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गुरुवार, 30 अक्तूबर, 2003 को 19:13 GMT तक के समाचार
 
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न्यायालय के फ़ैसले के बाद गिलानी रिहा
सैयद अब्दुल रहमान गिलानी
गिलानी ने कहा कि पुलिस ने उन्हें फँसाया
 

भारतीय संसद पर हमले के मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय के फ़ैसले के बाद प्रोफ़ेसर सैयद अब्दुल रहमान गिलानी को जेल से रिहा कर दिया गया.

उच्च न्यायालय ने उनकी मौत की सज़ा सबूतों के अभाव में बुधवार को ख़ारिज कर दी थी.

रिहाई के बाद प्रोफ़ेसर गिलानी ने कहा कि पुलिस ने उन्हें झूँठा फँसाया था.

उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा, "पुलिस और न्याय व्यवस्था में बैठे लोगों के बीच एक आपराधिक साठगाँठ है और भारत में लोकतंत्र को ज़िंदा रखने के लिए उसका पर्दाफ़ाश करने की ज़रूरत है."

वह दिल्ली की तिहाड़ जेल में लगभग दो साल तक क़ैद रहे.

रिहाई के बाद गिलानी को लेने उनके परिजन और मित्र आए थे.

गिलानी ने कहा कि वह जम्मू-कश्मीर के मसले का शांतिपूर्ण हल चाहते हैं.

यह पूछे जाने पर कि क्या वह कश्मीर की पूर्ण स्वतंत्रता के पक्षधर हैं उन्होंने कहा, "अगर कश्मीर के लोग ऐसा चाहते हैं तो मैं उनके साथ हूँ."

आगे की अपील

उनके अलावा न्यायालय ने षड्यंत्र की जानकारी नहीं देने के आरोप में पाँच वर्ष कारावास की सज़ा प्राप्त एक महिला को भी रिहा करने के आदेश दिए थे.

सैयद गिलानी

 

 पुलिस और न्याय व्यवस्था में बैठे लोगों के बीच एक आपराधिक साठगाँठ है और भारत में लोकतंत्र को ज़िंदा रखने के लिए उसका पर्दाफ़ाश करने की ज़रूरत है

सैयद अब्दुल रहमान गिलानी

 

मगर इस षड्यंत्र में कथित भूमिका के लिए न्यायालय ने दो कश्मीरी युवकों की मौत की सज़ा बरक़रार रखी है.

अदालत ने शौकत हुसैन गुरू और मोहम्मद अफ़ज़ल की अपील ख़ारिज कर दी.

उनके विरुद्ध 'देश के विरुद्ध संघर्ष छेड़ने' और हत्या के षड्यंत्र का आरोप है.

उन पर कश्मीरी चरमपंथी संगठन 'जैश-ए-मोहम्मद' का कथित सदस्य होने के भी आरोप हैं.

पिछले साल दिसंबर में उन्हें मौत की सज़ा सुनाई गई थी और आतंकवाद निरोधक कानून पोटा के तहत सुनाई गई यह पहली सज़ा थी.

इन आदेशों के बाद पुलिस फ़ैसले का अध्ययन कर रही है और वह दो लोगों को छोड़े जाने के विरुद्ध उच्चतम न्यायालय में अपील कर सकती है.

हमला

संसद भवन में 13 दिसंबर 2001 को पाँच हमलावरों के पहुँचने के बाद हुई गोलीबारी में नौ लोग मारे गए थे.

जिस समय संसद पर हमला हुआ था तब वहाँ लगभग 300 सांसद और नेतागण शामिल थे.

इससे पहले कि वे संसद भवन के भीतर पहुँच पाते वहाँ छिड़े संघर्ष में वे मारे गए.

भारत ने आरोप लगाया थी कि इसके पीछे पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई का हाथ है.

जबकि पाकिस्तान ने हमले की निंदा करते हुए उसमें हाथ होने से इनकार किया था.

उस हमले के बाद दोनों देशों के संबंध काफ़ी हद तक ख़राब हो गए थे और एक बार तो युद्ध की नौबत आ गई थी.

 
 
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