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रेल बजट का स्वागत भी, विरोध भी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
वर्ष 2007-08 के लिए पेश किए गए रेल बजट को लेकर प्रतिक्रिया मिलीजुली मिल रही है. रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव के इस बजट का जहाँ सत्ताधारी गठबंधन का नेतृत्व कर रही कांग्रेस और भारतीय उद्योग जगत ने स्वागत किया है, वहीं वामपंथी दलों और समाजवादी पार्टी ने कहा है कि इसमें आमजनता के लिए कुछ ख़ास नहीं किया गया है. बजट प्रस्तुत करने का विरोध करने वाले विपक्षी गठबंधन एनडीए को रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव ने ग़रीब विरोधी कहा है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि जैसा रेल बजट लालू प्रसाद यादव ने पेश किया है वैसा इससे पहले किसी रेलमंत्री ने नहीं किया था. उनका कहना था कि रेलमंत्री ने अर्थशास्त्र के उस नियम का प्रयोग किया है जिसके तहत उपभोक्ताओं की संख्या बढ़ाकर मूल्य में कमी की जा सकती है और लाभ कमाया जा सकता है. उन्होंने कहा कि रेलमंत्री ने सही दिशा में क़दम बढ़ाया है और कुलमिलाकर रेलवे बजट की तस्वीर अच्छी दिखाई देती है. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार रेलवे की सुरक्षा के सवाल पर कपिल सिब्बल ने कहा, "समझौता एक्सप्रेस में धमाके जैसी घटना कभी भी हो सकती है और आतंकवादी कहीं भी प्रवेश कर सकते हैं, हालांकि एक नई समिति का गठन कर दिया गया है जो रेलवे की सुरक्षा की ओर ध्यान देगी." 'निजीकरण की ओर' दूसरी ओर वामपंथी दलों और समाजवादी पार्टी ने इस बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि इसमें आम आदमी के लिए कुछ ख़ास नहीं किया गया है.
उनका कहना था कि इस बजट से संकेत मिलते हैं कि रेलवे तेज़ी से निजीकरण की ओर बढ़ रहा है. मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी के पोलित ब्यूरो की सदस्य और सांसद वृंदा करात ने एक टेलीविज़न चैनल से हुई बातचीत में कहा कि जिस तरह से रेलवे निजीकरण की ओर बढ़ रहा है उससे लोगों को आने वाले समय में नुक़सान होगा. उन्होंने ब्रिटेन में रेलवे के निजीकरण का उदाहरण देते हुए बताया कि अब जाकर सरकार को समझ में आ रहा है कि नेशनल रेलवे के निजीकरण से दुर्घटनाएँ बढ़ी हैं और लोगों को नुक़सान हो रहा है. सुरक्षा के सवाले पर उन्होंने कहा कि जिस तरह से सुरक्षाकर्मियों की संख्या रेलवे में घटाई जा रही है उससे सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ना स्वाभाविक है. उद्योग जगत का स्वागत उधर भारतीय उद्योग जगत ने इस बजट का स्वागत करते हुए कहा है कि जिस तरह से कंटेनर सेवाओं और मालभाड़े को संयोजित किया गया है उससे न केवल उद्योग जगत को फ़ायदा होगा बल्कि आम जनता को भी फ़ायदा होगा. फ़िक्की के अध्यक्ष हबील खोराकीवाला ने कहा है रेल मंत्री ने अपना बजट एक बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए पेश किया है. उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि जिस तरह से यात्रीभाड़े में कमी की गई है और मालभाड़े को अनछुआ रखा गया है उससे साफ़ है कि रेलवे को ज़्यादा यात्री और ढुलाई के लिए ज़्यादा माल मिलने वाला है. उन्होंने कहा, "रेलवे अब प्राइवेट सेक्टर कॉर्पोरेशन की तरह काम कर रहा है और यह भारत के लिए अच्छी ख़बर है. उम्मीद करनी चाहिए कि इसके बाद शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम कर रहे सार्वजनिक क्षेत्र के निगम भी इसी तरह काम करेंगे." जबकि सीआईआई ने कहा है कि पेट्रोल, डीज़ल और लौहअयस्क की ढुलाई में की गई कटौती का अर्थव्यवस्था पर अच्छा असर पड़ेगा. सीआईआई के रेलवे इक्विपमेंट डिविज़न के चेयरमैन जेपी चौधरी ने पीटीआई से कहा, "मालभाड़े को लेकर उठाए क़दम सकारात्मक है और बजट से रेलवे की क्षमता बढ़ेगी." | इससे जुड़ी ख़बरें रेल बजट: एक नज़र में 26 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस रेल बजट: किरायों में कटौती की घोषणा26 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस हंगामे के बीच लालू का रेल बजट पेश 25 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस लालू ने टिकट निरीक्षक की तारीफ़ की15 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस लालू प्रसाद ने दी प्रबंधन की शिक्षा18 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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