BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
 
 
मित्र को भेजें   कहानी छापें
'कांग्रेस और भाजपा का विकल्प तैयार हो'
 
सीपीएम नेता
सीपीएम ने ग़ैर-कांग्रेसी धर्मनिरपेक्ष पार्टियों से संबंध जारी रखने की घोषणा भी की है
संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार को बाहर से समर्थन दे रही मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने घोषणा की है कि वह कांग्रेस के साथ कोई गठबंधन नहीं बनाएगी.

29 मार्च से तीन अप्रैल तक कोयम्बटूर में होने जा रही पार्टी की 19 वीं कांग्रेस के लिए तैयार किए गए राजनीतिक प्रस्ताव में पार्टी ने एक बार फिर तीसरे मोर्चे के संकेत दिए हैं.

इस प्रस्ताव में कहा गया है कि कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन का विकल्प तैयार करना चाहिए.

इस प्रस्ताव में पार्टी ने कांग्रेस की आर्थिक नीतियों की जमकर निंदा की है और कहा है कि इन नीतियों के चलते अमीर लोग और अमीर हुए हैं.

विदेश नीति की चर्चा करते हुए इस प्रस्ताव में अमरीका के साथ यूपीए सरकार के सैन्य समझौते को न्यूनतम साझा कार्यक्रम का उल्लंघन बताया है.

पार्टी सेंट्रल कमेटी के इस प्रस्ताव को अब पार्टी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को भेजा जाएगा जिससे कि वे इस पर विचार करके वे इसमें संशोधनों का सुझाव दे सकें.

तीसरा विकल्प

पार्टी प्रस्ताव में कहा गया है कि कांग्रेस और भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधनों का विकल्प तलाशा जाना चाहिए.

 पार्टी कांग्रेस और भाजपा में अंतर देखती है और मानती है कि कांग्रेस एक धर्मनिरपेक्ष बुर्जुआ पार्टी है लेकिन जब भी सांप्रदायिक ताक़तें कोई चुनौती पेश करती हैं तो कांग्रेस डगमगा जाती है
 

इसमें तीसरा विकल्प बनाए जाने की बात कही गई है लेकिन प्रस्ताव को प्रेस के लिए जारी कर रहे सीपीएम महासचिव प्रकाश करात से जब सवाल पूछा गया कि क्या इसे तीसरा मोर्चा कहा जाना चाहिए तो उन्होंने कहा कि यह विकल्प चुनाव के लिए मोर्चा नहीं होगा बल्कि नीतियों के लिए एक विकल्प होगा.

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी भाजपा को पहले नंबर का दुश्मन मानती है.

प्रस्ताव में कहा गया है, "पार्टी कांग्रेस और भाजपा में अंतर देखती है और मानती है कि कांग्रेस एक धर्मनिरपेक्ष बुर्जुआ पार्टी है लेकिन जब भी सांप्रदायिक ताक़तें कोई चुनौती पेश करती हैं तो कांग्रेस डगमगा जाती है."

सीपीएम ने एक बार फिर साफ़ किया है कि वह कांग्रेस के साथ कोई गठबंधन नहीं बनाने जा रही है.

अमरीका विरोध

इस प्रस्ताव में सीपीएम ने अमरीका की साम्राज्यवादी नीतियों से चल रहे वैश्विकरण की निंदा करते हुए कहा है कि इसकी वजह से असमानता बढ़ी है.

मनमोहन सिंह और जॉर्ज बुश
यूपीए सरकार की अमरीका से नज़दीकी से सीपीएम नाराज़ है

सीपीएम ने कहा है कि अमरीकी साम्राज्यवाद की नज़र पश्चिमी और मध्य एशिया पर इसलिए नज़र लगा रखी है ताकि वह उनके ऊर्जा स्रोतों पर नियंत्रण हासिल कर सके.

पार्टी ने कहा है कि अमरीका के 'आतंक के ख़िलाफ़ युद्ध' के कारण बड़ी संख्या में मौतें हुई हैं.

प्रस्ताव में चीन की निरंतर आर्थिक विकास और उसके बढ़ते प्रभाव की तारीफ़ की गई है. इसमें वियतनाम में ग़रीबी घटाने के प्रयासों की प्रशंसा की गई है और क्यूबा की तारीफ़ की गई है कि अमरीकी दबाव के बावजूद वह समाजवादी व्यवस्था को मज़बूत बनाए हुए है.

सीपीएम ने कहा है, "पार्टी भारतीय जनता को साम्राज्यवाद से निपटने के लिए लगातार प्रेरित करती रहेगी."

आर्थिक नीतियाँ

मार्क्सवादी पार्टी ने यूपीए की आर्थिक नीतियों की जमकर निंदा की है. पार्टी ने कहा है कि पिछले सालों में जो व्यवसाय-आधारित नीतियाँ रहीं हैं उसके चलते रोज़गार के अवसर पैदा नहीं हुए हैं और इसने कृषि क्षेत्र को अनदेखा कर दिया है.

प्रकाश करात
सीपीएम ने यूपीए की आर्थिक नीतियों की कटु आलोचना की है

प्रस्ताव में कहा गया है, "यूपीए सरकार ने उन आर्थिक नीतियों को आगे बढ़ाया है जो बड़े व्यावसायियों और विदेशी वित्तीय संस्थाओं को ज़्यादा रियायतें देती हैं."

सीपीएम ने अपनी उपलब्धि बताते हुए कहा है कि उसके विरोध के कारण बीमा और बैंकिंग के क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में बढ़ोत्तरी को रोकने में सफलता पाई है.

अमीरों को और अमीर बनाने का आरोप लगाते हुए सीपीएम ने कहा है, "वर्ष 2005 में देश में 25 ऐसे अरबपति थे जिनकी संपत्ति एक अरब डॉलर (4000 करोड़ रुपए) से ज़्यादा थी जबकि 2007 में इनकी संख्या बढ़कर 48 हो गई."

यूपीए सरकार की विदेश नीति की निंदा करते हुए सीपीएम ने जहाँ अमरीका के साथ सैन्य समझौते का विरोध किया है. पार्टी ने कहा है कि अमरीका के साथ परमाणु समझौते का भी पार्टी विरोध करती रही है और वह एक स्वतंत्र विदेश नीति की पक्षधर है.

 
 
इससे जुड़ी ख़बरें
सीपीएम ने फिर यूपीए सरकार को चेताया
09 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस
वामपंथी और तीसरा मोर्चा एकजुट हुआ
25 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस
क्या है परमाणु समझौते का भविष्य?
23 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस
मुख्यधारा और वामपंथियों के सरोकार
25 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस
'सरकार विदेश नीति पर विफल रही'
12 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस
इंटरनेट लिंक्स
बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
सुर्ख़ियो में
 
 
मित्र को भेजें   कहानी छापें
 
  मौसम |हम कौन हैं | हमारा पता | गोपनीयता | मदद चाहिए
 
BBC Copyright Logo ^^ वापस ऊपर चलें
 
  पहला पन्ना | भारत और पड़ोस | खेल की दुनिया | मनोरंजन एक्सप्रेस | आपकी राय | कुछ और जानिए
 
  BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>