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पीपीपी गठबंधन सरकार बनाने को तैयार
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पाकिस्तान चुनाव में सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी के तौर पर उभर कर सामने आई पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी और दूसरे नंबर पर रही पीएमएल(नवाज़)
के नेताओं के कहा है कि वे गठबंधन सरकार बनाने के लिए राज़ी हैं.
दोनों मुख्य विपक्षी पार्टियों -पीपीपी और पीएमएल (नवाज़) ने मिलकर चुनाव नतीजों में बढ़त हासिल की है. अब तक मिले ग़ैर आधिकारिक नतीजों के मुताबिक पीपीपी को 87 और पीएमएल(नवाज़) को 66 सीटें मिली हैं.
अगर ये दोनों पार्टियाँ मिलकर सरकार बनाती हैं तो दोनों के पास संसद की आधी से ज़्यादा सीटें होंगी. कराची में बीबीसी संवाददाता का कहना है कि गठबंधन सरकार बनाने के लिए पर्दे के पीछे काम शुरू हो चुका है. वहीं परवेज़ मुशर्रफ़ को समर्थन देने वाली पार्टी पीएमएल-क्यू ने हार स्वीकार की है. मंगलवार को एक संवाददाता सम्मेलन में पीपीपी के नेता और बेनज़ीर भुट्टो के पति आसिफ़ अली ज़रदारी ने कहा है कि उनकी पार्टी ऐसी सरकार बनाएगी जो सभी लोकतांत्रिक शक्तियों को साथ लेकर चलेगी. जबकि नवाज़ शरीफ़ कहा है कि लोकतांत्रिक शक्तियों को एकजुट होना चाहिए ताकि ‘तानाशाही’ का अंत किया जा सके. नवाज़ शरीफ़ ने कहा कि वो बेनज़ीर भुट्टो की पार्टी पीपीपी के नेता आसिफ़ अली ज़रदारी से मिलेंगे. उनका कहना था, "मैं लोगों की भावना की कद्र करता हूँ. लोगों ने अपना मत ज़ाहिर कर दिया है. लेकिन मुशर्रफ़ को ये बात समझ में नहीं आ रही थी. उन्होंने अपनी आँखें बंद कर रखी थी. उनका कहना था कि जब लोग चाहेंगे वो चले जाएँगे. आज लोगों ने बता दिया है कि वो क्या चाहते हैं." मुशर्रफ़ समर्थक हारे
पाकिस्तान में 18 फ़रवरी को चुनाव करवाए गए थे और आधिकारिक तौर पर नतीजे मंगलवार तक घोषित नहीं किए जाएँगे. राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ को समर्थन देने वाली पीएमएल-क्यू के खाते में अब तक 37 सीटें ही आई हैं. पीएमएल-क्यू ने नेता शुजात हुसैन ने एपी टेलीवीज़न न्यूज़ से बातचीत में कहा कि उनकी पार्टी खुले दिल से नतीजों को स्वीकार करती है और विपक्षी खेमे में बैठने के लिए तैयार है. पाकिस्तान सरकार के कई मंत्रियों को हार का मुँह देखना पड़ा है. पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी शुजात हुसैन नेशनल असेंबली का चुनाव
हार गए हैं. वहीं सूबा सरहद में अवामी नेशनल पार्टी को जीत हासिल हुई है और इस्लामिक पार्टियाँ हार गई हैं. ख़तरा राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने पहले कहा था कि चुनाव के नतीजे देश की आवाज़ होंगे और जो भी जीतेगा उसे सबको स्वीकार करना होगा. परवेज़ मुशर्रफ़ स्वयं चुनाव में खड़े नहीं हुए थे लेकिन संवाददाताओं का कहना है कि उनके समर्थकों की हार के कारण उनकी स्थिति कमज़ोर हुई है. अगर पीपीपी और पीएमएल(नवाज़) मिलकर गठबंधन सरकार बनाते हैं तो संसद में दो-तिहाई बहुमत के साथ वे मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ महाभियोग प्रस्ताव ला सकते हैं. सोमवार को हुए चुनाव में हिंसा की कई घटनाएँ हुई थीं और करीब 20 लोगों की मौत हुई थी. पीपीपी ने कहा है कि उसके 15 सदस्य भी मारे गए हैं. हिंसा की आशंका के चलते आठ करोड़ में ज़्यादातर मतदाता चुनावी प्रकिया से दूर ही रहे और करीब 40 फ़ीसदी से भी कम मतदान हुआ. ये चुनाव पहले आठ जनवरी को होने थे लेकिन 27 दिसंबर 2007 को एक रैली में पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो की हत्या के बाद चुनाव 18 फ़रवरी तक के लिए टाल दिए गए थे. मतदान नेशनल असेंबली की 272 सीटों और प्रांतीय असेंबलियों की 577 सीटों के लिए हुआ था. |
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