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हुसैन को सुप्रीम कोर्ट से राहत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने हरिद्वार की एक अदालत के उस फ़ैसले को लागू करने पर रोक लगा दी है जिसमें मुंबई पुलिस को आदेश दिया गया था कि वह मशहूर चित्रकार मक़बूल फ़िदा हुसैन की संपत्ति कुर्क कर ले. सुप्रीम कोर्ट के जज बीन एन अग्रवाल की अध्यक्षता वाले खंडपीठ ने इस मामले के मुद्दई को भी नोटिस जारी किया है. हुसैन ने यह मामला हरिद्वार से दिल्ली स्थानांतरित किए जाने की याचिका भी दायर की है. उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी हरिद्वार के एक वकील अरविंद श्रीवास्तव ने मक़बूल फ़िदा हुसैन के ख़िलाफ़ वर्ष 2005 में शिकायत दर्ज कराई थी कि हुसैन ने भारत माता और कृष्ण की जो पेंटिंग बनाईं उनमें हिंदू देवियों को अश्लील तरीके से दिखाया गया था जिससे हरिद्वार ज़िले में हिंदुओं की धार्मिक भावनाएँ आहत हुईं. इस शिकायत पर हरिद्वार के विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट ने मक़बूल फ़िदा हुसैन को अदालत में हाज़िर होने के समन जारी किए थे. मक़बूल फ़िदा हुसैन अदालत में हाज़िर नहीं हुए जिस पर अदालत ने मुंबई में उनकी संपत्ति की कुर्की के आदेश दिए थे. पुलिस ने उस आदेश पर अमल करते हुए मुंबई में रविवार से ही हुसैन की संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई शुरू कर दी थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने हरिद्वार की अदालत के उस आदेश के अमल पर रोक लगा दी. एजेंसियों का कहना है कि हालाँकि बाद में पुलिस को पता चला कि वह जिस घर की कुर्की करने गए थे वह हुसैन के बेटे की संपत्ति है. मक़बूल फ़िदा हुसैन कि पेंटिंग्स में अक्सर हिंदू देवी-देवताओं को चित्रित किया जाता है और कुछ लोगों का कहना है कि उन्होंने 'मदर इंडिया' यानी भारत माता नाम से जो पेंटिंग बनाई थी उसे नग्न दिखाया गया था. हुसैन की इस तरह की पेंटिंग्स की अक्सर आलोचना होती रही है और अदालतों में अनेक मुक़दमे भी दर्ज किए गए हैं. 91 वर्षीय मक़बूल फ़िदा हुसैन देश से बाहर दुबई और लंदन में ज़िदगी गुज़ारते हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें हुसैन ने जनता से माफ़ी माँगी08 फ़रवरी, 2006 | पत्रिका हुसैन की पेंटिंग को लेकर फिर विवाद07 फ़रवरी, 2006 | पत्रिका हुसैन की 100 तस्वीरों के 100 करोड़10 सितंबर, 2004 | पत्रिका | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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