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भोपाल पीड़ितों को अमरीका में समर्थन | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भोपाल गैस पीड़ितों की माँगों के समर्थन में अब अमरीका में भी कई शहरों में बहुत से लोग भूख हड़ताल कर रहे हैं और एक अमरीकी सांसद ने भी भोपाल पीड़ितों की आवाज़ के समर्थन में आवाज़ उठाई है. अमरीकी कंपनी – डाव केमिकल यूनियन कारबाईड - के विरोध में अमरीका में वॉशिंगटन, न्यूयॉर्क, बॉस्टन, मेरीलैंड, ह्यूस्टन और सिएटल जैसे कई शहरों में प्रदर्शनों किए जा रहे हैं. इन प्रदर्शनकारियों में भारतीय मूल के लोगों के अलावा अमरीकी भी शामिल हैं. अमरीका में इंटरनेशनल कैंपेन फॉर जस्टिस इन भोपाल नामक संस्था और भारतीय मूल की एक संस्था एसोसिएशन फ़ॉर इंडियन डेवेलपमेंट अन्य संस्थाओं के साथ मिलकर अनशन औऱ प्रदर्शन आयोजित कर रही हैं. एसोसिएशन फ़ॉर इंडियन डेवेलपमेंट के एक कार्यकर्ता विनोद विश्वनाथ कहते हैं, “भारत में जनतंत्र होने के बावजूद पिछले 21 सालों से भोपाल के मामले में सरकारों ने जनतांत्रिक मूल्यों को ताक पर रखा हुआ है. मुझे भारत सरकार और डाव केमिकल्स कंपनी के इस रवैए से बेहद अफ़सोस हुआ है.” विनोद विश्वनाथ ख़ुद भी अनशन पर बैठे हैं. भोपाल पीड़ितों के लिए अमरीका में चलाई जा रही मुहिम को उस समय औऱ बल मिला जब न्यू जर्सी के अमरीकी सांसद फ़्रैंक पैलोन ने संसद में एक बिल पेश किया जिसमे ज़हरीले रसायन से होने वाले हादसों को रोके जाने के लिए कड़े क़ानून सुझाए गए हैं. पैलोन ने अपने विधेयक में भोपाल गैस त्रासदी का ख़ासतौर पर ज़िक्र किया है. वह हाल ही में डाव केमिकल्स के न्यू जर्सी के एक प्लांट के बाहर प्रदर्शनकारियों के साथ अपनी भी आवाज़ मिलाने पहुंचे थे. वहाँ उन्होंने भोपाल पीड़ितों के सम्मान में एक मिनट का मौन भी धारण किया. उधर टेक्सास के ऑस्टिन शहर में अनिश्चिततालीन भूख हड़ताल गुरूवार से शुरू हुई. अनशन पर बैठने वालों में आकर्षण का केंद्र बनीं वो हैं एक मशहूर अमरीकी महिला लेखिका और पर्यावरण कार्यकर्ता डायन विल्सन जो भोपाल पीड़ितों को न्याय दिलवाने के लिए अनिश्चिततालीन भूख हड़ताल पर बैठी हैं. ऑस्टिन शहर में ही डाव केमिकल यूनियन कारबाईड के दफ़्तर के बाहर भी बड़ी संख्या में लोगों ने प्रदर्शन किया जिनमें विल्सन भी शामिल थीं.
पर्यावरण कार्यकर्ता डायन विल्सन पिछले 25 सालों से इस कंपनी की पर्यावरण को नुक़सान पहुंचाने वाली गतिविधियों का विरोध करती रही हैं. टेक्सास के सीड्रिफ़ट नामक शहर में ख़ुद उनका मछुआरों का समुदाय भी इस कंपनी के प्लांट के कारण प्रदूषण से नुक़सान उठा चुका है. यहां तक कि इसके विरोध करने के क्रम में वर्ष 2002 में टेक्सस में उन्हें पाँच महीने की जेल भी काटनी पड़ी है. इनका जुर्म यह था कि इन्होंने सीड्रिफ़ट नामक शहर में स्थित डाव केमिकल्स के दफ़्तर के एक टावर पर चढ़कर एक बैनर टांग दिया था जिसपर अंग्रेज़ी में लिखा था – जस्टिस फॉर भोपाल – यानी भोपाल के लिए न्याय. लेकिन क़ैद काटने के बाद भी विल्सन के विरोध करने के जज़्बे में कोई कमी नहीं आई. डायन विल्सन कहती हैं, “मैं उस वक़्त तक चैन से नहीं बैठूंगी जब तक अमरीका में पर्यावरण को नुक़सान पहुँचाने वाली और ऐसी कंपनियों ने जो कुछ भोपाल में किया, उन्हें इस तरह की गतिविधियों के लिए ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जाता.” यह पहली बार नहीं है कि वह भोपाल पीड़ितों के लिए अनशन पर बैठी हैं. वर्ष 2002 में करीब 1000 लोगों के साथ डायन विल्सन भोपाल पीड़ितों के समर्थन में 28 दिनों तक भूख हड़ताल पर बैठी थीं. इस बार दिल्ली के जंतर-मंतर में आमरण अनशन पर बैठे लोगों के समर्थन में विल्सन का कहना है कि वह तब तक अनशन पर रहेंगी जब तक की भोपाल पीड़ितों की मांगों को मनवाने में वह कामयाब नहीं हो जातीं.
