ध कराता है.
दलबीर कौर का कहना है कि हाल ही में उन्होंने पाकिस्तान में ब्रिगेडियर राव आबिद हमीद से बात की है और सरबजीत सिंह से संबंधित सारे काग़ज़ात मानवाधिकार मामलो के मंत्री अंसार बर्नी को सौंप दिए हैं और अंसार बर्नी ने राष्ट्रपति मुशर्रफ़ से बात करने का आश्वासन दिया है.
प्रयास
दलबीर कौर ने इस साल जनवरी में भारतीय विदेश मंत्रालय में अधिकारियों से बात की थी और अब वो राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल से भी मिलने का भी प्रयास कर रही हैं.
पाकिस्तान में कई बम विस्फोटों के आरोप में फाँसी की सज़ा झेल रहे सरबजीत को पाकिस्तान में मनजीत सिंह बताया जा रहा है. उन पर जासूसी और 1990 में कई बम धमाके करवाने का आरोप है जिसमें 14 लोग मारे गए थे.
लेकिन सरबजीत के परिवारवालों का कहना है कि वो एक निर्दोष किसान हैं और उनको भूल से कोई और समझकर पकड़ लिया गया है.
उनपर लाहौर की एक अदालत में मुक़दमा चला और 1991 में उनको मौत की सज़ा सुना दी गई. निचली अदालत की ये सज़ा हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी बहाल रखी.
सरबजीत सिंह की बहन दलबीर कौर ने वाघा सीमा पर जाकर पाकिस्तान के राष्ट्रपति मुशर्रफ़ को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा था. इस ज्ञापन में उनसे मानवीय आधार पर सरबजीत सिंह को रिहा करने का अनुरोध किया था.