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कश्मीरी कवि रहमान को ज्ञानपीठ पुरस्कार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कश्मीर के प्रसिद्ध कवि और आलोचक रहमान राही को भारतीय भाषा में महत्वपूर्ण योगदान के लिए 40 वाँ ज्ञानपीठ पुरस्कार देने की घोषणा की गई है. ज्ञानपीठ पुरस्कार चयन समिति के संयोजक रवींद्र कालिया ने बताया कि डॉक्टर लक्ष्मीमल सिंघवी की अध्यक्षता वाली चयन समिति ने रहमान राही को वर्ष 2004-05 का प्रतिष्ठित ज्ञानपीठ पुरस्कार देने का फ़ैसला किया है. छह मई 1925 को जन्मे राही कश्मीर के पहले लेखक हैं, जिन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार दिया जा रहा है. भारत में साहित्य के क्षेत्र में ज्ञानपीठ पुरस्कार को सबसे प्रतिष्ठित माना जाता है. पुरस्कार में पाँच लाख रुपये की राशि, एक प्रशस्ति पत्र और वाग्देवी की प्रतिमा दी जाती है. चयन समिति के अन्य सदस्यों में महाश्वेता देवी, अशोक वाजपेयी, रमाकांत रथ, गोपीचंद नारंग, शीतांशु यशचंद्र और सीटी इंदिरा शमिल हैं. रहमान को 1961 में साहित्य अकादमी पुरस्कार मिल चुका है. इसके अलावा वह साहित्य अकादमी के फैलो भी रह चुके हैं. उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है. उनके पाँच कविता संग्रह, आलोचना और निबंध की अनेक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें लोकगीत मेरे गुरु हैं- पद्मा सचदेव14 जनवरी, 2007 | पत्रिका 'लेखक को मानवता का साथ देना चाहिए'27 दिसंबर, 2005 | पत्रिका 'मजाज़ रूमानी और प्रगतिशील दोनों थे'04 दिसंबर, 2005 | पत्रिका वारिस शाह की सच्ची वारिस01 नवंबर, 2005 | पत्रिका बड़े हस्ताक्षरों की अनोखी प्रदर्शनी10 अक्तूबर, 2004 | पत्रिका 'जो मैंने जिया वही मैंने लिखा'18 अगस्त, 2004 | पत्रिका अमृता प्रीतम को पद्म विभूषण25 जनवरी, 2004 | भारत और पड़ोस साहित्य अकादमी पुरस्कारों की घोषणा24 दिसंबर, 2003 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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