BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
 
रविवार, 14 नवंबर, 2004 को 04:46 GMT तक के समाचार
 
मित्र को भेजें कहानी छापें
भोपाल में अब भी ज़हर का ख़तरा
 
स्मारक
गैस पीड़ितों की याद में बना एक स्मारक
भोपाल में गैस त्रासदी के 20 साल गुज़रने के बाद भी वहाँ के हज़ारों लोगों के लिए ख़तरा अभी टला नहीं है.

बीबीसी की जाँच से पता चला है कि भोपाल में पानी में ज़हर घुला होने का ख़तरा मंडरा रहा है.

1984 में दो दिसंबर की रात एक कारख़ाने से रिसी गैस से चार हज़ार लोगों की मौत हो गई थी.

कीटनाशक बनाने वाली एक अमरीकी कंपनी यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड इस गैस रिसाव के लिए ज़िम्मेदार थी.

इस फ़ैक्टरी को 1998 में मध्यप्रदेश सरकार के हवाले कर दिया गया था.

इस कारख़ाने के परिसर में अब भी हज़ारों टन ज़हरीला कचरा जमा है. कई जगह तो इसे वायुमंडल से बचाना भी मुश्किल है.

इसका परिणाम यह हो रहा है कि पीने के पानी में अब भी ज़हरीला रसायन घुल रहा है.

बीबीसी ने कारख़ाने के नज़दीक एक कुएँ से पीने का पानी लेकर उसकी जाँच करवाई तो पता चला कि पानी में विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों की तुलना में प्रदूषण की मात्रा 500 गुना से भी अधिक है.

डॉक्टरों का कहना है कि इस पानी को पीने वाले लोगों के जिगर और गुर्दे की बीमारी होने का ख़तरा है.

यूनियन कार्बाइड ने पानी के प्रदूषण को ग़लत बताते हुए कहा है कि जब उन्होंने कारख़ाना राज्य सरकार को सौंपा था तो कारख़ाने के बाहर के इलाक़े में पानी के प्रदूषण की कोई शिकायत नहीं थी.

 
 
इससे जुड़ी ख़बरें
 
 
इंटरनेट लिंक्स
 
बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
 
सुर्ख़ियो में
 
 
मित्र को भेजें कहानी छापें
 
  मौसम |हम कौन हैं | हमारा पता | गोपनीयता | मदद चाहिए
 
BBC Copyright Logo ^^ वापस ऊपर चलें
 
  पहला पन्ना | भारत और पड़ोस | खेल की दुनिया | मनोरंजन एक्सप्रेस | आपकी राय | कुछ और जानिए
 
  BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>