|
गोपाल प्रसाद व्यास का निधन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
हिंदी के प्रख्यात साहित्यकार और पत्रकार गोपाल प्रसाद व्यास का शनिवार, 28 मई, 2005 को 92 वर्ष की अवस्था में निधन हो गया. गोपाल प्रसाद व्यास के परिवार में तीन पुत्र और तीन पुत्रियाँ हैं. व्यास जी ने अपनी साहित्य यात्रा मधुरा से प्रारंभ की और आगरा में बाबू गुलाब राय के साथ 'साहित्य संदेश' का संपादन किया. 1943 में दैनिक हिंदुस्तान से जुड़कर दिल्ली में ही बस गए. उन्होंने हिंदी में पचास से अधिक ग्रंथ लिखकर भाषा और साहित्य की सेवा की. व्यास जी हिंदी हास्य-व्यंग्य में मील के पत्थर माने जाते थे. हिंदी के कवि सम्मेलनमों में अपनी हास्य-व्यंग्य रचनाओं से उन्होंने लोकप्रियता अर्जित की. दैनिक हिंदुस्तान में 'यत्र-तत्र-सर्वत्र' नाम से दैनिक स्तंभ 25 वर्षों तक 'नारद जी ख़बर लाए हैं' शीर्षक से 45 वर्षों तक साप्ताहिक स्तंभ लिखकर एक कीर्तिमान स्थापित किया था. गोपाल प्रसाद व्यास ब्रजभाषा और पिंगल के मर्मज्ञ माने जाते थे. व्यास जी की क़दम-क़दम बढ़ाए जा, हास्य-सागर, व्यास के हास-परिहास, कहो व्यास कैसी कही, मोहि ब्रज बिसरत नाहीं और हिंदी की आस्थावान पीढ़ी जैसी कृतियों का हिंदी जगह में विशिष्ट स्थान है. व्यास जी को सरकारी और ग़ैरसरकारी अनेक सम्मान और अलंकरण प्राप्त हुए जिनमें पदमश्री, दिल्ली सरकार का शलाका सम्मान और उत्तर प्रदेश सरकार का यश भारती सम्मान शामिल हैं. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||