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रिकॉर्डतोड़ साड़ी को ख़रीदार की तलाश
 

 
 
साड़ी को बनाने में काफ़ी मेहनत करनी पड़ी है
बुनकरों को शायद द्रौपदी के चीरहरण के प्रसंग से प्रेरणा मिली हो, साड़ी ऐसी कि ख़त्म ही न हो. पचास-साठ मीटर नहीं, पूरे चार सौ छयासी मीटर लंबी है दुनिया की सबसे लंबी साड़ी.

इसे बनाया है केरल के सीमाती टेक्टाइल्स ने. साड़ी बनाने वाली कंपनी सीमाती की सीईओ बीना कन्नन ने शारजाह से बीबीसी को बताया कि "अपनी लंबाई की वजह से ये गिनीज़ बुक में दर्ज हो चुकी है, हैंडमेड साड़ी की श्रेणी में ये दुनिया की सबसे लंबी साड़ी है."

72 किलो की इस साड़ी में इक्यावन पल्लू हैं जिन पर ताजमहल, कुतुबमीनार, पंरपारिक भारतीय नृत्य कला की मुद्राएँ, भारतीय वाद्य यंत्रों और त्यौहारों आकर्षक चित्र उकेरे गए हैं.

इसे बनाने में 57 किलो सिल्क और पंद्रह किलो ज़री का इस्तेमाल किया गया है.

बीना कन्नन ने बताया कि इसमें प्राकृतिक रेशम यानी नेचुरल सिल्क का इस्तेमाल किया गया है. अस्सी प्रतिशत शुद्धता वाली ज़री सूरत से मँगाई गई है और इतनी लंबी साड़ी को एक ही दिन में डाई किया गया है ताकि रंग पूरी साड़ी में बिल्कुल एक जैसा रहे.

ख़रीदार?

इतनी मेहनत और ख़र्चे के बाद बनी इस साड़ी को आख़िर कौन ख़रीदेगा, इसे नब्बे महिलाएँ पहन सकती हैं क्योंकि इसकी लंबाई नब्बे साड़ियों के बराबर है.

 ये बात ज़रूर है कि इसे कोई पहनेगा नहीं, हम चाहते हैं कि कोई पारखी ख़रीदार मिले या कोई संग्रहालय इसे ले ले ताकि इसका अच्छा रख-रखाव हो सके हो
 
बीना कन्नन

बीना कन्नन कहती हैं, "हाँ, ये बात ज़रूर है कि इसे कोई पहनेगा नहीं, हम चाहते हैं कि कोई पारखी ख़रीदार मिले या कोई संग्रहालय इसे ले ले ताकि इसका अच्छा रख-रखाव हो सके हो."

इसे प्रदर्शित करने के लिए एक स्पेशल मोटर बनाई गई है जो एक थान की तरह इसे खोलती है.

पिछले साल मई और अगस्त के बीच इस भारी-भरकम साड़ी को अस्सी दक्ष कारीगरों ने दो हज़ार अट्ठावन घंटे की मशक्कत के बाद हथकरघे पर बनाया है.

इस चुनौती भरे काम के दौरान कई कारीगरों को घुटने और पैरों में दर्द की वजह से अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. ज़ाहिर है, इसे बुनना हंसी-खेल नहीं था, रिकॉर्ड बुक्स में जाने के लिए बुनकरों की टीम और उनके मुखिया थिरु सेल्वन ने जी-जान लगा दी थी.

ये कांजीवरम साड़ी तीस मई तक शारजाह के अंसार मॉल में प्रदर्शित की जा रही है.

 
 
बनारसी साड़ियाँसंकट में बनारसी साड़ी
बनारसी साड़ी उद्योग और उससे जुड़े बुनकर भारी संकट का सामना कर रहे हैं.
 
 
कंडोमएक इस्तेमाल यह भी
भारत में मुफ़्त बाँटे जाने वाले कंडोम का कुछ अलग ही इस्तेमाल हो रहा है.
 
 
बाल मज़दूरकाँचिपुरम के मज़दूर
काँचिपुरम के साड़ी उद्योग में तकरीबन दस हज़ार बाल मज़दूर काम करते हैं.
 
 
सौरभ की तस्वीर वाली साड़ीसाड़ी पर सौरभ
बाज़ार में जल्द ही ऐसी साड़ियाँ दिखेंगी जिमसें सौरभ गांगुली नज़र आएंगे.
 
 
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