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रविवार, 16 जुलाई, 2006 को 16:39 GMT तक के समाचार
 
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'देश में राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी'
 

 
 
भगत
भगत के मुताबिक मुस्लिम समुदाय के बुद्धिजीवियों को कट्टरपंथियों के ख़िलाफ़ सक्रिय होने की जरूरत है
मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त एमएन सिंह का मानना है कि मुंबई बम धमाके जैसी घटनाओं से निपटने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी है.

उन्होंने कहा कि मुंबई में हुए बम धमाके जेहादी मुहिम का हिस्सा है और इससे निपटने के लिए कड़े क़दम उठाने होंगे.

एमएन सिंह ने आपकी बात बीबीसी के साथ कार्यक्रम में श्रोताओं के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि भारत में मुंबई जैसी घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं और इसे व्यापक परिदृश्य में देखने की जरूरत है.

इस कार्यक्रम में ख़ुफ़िया ब्यूरो के पूर्व प्रमुख अरुण भगत और सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ ने भी हिस्सा लिया.

 वर्ष 1992-93 के बाद देश में जो परिस्थितियाँ बनी और गुजरात में जिस तरह से दंगे हुए उससे समाज का एक तबका मानता है कि उनके साथ भेदभाव हो रहा है. इसलिए वे भटक रहे हैं
 
तीस्ता सीतलवाड़

अरुण भगत ने स्वीकार किया कि नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार को अपनी नीतियों में तब्दीली करनी होगी.

दूसरी ओर तीस्ता सीतलवाड़ ने एमएन सिंह के विचारों से अलग राय जताते हुए कहा, "वर्ष 1992-93 के बाद देश में जो परिस्थितियाँ बनी और गुजरात में जिस तरह से दंगे हुए उससे समाज का एक तबका मानता है कि उनके साथ भेदभाव हो रहा है. इसलिए वे भटक रहे हैं."

हलाँकि उन्होंने इस बात से भी इनकार नहीं किया कि सीमा पार से भारत को अस्थिर करने की कोशिश की जा रही है.

रणनीति

एमएन सिंह ने कहा कि मुंबई की घटना को स्थानीय परिस्थितियों से जोड़ कर नहीं देखा जा सकता.

उन्होंने कहा, "मुंबई की घटना को पूरी दुनिया में चल रही आतंकवादी गतिविधियों से अलग करके नहीं देखना चाहिए. इससे निपटने कि लए हमें दीर्घकालिक रणनीति बनानी होगी."

एमएन सिंह और अरुण भगत दोनों ने कहा कि समस्या से निपटने के लिए जरूरी राजनैतिक इच्छा शक्ति की कमी है.

एमएन सिंह के मुताबिक राजनैतिक दलों को मलूम है कि इस तरह की घटनाओं के पीछे कौन हैं लेकिन वे राजनैतिक कारणों से यह सार्वजनिक नहीं करते.

 मुंबई की घटना को पूरी दुनिया में चल रही आतंकवादी गतिविधियों से अलग करके नहीं देखना चाहिए. इससे निपटने कि लए हमें दीर्घकालिक रणनीति बनानी होगी
 
एमएन सिंह

इसराइल की तरह 'आतंकावादियों' के ख़िलाफ़ आक्रामक कार्रवाई क्यों नहीं की जाती है, इस सवाल के जवाब में अरूण भगत ने कहा, "हम सहनशीलता के साथ रक्षा की नीति पर चलते रहे हैं. निश्चित रूप से अब इस नीति में परिवर्तन होना चाहिए. हमें आक्रामक रुख़ अपनाने की ज़रूरत है."

हालाँकि कोई भी नीति बनाने से पहले उन्होंने हर पहलू पर विचार करने की ज़रूरत बताई.

 हम सहनशीलता के साथ रक्षा की नीति पर चलते रहे हैं. निश्चित रूप से अब इस नीति में परिवर्तन होना चाहिए. हमें आक्रामक रूख अपनाने की ज़रूरत है
 
अरूण भगत

पूर्व आईब प्रमुख ने इस बात से इनकार किया कि मुंबई जैसी घटनाएँ ख़ुफ़िय तंत्र की विफलता का नतीजा है.

उन्होंने कहा, "जिस घटना की योजना देश के बाहर बनती है और हथियार भी वहीं से आते हों तो ऐसी स्थिति में हर षडयंत्र पर से पर्दा उठाना मुश्किल है."

अरुण भगत, एमएन सिंह और तीस्ता सीतलवाड़- तीनों ने मुंबई घटना को दोषियों को जल्द से जल्द पकड़ने और उन्हें सज़ा देने की माँग की.

हलाँकि तीस्ता सीतलवाड़ ने दोषियों की धरपकड़ में निर्दोष लोगों को तक़लीफ़ नहीं देने की मांग की.

 
 
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