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एक नौजवान का सच होता सपना
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किसी मां के 21 साल के नौजवान की मौत उसके लिए एक बड़ी त्रासदी होती है. लेकिन उदयन की मां ने अपने बेटे के सपने को साकार कर दिखाया
है.
उदयन ने सपना देखा था कि वो ग़रीबी की वजह से पिछड़ जाने वाले बच्चों की मदद करेगा. और इसी ख्वाब को पूरा करने के लिए उदयन अर्थशास्त्र की पढ़ाई करने अमरीका गया. लेकिन, विधाता को कुछ और ही मंज़ूर था. 1993 में वो इस दुनिया को छोड़कर चला गया. उदयन मोदी की इस सोच को पूरा करने का बीड़ा उठाया उनकी मां डॉक्टर किरण मोदी ने. आज दिल्ली और आसपास के इलाक़ों में छह 'उदयन घर' चल रहे हैं. 'उदयन' में उन बच्चों को रखा जाता है जो पढ़ना तो चाहते हैं लेकिन, ग़रीबी की वजह से पढ़ नहीं पाते. बच्चों का आशियाना ये घर उन बच्चों का भी आशियाना हैं जिनका बचपन किसी दर्दनाक मानसिक कष्ट की वजह से मुकिल हो चुका होता है. डॉक्टर मोदी कहती हैं कि 'उदयन' में इन बच्चों को समाज के प्रति ज़िम्मेदारी की शिक्षा दी जाती है.
अभी पिछले दिनों ही इस संस्था से निकल कर अपना जीवन शुरू करने वाली युवती स्वास्ति ने 'उदयन' को दो लाख रुपए का दान किया. डॉक्टर किरण मोदी ने सबसे पहला उदयन घर 1996 में नई दिल्ली के संत नगर इलाके में शुरू किया था. इसमें 12 बच्चों को रखा गया था. और अब तक सैकड़ों बच्चे यहां से लाभ ले चुके हैं. जो लड़कियां यहां रहकर सीधे लाभ नहीं उठा पाती हैं, उनके लिए 'शालिनी छात्रवृत्ति योजना' का संचालन किया जाता है. दिल्ली से लगे ग्रेटर नोएडा का उदयन घर भी इस सिलसिले में काफी कमायाब रहा है. यहां के साफ-सुथरे सेक्टर गामा में बने इस केंद्र में 41 लड़कियां हैं. पाँच साल से 18 साल तक की लड़कियों का ये घर ब्रिगेडियर नारंग की हिफाज़त में है. 18 साल की पिंकी यहां कोलकाता से आई हैं. पिंकी हिंदी, अंग्रेजी, बंगला और उर्दू बोलती हैं. पिंकी जब यहां आईं थीं तो बहुत छोटी थीं, लेकिन अब दिल्ली पब्लिक स्कूल में बारहवीं में पढ़ती हैं. और आगे होटल मैनेजमेंट का कोर्स करना चाहती हैं. 'मेंटर मदर' इस उदयन घर से अठारह लड़कियां दिल्ली पब्लिक स्कूल जैसे प्रतिष्ठित स्कूल में जाती हैं. इसके अलावा ग्रेटर नोएडा के नामी स्कूलों समरविला, आर्यभट्ट और धर्म पब्लिक स्कूल आदि में पढ़ती हैं.
यहां की लड़कियों में सबसे कम उम्र की सरीना, आरती और अंजलि हैं. इन बच्चियों को घर का माहौल देने की पूरी कोशिश की जाती है. उदयन घर ट्रस्ट की ओर से घर की तरफ से 'मेंटर मदर' का इंतज़ाम किया गया है. जबकि छोटी बच्चियों के कमरों में महिलाओं को रखा जाता है जो इनका पूरा ख्याल रखती हैं. बड़ी बच्चियां अपनी बुनियादी ज़रूरतों का खुद ख्याल रखती हैं. ग्रेटर नोएडा के उदयन घर का प्रबंध देखने वालीं रतिका शर्मा ने हमें इस केंद्र के पर्सनल ग्रूमिंग सेंटर, कंप्यूटर लैब और सिलाई केंद्र को बहुत ही गर्व से दिखाया. यहां केंद्र की बच्चियों को मुफ्त में सिखाया जाता है लेकिन बाहर वालों से पैसे लिए जाते हैं जो संस्था के संचालन में काम आते हैं. उदयन घर का मिशन मुसीबत के मुक़ाबिल खड़े होने के जज़्बे का नाम है. इसकी अगली कतार में खड़ी हैं डॉक्टर किरण मोदी जिन्होंने अपने बेटे के खूबसूरत ख्वाब को सच कर दिखाया और बेमतलब होती जिंदगियों को जीने की तमीज़ सिखाई. |
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