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'लाल मस्जिद में कोई चरमपंथी नहीं' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में लाल मस्जिद में चल रही सैनिक कार्रवाई लगभग पूरी हो गई है. पाकिस्तानी सेना के अधिकारियों का कहना है कि लाल मस्जिद की हर कोने की बारीक़ी से जाँच चल रही है ताकि विस्फोटकों और बारूदी सुरंगों जैसी ख़तरनाक चीज़ों को हटाया जा सके. पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल वहीद अरशद ने कहा है कि पूरी मस्जिद का बारीक़ी से मुआयना करने के बाद ही मारे गए लोगों की सही संख्या पक्के तौर पर बताई जा सकती है. उन्होंने कहा कि मस्जिद को पूरी तरह से सुरक्षित बनाए जाने के बाद पत्रकारों को अंदर जाने दिया जाएगा. मेजर जनरल वहीद अरशद ने कहा कि इस अभियान में सेना के 10 जवान मारे गए और 33 घायल हुए हैं. उन्होंने कहा कि जब तक मस्जिद की पूरी तलाशी नहीं ली जाती तब तक बरामद हथियारों के बारे में कुछ कहना ठीक नहीं होगा. पाकिस्तानी गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जावेद इक़बाल चीमा ने कहा कि मारे गए मौलाना अब्दुल रशीद गाज़ी का शव पोस्टमार्टम के बाद उनके गाँव भेजा जाएगा जहाँ उनका अंतिम संस्कार होगा. पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता ने कहा कि स्थानीय समय के अनुसार दोपहर बाद चार बजे से कर्फ्यू में ढील दी जाएगी ताकि लोग ज़रूरत का सामान ख़रीद सकें. लाल मस्जिद से कट्टरपंथियों को बाहर निकालने के लिए पाकिस्तानी सेना ने मंगलवार तड़के कार्रवाई शुरु की थी जिसमें मस्जिद के प्रबंधन से जुड़े कट्टरपंथी मौलवी अब्दुल रशीद ग़ाज़ी समेत लगभग 50 कट्टरपंथी मारे गए. अमरीका का समर्थन अमरीका ने पाकिस्तान सरकार की कार्रवाई का समर्थन किया है. अमरीकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉम केसी का कहना था कि पाकिस्तान सरकार ने ज़िम्मेदारी के साथ कार्रवाई की. उधर पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो ने सरकार की सैनिक कार्रवाई में देरी के लिए आलोचना की है. बीबीसी संवाददाता बारबरा प्लेट का कहना है कि कट्टरंपथियों का गढ़ माने जाने वाली कुछ मस्जिदों से इस कार्रवाई के बाद हिंसक प्रतिक्रिया हो सकती है.
पाकिस्तान के सैन्य प्रवक्ता जनरल वहीद अरशद का कहना था कि कार्रवाई इसलिए इतनी धीमी गति से हुई है क्योंकि सेना नहीं चाहती थी कि मस्जिद में मौजूद महिलाओं और बच्चों में से कोई हताहत हो. इस्लामाबाद में लाल मस्जिद को लेकर तनाव तब पैदा होना शुरु हुआ जब कुछ पुलिसकर्मियों और ऐसे लोगों का अपहरण किया गया जिन्हें कट्टरपंथी ऐसी गतिविधियों से जुड़े मानते थे जिन्हें वे इस्लाम विरोधी कहते हैं. सेना और कट्टरपंथियों के बीच लगभग एक हफ़्ते तक तनाव बना रहा और मस्जिद और उससे जुड़े मदरसे में रहने वाले छात्रों को वहाँ से बाहर निकालने के प्रयास चलते रहे. कार्रवाई से एक दिन पहले पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने मस्जिद के प्रबंधन और कट्टरपंथियों के चेतावनी दी थी कि यदि वे आत्मसमर्पण नहीं करते तो वे कार्रवाई में मारे जाएँगे. ग़ाजी
कट्टरपंथी मौलवी अब्दुल ग़ाज़ी ने कार्रवाई से पहले सरकार की चेतावनी के बाद भी कड़ा रुख अपना रखा था. गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जावेद इक़बाल चीमा का कहना था कि कट्टरपंथी मौलवी अब्दुल ग़ाज़ी कई महिलाओं और बच्चों को मानव ढाल के रूप में इस्तेमाल कर रहे थे. उनका कहना था, " मौलाना ग़ाज़ी को तहख़ाने में देखा गया और बाहर निकलने को कहा गया. उनके साथ चार-पाँच चरमपंथी थे जिन्होंने सैनिकों पर गोलियाँ चलाईं और जवाबी गोलीबारी में ग़ाज़ी मारे गए." ग़ाज़ी के बड़े भाई और लाल मस्जिद के प्रमुख मौलाना अब्दुल अज़ीज़ कार्रवाई से पहले ही मस्जिद से भागने के प्रयास में गिरफ़्तार किए जा चुके हैं. |
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