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पाकिस्तान में पतंगबाज़ी पर पाबंदी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के अधिकारियों ने पतंग के धारदार माँझे से कई लोगों की मौत हो जाने के बाद पतंगबाज़ी पर प्रतिबंध लगा दिया है. पिछले दो सप्ताह में पतंगबाज़ी के कारण कम से कम 12 लोग मारे गए हैं. इनमें बच्चे भी शामिल हैं. इनमें से ज़्यादातर की मौत पतंगबाज़ों के घातक माँझे से गला कटने की वजह से हुई. ये माँझा या तो धातुयुक्त होता है या रसायनयुक्त जिससे लोगों की जान तक चली जाती है. पतंगबाज़ धातुयुक्त तेज़ माँझे का इस्तेमाल करते हैं जिसमें शीशे का बारीक पाउडर भी लगा होता है भारत और पाकिस्तान में पतंग उड़ानें और पेंच लड़ाने की परंपरा पुरानी है. पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में पतंगबाज़ी पूरे साल मनोरंजन का एक बड़ा साधन है और बसंत के मौसम में तो ये शौक़ त्यौहार का रूप ले लेता है. बसंत नाम के इस वार्षिक उत्सव में हर साल हादसे होते हैं. इस पतंग उत्सव में एक-दूसरे की पतंग काटने का मुक़ाबला होता है. हर साल ये आयोजन और बड़ा होता जा रहा है और हज़ारों की संख्या में लोग इस दिन लोग लाहौर में जुटते हैं. ग़ौरतलब है कि पतंगबाज़ी की कारण ज़्यादातर मौतें लाहौर और उसके आसपास हुईं हैं. पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल अक्टूबर में पंतगबाज़ी पर पाबंदी लगा थी लेकिन बसंत के दौरान इस पर छूट दे दी थी. पतंगों के बिजली के तार में फँसने से विद्युत आपूर्ति भी बाधित होती है. | इससे जुड़ी ख़बरें लाहौर में वसंत पर पतंगबाज़ी06 फ़रवरी, 2005 | मनोरंजन पाकिस्तान में पतंगबाज़ी के दौरान नौ मरे16 फ़रवरी, 2004 | भारत और पड़ोस वसंत पर पतंग की उड़ान13 फ़रवरी, 2004 | मनोरंजन पतंगबाज़ी पर पाबंदी | भारत और पड़ोस ख़ूनी माँझे के लिए फ़ाँसी | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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