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डाउ केमिकल्स के ख़िलाफ़ एकजुटता | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय प्रोद्योगिकी संस्थान यानी आईआईटी के पूर्व छात्रों ने अपनी संस्थाओं से आग्रह किया है कि वे अमरीकी कंपनी डाउ केमिकल्स के साथ किसी प्रकार का रिश्ता न रखें. 1984 में भोपाल में गैस रिसने से भीषण त्रासदी हुई थी जिसमें न सिर्फ़ सैकड़ों लोगों की जान गई बल्कि जो जीवित बचे थे उनकी ज़िंदगी के अनेक पहलुओं को बहुत गहराई से प्रभावित किया था. यह गैस अमरीकी कंपनी यूनियन कार्बाइड की इकाई से रिसी थी. विश्व की इस सबसे बड़ी औद्योगिक त्रासदी के लिए ज़िम्मेदार मानी जाने वाली यूनियन कार्बाइड को कुछ समय पहले डाउ कैमिकल्स ने ख़रीद लिया था. बहुराष्ट्रीय कंपनी डाउ केमिकल्स अब भारत के प्रतिष्ठित आईआईटी संस्थान के साथ विज्ञान और तकनीक अनुसंधान के लिए जुड़ना चाहती है आईआईटी के रसायन इंजीनियरिंग विभाग में कार्यरत छात्रों के लिए छात्रवृत्ति का भी इंतज़ाम करना चाहती है. पूर्व आईआईटी छात्रों ने देश के सातों प्रोद्योगिकी संस्थानों के निदेशकों और रसायन इंजीनियरिंग विभागाध्यक्षों को भेजी गई एक चिट्ठी में कहा है कि भोपाल गैस कांड में यूनियन कार्बाइड के ख़िलाफ़ हत्या का मुक़दमा चल रहा है और अदालत के बार-बार आदेश के बावजूद कंपनी के अधिकारी कोर्ट में पेश नहीं हुए हैं जिसके कारण अदालत नें उन्हें भगोड़ा घोषित कर रखा है. चिट्ठी में लिखा गया है कि यूनियन कार्बाइड की नई मालिक कंपनी डाउ केमिकल्स के ख़िलाफ़ भी भगोड़ों को शरण देने का मामला चल रहा है फिर भी उसने यूनियन कार्बाइड अधिकारियों को अदालत में पेश करने से परहेज़ किया है. ये भी कहा गया है कि डाउ केमिकल्स कंपनी भोपाल गैस त्रासदी में अपनी कोई भी ज़िम्मेदारी मानने से इनकार कर रही है. मानवीय दायित्वों से इनकार? पूर्व आईआईटी छात्रों नें अपनी चिट्टी में भोपाल स्थित, अब बंद पड़ी, यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री में मौजूद हज़ारों टन रासायनिक कचरे का भी ज़िक्र किया है जिसके अंश कई अध्ययनों के मुताबिक स्थानीय पानी में मिल गए हैं. आईआईटी के पूर्व छात्रों के अनुसार फैक्ट्री के आसपास के इलाकों का पानी ज़हरीला हो गया है और उसे पीने के कारण आसपास के नागरिकों की सेहत पर बहुत असर पड़ रहा है. आईआईटी के पूर्व छात्र हिमांशु ठक्कर का कहना है, "आईआईटी जैसी प्रतिष्ठित संस्थान के लिए एक ऐसी कंपनी के साथ जुड़ना दुर्भाग्यपूर्ण होगा जो अपने सामाजिक और मानवीय दायित्वों को स्वीकार करने से ही सिरे से इनकार कर दे." मुंबई आईआईटी के 1967 बैच के दुनु रॉय तो आईआईटी और डाउ के बीच किसी प्रकार के संबंध को संस्था की इज़्ज़त पर ही बट्टा मानते हैं. उनके अनुसार आईआईटी के साथ डाउ केमिकल्स के जुड़ाव की इच्छा विज्ञान या तकनीक की तरक्की के मक़सद से नहीं बल्कि अपने लिए प्रतिष्ठा अर्जित करने के उद्देश्य से की जा रही है. ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के कुछ पूर्व छात्र बहुराष्ट्रीय कंपनी का विरोध कर रहे हैं. दो साल पहले भी आईआईटी मुंबई के कुछ छात्रों ने पूर्व छात्रों की एक मीटिंग का ख़र्चा देने के डाउ केमिकल्स के प्रस्ताव का विरोध किया था. | इससे जुड़ी ख़बरें एक कठिन संघर्ष का दुखद अंत18 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस गैस पीड़ितों की याचिकाएँ ख़ारिज04 मई, 2007 | भारत और पड़ोस आमिर ख़ान ने समर्थन जताया14 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस दिल्ली में गैस पीड़ितों का अनशन11 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस यूनियन कार्बाइड में 'सफ़ाई' पर विवाद04 जून, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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