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नगालैंड:चरमपंथी संगठनों में संघर्षविराम
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नागालैंड में सक्रिय चरमपंथी संगठनों ने आपसी मेल-मिलाप बढ़ाने और शांति बनाए रखने के लिए ऐतिहासिक पहल करते हुए संघर्षविराम के
एक चारसूत्री समझौते पर दस्तख़्त किए हैं.
नगा विद्रोही गुटों के बीच यह संघर्षविराम अगले छह महीनों के लिए होगा. नगालैंड की राजधानी कोहिमा में नगा गुटों में आपसी तालमेल बढ़ाने के लिए शुक्रवार को नगालैंड ग्राम प्रधान संघ और द्विभाषिया एसोसिएशन की ओर से एक संयुक्त बैठक बुलाई गई थी. बैठक में प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य आयुक्त टीएन मेनन, प्रदेश के सभी 11 ज़िलों के ग्राम प्रधान और द्विभाषिए, नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ़ नगालिम (आइज़ाक- मुइवा), नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ़ नगालिम (खपांग), नगा नेशनल काउंसिल (एनएनसी) और एकता समिति के प्रतिनिधियों ने भाग लिया. सरकारी गवाह इस समझौते पर एनएनसी के महासचिव वी नागी, एनएससीएन खपांग गुट के मंत्री आरएम लोथा, एनएससीएन (आइज़ाक-मुइवा) गुट के मंत्री यांगर पोंजेनर और एकता समिति के स्वयंभू मेजर एन चूबा ने दस्तख़्त किए.
इस बैठक में प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य आयुक्त टीएन मेनन गवाह के रूप में उपस्थित थे. मेनन ने समझौते को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इन गुटों पर अपने लड़ाकों को नियंत्रण में बनाए रखने के लिए सामाजिक दबाव था, क्योंकि इस लड़ाई से नगा लोगों की जनसंख्या प्रभावित हो रही थी. बैठक में नगालैंड में सक्रिय इन भूमिगत संगठनों के बीच आपसी मेल-मिलाप बढ़ाने पर बल देने और शांति का वातावरण बनाने पर सहमति बनी. इसमें इस बात पर भी सहमति बनी कि इन समूहों में एकता बनाए रखने के लिए जनजाति या जगह के नाम पर कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा. एकता को और मज़बूत बनाने के लिए इस तरह की अगली बैठक शीघ्र आयोजित की जाएगी. नगा विद्रोह 1965 में नगालैंड में अलगावादी आंदोलन शुरू होने के बाद से यह पहली बार हुआ है कि प्रदेश के अगल-अलग अलगाववादी संगठन शांति के लिए एक हुए हैं. विद्रोही नगा संगठनों में एकता बनाने का प्रयास करने वाली एकता समिति के एन चूबा ने कहा, "इन विद्रोही गुटों के बीच एकता आसान बात नहीं थी, अगर हम यही सुनश्चित कर लें कि ये गुट एक-दूसरे पर हमला नहीं करेंगे तो इससे नागा हfतों को बल मिलेगा." नेशनलिस्ट सोशलिस्ट काउंसिंल ऑफ़ नागालिम (एनएससीएन) में 1988 में हुए विभाजन के बाद से इसके दोनों गुटों की लड़ाई में अबतक छह सौ से अदिक लड़ाके मारे जा चुके हैं. विभाजन के पहले हफ़्ते में ही दो सौ से अधिक लड़ाके मारे गए थे. |
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