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'भगत सिंह से बचती सरकारें' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भगत सिंह का लोग आज भी सम्मान करते हैं क्योकि उन्होंने न तो किसी सम्मान और न ही किसी पद के लिए बलिदान किया था. उनका तो ध्येय था कि एक ऐसी व्यवस्था बने जिसमें हर व्यक्ति को मेहनत का और बराबरी का हक़ मिले. भगत सिंह का मानना था कि इससे बड़ा ज़िंदगी में और कोई फल नहीं हो सकता कि लोग उनके दिखाए रास्ते को अपनाएँ. उनका कहना था कि विचारधारा की जंग चलती रहती है और कामयाबी तक पहुँचने तक यह एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक चलती रहनी चाहिए. सरकार के दायित्व का जहाँ तक सवाल है, वह इससे बचना चाहती है. शायद इसलिए कि भगत सिंह ने जो सवाल उठाए थे, उनके जवाब सरकार के पास नहीं है. पिछले वर्ष सरकार ने पहली बार 23 मार्च को संसद में भगत सिंह, राजगुरू और सुखदेव का सम्मान किया था. इस बार प्रधानमंत्री 23 मार्च को पंजाब जा रहे हैं. लेकिन वो उन्हें श्रृद्धांजलि नहीं अर्पित कर रहे हैं. मेरा मानना है कि आज की युवा पीढ़ी में उनका लेखन और विचार जानने की प्रेरणा जगी है क्योंकि ये विचार 50 वर्ष तक जनता से छुपा कर रखे गए थे. लोगों में इसे जानने की चेतना आ रही है. युवा पीढ़ी उनके बारे जितना जानेंगी, उतना ही अच्छा है. भगत सिंह की आत्मा को इससे संतोष मिलेगा कि उनके काम को युवा आगे बढ़ा रहे हैं. (आशुतोष चतुर्वेदी से बातचीत पर आधारित) | इससे जुड़ी ख़बरें ऐतिहासिक फ़िल्मों के साथ कितना न्याय?25 अगस्त, 2005 | आपकी राय दूसरी बार सर्वश्रेष्ठ | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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