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गुरुवार, 14 नवंबर, 2002 को 13:42 GMT तक के समाचार

वेबगाइड

इस पन्ने पर हम आपको ऐसे शब्दों की जानकारी देने की कोशिश करेंगे जिनका ज़िक्र आप कई बार सुनते होंगे.

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस

इस शब्द का मतलब है कृत्रिम तरीक़े से विकसित की गई बौद्धिक क्षमता. आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की शुरूआत 1950 के दशक में हुई. ये कंप्यूटर और कंप्यूटर प्रोग्रामों को उन्हीं तर्कों के आधार पर चलाने का प्रयास है जिसके आधार पर हम सब चलते हैं. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उद्देश्य होता है कि कंप्यूटर अपने-आप तय कर सके उसकी अगली गतिविधि क्या होगी. इसके लिए कंप्यूटर को अलग-अलग परिस्थितियों के अनुसार अपनी प्रतिक्रिया चुनने के लिए प्रोग्राम किया जाता है. इसके पीछे कोशिश यही होती है कि कंप्यूटर इंसान की सोचने की प्रक्रिया की नकल कर सके. इसकी सबसे अच्छी मिसाल है-शतरंज खेलने वाले कंप्यूटर. आपकी हर चाल की काट और अपनी अगली चाल सोचने के लिए कंप्यूटर को प्रोग्राम किया गया है. ये इतना सफल रहा है कि मई 1997 में आईबीएम का कंप्यूटर दुनिया के सबसे नामी शतरंज खिलाड़ी गैरी कास्परोव को हरा चुका है.

ब्लू टूथ

डेनमार्क का एकीकरण करने वाले राजा हेराल्ड ब्लू टूथ के नाम पर बनी यह टेक्नॉलाजी सूचना के बेतार आदान-प्रदान में मदद करती है. इस टेकनॉलाजी पर आधारित उपकरण शॉर्ट रेडियो लिंक की मदद से आपस में बात करते हैं. मान लीजिए कि आप अपने मोबाइल फोन में पड़े फ़ोन नंबर कंप्यूटर में डालना चाहते हैं तो ब्लू टूथ की मदद से बिना तार लगाए यह काम संभव हो जाएगा. वैसे वायरसलैस तकनीक से भी उपकरणों को जोड़ा जा सकता है, लेकिन इन यंत्रों की प्रणाली एक होनी चाहिए. ब्लू टूथ की मदद से किसी भी श्रेणी के उपकरणो को जोड़ा जा सकता है. साथ ही इसकी मदद से उपकरणों के बीच बहुत ज़्यादा सूचना और डेटा का आदान-प्रदान भी संभव हैं.

पीडीए

पीडीए या पर्सनल डिजिटल असिस्टंट एक ऐसा छोटा कंप्यूटर है जिसे आप डिजिटल डायरी की तरह जेब में कहीं भी ले जा सकते हैं. यह एक साधारण कंप्यूटर की तरह ही काम करता है लेकिन आप इसे मोबाइल फ़ोन की तरह या फिर इंटरनेट पर जाने के भी इस्तेमाल कर सकते हैं. पीडीए में लिखने के लिए एक विशेष पेन्सिल का इस्तेमाल होता है. इसके ज़रिए आप ठीक वैसे ही लिख सकते हैं जैसे की स्कूल में कॉपी में लिखा करते थे. वैसे कई पीडीए में कीबोर्ड पर टाइप करने की सुविधा भी होती है. अब बाज़ार में ऐसे पीडीए भी मिलने लगे हैं जो आपकी आवाज़ पहचान कर उसे शब्दों में उतार सकते हैं. लेकिन ये सुविधा अभी बहुत कम भाषाओं में ही उपलब्ध है.

वायरस

कंप्यूटर का वायरस इंसानों को प्रभावित करने वाले वायरस जैसा ही होता है. जिस तरह जैविक वायरस एक इंसान से दूसरे इंसान तक पहुँचता है ठीक वैसे ही कंप्यूटर वायरस भी एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर तक पहुँचता है. किसी प्रोगाम या डॉक्यूमेंट में छिप कर, या किसी की शरारत के कारण, यह वायरस एक साथ कई कंप्यूटरों में पहुँच सकता है. जब ऐसे प्रोग्राम को चलाया जाता है तो वायरस कंप्यूटर में महत्वपूर्ण हिस्सों को प्रभावित कर उसे बीमार कर देता है. इस समय दुनिया भर में कम से कम सात हज़ार कंप्यूटर वायरस हैं.

यूज़रनेम

कंप्यूटर इस्तेमाल करने वाला कोई भी व्यक्ति यूज़र है और जब वह किसी भी साइट पर जाना चाहता है तो उसे अपना यूज़रनेम भरना पड़ता है. यह उसका अपना नाम भी हो सकता है और कोई छद्म नाम भी. कई बार किसी विशिष्ट वेबसाइट पर उस नाम का कोई व्यक्ति पहले से ही रजिस्टर्ड होता है तो उसे अपने नाम के आगे कोई संख्या जोड़ने को कहा जाता है. यह 123 से लेकर 999 तक कुछ भी हो सकती है और कई बार तो यह संख्या हज़ारों में जाती है. कुछ लोग इस लंबी संख्या को याद रखने से बेहतर समझते हैं कि अपने नाम में कुछ फेरबदल कर ली जाए या यूज़रनेम कुछ अलग ही हट कर रख लिया जाए.