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भारत यात्रा पर दिल्ली पहुंचे अब्बास | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फ़लस्तीनी नेता महमूद अब्बास भारत के दो दिवसीय दौरे पर दिल्ली पहुंच गए हैं. अब्बास ने इससे पहले पाकिस्तान के शीर्ष नेताओं से मुलाक़ात की है. वह भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से भी मुलाक़ात करने वाले हैं. पूर्व फ़लस्तीनी नेता यासिर अराफ़ात के निधन के बाद अब्बास फ़लस्तीनी प्राधिकरण के प्रमुख चुने गए थे और इस पद पर उनकी यह पहली भारत यात्रा होगी. अब्बास की यात्रा के बारे में विदेश राज्य मंत्री ई अहमद ने कहा कि इस यात्रा का इसराइल के साथ संबंधों पर कोई असर नहीं पड़ेगा. उन्होंने कहा कि भारत लगातार फ़लस्तीनी लोगों के संघर्ष का समर्थन करता रहा है और इस बारे में भारत की नीति स्पष्ट रही है. अहमद ने कहा " मैं जब फ़लस्तीन गया था तो अपने साथ 15 गाड़ियां और दो करोड़ रुपए की मदद लेकर गया था. उनका सम्मान एक राष्ट्राध्यक्ष की तरह किया जाएगा." भारत-फ़लस्तीनी संबंधों में पिछले कुछ वर्षों में कोई ख़ास बदलाव तो नहीं हुआ है लेकिन 1992 के बाद भारत और इसराइल के संबंध मज़बूत ज़रुर हुए है. पहले कांग्रेस की सरकार के तहत और बाद में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार ने इसराइल के साथ रक्षा और सामरिक क्षेत्रों में संबंधों को और आगे बढ़ाया. पिछले साल नई सरकार के गठन के बाद इस नीति में बदलाव की संभावना व्यक्त की जा रही है यानी फ़लस्तीनी प्रशासन की ओर झुकाव और बढ़ाने की बात हो रही है. विश्लेषकों का मानना है कि अब्बास अपनी इस यात्रा के दौरान भारतीय नेताओं के समक्ष अपना पक्ष रखेंगे और मध्य पूर्व शांति प्रक्रिया के लिए समर्थन जुटाएंगे. |
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