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काग़ज़ और क़ैंची का कलाकार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बनारस शायद दुनिया का ऐसा निराला शहर है, जहाँ तड़के इतनी चहल-पहल नज़र आती है. गंगा में स्नान करने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ से लेकर सूर्योदय के लालच में सुबह पाँच बजे उठने वाले सैलानियों तक, सभी गंगाघाट की तरफ़ जाते दिखाई दिए. इस भीड़ में हम जैसे मीडिया वाले और जुड़ गए. अदभुत दृश्य था और इसे जीवित बना रहीं थी मंदिर की घंटियाँ, प्रार्थना के स्वर और संगीत लहरियाँ. बीबीसी की प्रभातकालीन सभा अभी समाप्त ही हुई थी कि रामदत्त त्रिपाठी के मोबाइल की घंटी बजी. पता चला एक बुज़ुर्ग श्रोता हैं, रमेश चंद्र मोहिले, जो वहीं अस्सी घाट से दस कदम की दूरी पर रहते हैं. एक दुर्घटना के बाद से चलने-फिरने में असमर्थ हैं वरना, बीबीसी की टीम से मिलने खुद आ जाते. दिक्क़त न हो तो हम लोग ही चले आएँ. दिक़्क़त कैसी, हम तो रोडशो के बहाने ही श्रोताओं से मिलने निकले हैं. चल पड़े. रमेश मोहिले की बूढ़ी आँखे हम सबको देखते ही चमक उठीं. खुशी और पानी एक-दूसरे में घुल से गए. बीबीसी से नाता हालाँकि 72 साल का जीवन सुख भोगने के बाद अब कुछ भूलने की आदत हो गई है उन्हें, मगर बीबीसी पहली बार कब सुना अब भी याद है. शायद 1984 की कोई सुबह थी और राजनारायण बिसारिया बाल जगत प्रस्तुत कर रहे थे. बस तभी से नियमित श्रोता हैं. और भी कई खूबियाँ हैं रमेश मोहिले में. संगीत से प्रेम है, राग रागनियों का अच्छा ज्ञान है. कई वर्षों तक सरोद बजाना भी सीखा, लेकिन अब एक छोटी सी क़ैंची से रिश्ता जोड़ लिया है. उनके बिस्तर के पास ही मेज पर सफ़ेद-काले काग़ज़ और एक क़ैंची रहती है. काग़ज़ काट-वाट कर वे लोगों के चेहरों की आकृतियाँ बनाते हैं. कुछ दिखाई भी. पं जवाहरलाल नेहरू, मुलायम सिंह यादव, जेआरडी टाटा. घोड़ों से भी उनका विशेष प्रेम नज़र आया. सफ़ेद वाले कई घोड़े दिखाई दिए उनकी एलबम में. रमेश मोहिले की 72 वर्षीय उंगलियाँ चुटकियों में काग़ज़ और कैंची से कला के ऐसे नमूने दिखाती हैं कि आप दंग रह जाएँ. सिर्फ़ 40 सेकेंड के भीतर मेरी तस्वीर बना डाली और अपने जीवन भर के अनुभवों का निचोड़ इस वाक्य में भर दिया, "इन्सान के चेहरे पर सबसे महत्वपूर्ण है उसकी नाक." | इससे जुड़ी ख़बरें बीबीसी हिंदी का रोड शो 16 नवंबर से13 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस बीबीसी फ़ोटो ऐलबम का ऐलान09 मार्च, 2005 | भारत और पड़ोस आपातकाल के दौरान ख़बरें जुटाने की चुनौती08 फ़रवरी, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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