सोमवार, 05 फ़रवरी, 2007 को 00:01 GMT तक के समाचार
भारत के सत्तर प्रतिशत लोगों को भारतीय होने पर गर्व है और देश के पचास प्रतिशत से अधिक लोगों को लगता है कि जाति प्रथा सामाजिक समरसता में सबसे बड़ी बाधा है.
बीबीसी द्वारा कराए गए एक सर्वेक्षण में ये बातें सामने आई हैं.
सर्वेक्षण के अनुसार दस में से छह भारतीयों के लिए यह बात व्यक्तिगत तौर पर महत्वपूर्ण है कि उनका देश आर्थिक, सैनिक और राजनीतिक महाशक्ति के तौर पर उभरे.
सत्तर प्रतिशत लोगों को भारत का नागरिक होने में गर्व है लेकिन ऐसा नहीं है कि तनाव की कोई वजह नहीं है.
पचास प्रतिशत से अधिक लोग मानते हैं कि भारत को अपने नागरिकों से अधिक ख़तरा है यानी आंतरिक सुरक्षा बड़ा मसला है.
कई लोगों का यह भी मानना था कि समाज में कटु संबंधों का सबसे बड़ा कारण जाति प्रथा है.
इतना ही नहीं आधे से अधिक लोग भ्रष्टाचार को दैनन्दिन जीवन का अभिन्न अंग मान चुके हैं.
सर्वेक्षण में जहां कई लोगों में जहां बदलते सामाजिक परिवेश को लेकर गहरी चिंता देखी गई वहीं आधे से अधिक लोगों का कहना था कि भारतीय लोग धर्म को उतनी गंभीरता से नहीं लेते जितनी गंभीरता से धर्म के बारे में सोचना चाहिए.
एक तिहाई से अधिक लोगों का मानना था कि युवा वर्ग अपनी सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को भूल चुका है. हालांकि सर्वे में युवा लोगों का कहना था कि वो इन मुद्दों पर वृद्धों से अधिक चिंतन मनन करते हैं.
एक और मुद्दे पर मत विभाजन बहुत स्पष्ट दिखा. ये मुद्दा था पिछले एक दशक में हुए आर्थिक सुधारों का. यह पूछे जाने पर कि क्या पिछले दशक के आर्थिक सुधारों से उनके या उनके परिवार को फ़ायदा हुआ तो कई लोगों ने कहा हां तो कई अन्य लोगों ने कहा बिल्कुल नहीं.
इस सर्वेक्षण में 1600 लोगों से बातचीत की गई और इसके लिए प्रश्न तय किए गए थे बीबीसी की वेबसाईटों के ज़रिए लोगों के सुझावों के आधार पर. यानी दुनिया भर के लोगों के सुझाव पर भारत के लोगों के लिए सवाल तय किए गए थे.