उधर दिल्ली में पीड़ित लोगों का कहना है कि वे अपना अनशन तब तक नहीं तोड़ेंगे जब तक सरकार उनकी छह सूत्री माँगे नहीं मानती. कई स्थानों पर अनशन अमरीका में टेक्सास के ऑस्टिन शहर में आमरण अनशन पर बैठने वाले लोगों में कई भारतीय मूल के लोग भी हैं. संतोष पदमनाभन पेशे से एक इंजीनियर हैं. उन्होंने भी विल्सन के साथ भूख हड़ताल जारी रखी हुई है. संतोष पदनमाभन कहते हैं, “मैं भोपाल पीड़ितों की आवाज़ के साथ एकजुटता दिखाने के लिए अनशन कर रहा हूँ और यह ख़ामोश क्रांति भारत सरकार को इस मामले में कार्रवाई करने पर मजबूर करेगी.” अनशन पर बैठे ये लोग चौबीस अप्रैल को वाशिंगटन जाएंगे जहाँ भारतीय उच्चायोग के परिसर में स्थित गांधीजी की मूर्ति के सामने यह विरोध प्रदर्शन और अनशन का सिलसिला जारी रहेगा. प्रदर्शनकारियों की मांग है कि डाव केमिकल यूनियन कारबाईड कंपनी को भारत में किसी भी तरह के व्यापार करने पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए. कंपनी को इस पर भी बाध्य किए जाने की मांग की जा रही है कि वह पीड़ितों को ज़्यादा मुआवज़ा अदा करे और प्रदूषित इलाके की सफ़ाई कराए. भोपाल पीड़ितों की मांग हैं कि उन्हें पीने का साफ़ पानी मुहैया हो क्योंकि डाव केमिकल्स कंपनी के प्लांट के कारण पानी प्रदूषित हो चुका है. ये लोग एक राष्ट्रीय आयोग बनाए जाने की भी मांग कर रहे हैं जिसकी देखरेख में उनके लिए स्वास्थ्य और आर्थिक पुनर्वास कार्यक्रम चलाए जाएं.
एक विशेष अदालत के गठन की भी मांग की जा रही है जहाँ यूनियन कार्बाईड कंपनी और उसके तत्कालीन प्रमुख वारन एंडरसन के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाए. डाव केमिकल्स से भोपाल में फैले ज़हरीले कचरे को साफ़ करवाने और भोपाल पीड़ितों के लिए एक स्मारक बनाने की भी माँग हो रही है. 1984 में यूनियन कार्बाइड की भोपाल स्थित फैक्ट्री में ज़हरीली गैस लीक होने से 20 हज़ार से ज़्यादा लोग मारे गए थे और डेढ़ लाख से ज़्यादा उस गैस से प्रभावित हुए थे. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे डाव केमिकल्स कंपनी पर दबाव डालना चाहते हैं कि जब तक वे पीड़ितों की मांगें नहीं मानती है तब तक भारत में इस कंपनी के व्यवसायिक कार्यक्रम नहीं होने दिए जाएंगे. आयोजकों के मुताबिक कई सौ लोगों ने उनके साथ अनशन पर बैठने के लिए हामी भी भर रखी है. इसके अलावा हज़ारों की संख्या में लोगों ने भारतीय प्रधानमंत्री को फ़ैक्स और ईमेल भेजकर भी इस मामले में भोपाल पीड़ितों की मांगों पर सुनवाई करने का आग्रह किया है. | इससे जुड़ी ख़बरें आमिर ख़ान ने समर्थन जताया14 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस सरकार नर्मदा बाँध की समीक्षा करेगी13 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस मेधा पाटकर की हालत और बिगड़ी05 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस मेधा पाटकर को अस्पताल ले जाया गया05 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस मेधा पाटकर की तबीयत बिगड़ी04 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस हम चुपचाप मर नहीं सकते:अरुंधती04 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस नर्मदा बचाओ आंदोलन के बीस बरस24 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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