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ओसामा की मौत: सच बोल रहा है डॉक्टर?

 बुधवार, 12 सितंबर, 2012 को 20:43 IST तक के समाचार

ओसामा बिन लादेन को ढूँढने में मदद करने वाले पाकिस्तानी डॉक्टर ने मीडिया से कहा है कि उन्हें बिल्कुल पता नहीं था कि ओसामा को ढूँढ निकालने और अमरीकी अभियान में उनका इस्तेमाल किया जा रहा है.

शकील अफरीदी ने ये बातें पेशावर में जेल से अमरीकी टीवी चैनल फ़ॉक्स न्यूज़ को दिए इंटरव्यू में कहीं हैं. इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी खुफ़िया एजेंसी ने ओसामा की मौत के बाद उनका अपहरण किया और प्रताड़ित किया. आइए इसके अलग-अलग पहलू जानने की कोशिश करते हैं.

इंटरव्यू देने के पीछे डॉक्टर अफ़रीदी का मकसद क्या है?

आईएसआई पर अपना ग़ुस्सा निकालने के लिए डॉक्टर अफ़रीदी ने दक्षिणपंथी अमरीकी मीडिया संस्थान फॉक्स न्यूज़ को चुना. उनकी किस्मत अब आईएसआई के हाथ में है और आईएसआई चाहे तो उनकी ज़िंदगी कई गुना बदतर कर सकता है. इंटरव्यू देने के पीछे टीकाकर केवल एक कारण बता रहे हैं- डॉक्टर अफरीदी की घोर निराशा.

डॉक्टर अफ़रीदी को एक चरमपंथी गुट के साथ सहयोग करने के लिए 33 साल जेल की सज़ा दी गई है जो अपने आप में काफ़ी बड़ी सज़ा है. इसके अलावा आईएसआई ने उन्हें ग़ैर क़ानूनी तरीके से एक साल से रखा हुआ है और चार महीने से अकेले रखा गया है. ये इंटरव्यू डॉक्टर अफ़रीदी के लिए करो या मरो की स्थिति लगती है ताकि अमरीका का ध्यान खींच सकें.

डॉक्टर अफ़रीदी की मानसिक स्थिति क्या है? क्या उन पर भरोसा कर सकते हैं?

डॉक्टर अफ़रीदी का संबंध अफ़रीदी कबीले से है. वे ख़ैबर पख़्तूनख्वाह में नौकरशाही का हिस्सा रहे हैं. उन्हें कबाइली इलाक़ों में आईएसआई के तौर तरीकों का भली भांति पता होगा. हिरासत के दौरान जिन लोगों से मिलने का ज़िक्र डॉक्टर अफ़रीदी ने फॉक्स से इंटरव्यू में किया है वो पूरी तरह से गलत नहीं हो सकता. उनके वकील कहते हैं डॉक्टर अफ़रीदी की मानसिक स्थिति ठीक है. वहीं उनके कुछ दोस्त और सह कर्मचारी उन्हें महत्वाकांक्षी मानते हैं जिनकी धुरी अपने इर्द गिर्द घूमती है.

इस तरह एक विवादित इंटरव्यू देना जानबूझ कर खेला गया दांव लगता है जिससे उनकी सुरक्षा के लिए खतरा पैदा हो सकता है. लेकिन ये अमरीका में उनकी स्थिति के प्रति लोगों में जागरुकता भी पैदा करेगा. डॉक्टर अफ़रीदी ने शायद अमरीकी ज़हन में जगह बनाने के लिए विवादित इंटरव्यू देकर कीमत चुकाई है.

पेशावर जेल में इंटरव्यू के लिए फ़ोन किसने स्मगल किया?

फॉक्स न्यूज़ के डोमिनिक डि नेटेल ने डॉक्टर अफ़रीदी से फ़ोन पर इंटरव्यू किया था. डॉक्टर अफ़रीदी को एकांत कारावास में रखा गया है. अधिकारियों के मुताबिक उनका सेल काफ़ी खुला और आरामदायक है. उनके लिए सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम हैं. सिर्फ़ करीबी पारिवारिक लोगों को ही मिलने दिया जाता है.

मई में दोषी ठहराए जाने के बाद डॉक्टर अफ़रीदी को केवल तीन बार कोई मिलने आया है. आख़िरी बार 29 अगस्त को परिवार के लोग मिलने आए थे. तो क्या परिवार के किसी सदस्य ने डॉक्टर अफ़रीदी को फ़ोन दिया? शायद ऐसा नहीं है. पाकिस्तानी जेलों में फोन मिलना कोई अनहोनी बात नहीं है और भ्रष्ट जेल गार्डों को ढूँढना भी मुश्किल नहीं है.

डॉक्टर अफ़रीदी को कितनी जानकारी थी?

ओसामा के मारे जाने के बाद डॉक्टर अफरीदी को पकड़ लिया गया था

पिछले साल मई में ओसामा की मौत के बाद डॉक्टर अफ़रीदी को पाकिस्तान में पकड़ा गया था. रिपोर्टें ये आईं थी कि फ़र्ज़ी टीकाकरण अभियान का इस्तेमाल कर उन्होंने अमरीका को ऐबटाबाद में ओसामा के परिसर तक पहुँचाया.

हालांकि कई विशेषज्ञ इस पर अपनी आशंका जता चुके हैं कि क्या डॉक्टर अफ़रीदी को अमरीका के अभियान के बारे में विस्तृत तरीके से पता होगा या ओसामा के सही ठिकाने या पहचान के बारे में पता होगा. पूर्व में सेना से जुड़े रहे कुछ विशेषज्ञ भी मानते हैं कि आईएसआई पूछताछकर्ता भी इस तर्क से सहमत हैं.

डॉक्टर अफ़रीदी ने ख़ुद भी फॉक्स न्यूज़ से बातचीत में माना है, "मुझे किसी खास व्यक्ति को निशाना बनाए जाने के बारे में नहीं पता था. मुझे बस मेरा काम दिया गया था. वो घर अपने नाम के लिए मशहूर था...वज़ीरिस्तान हाउज़. मुझे पता था कि कुछ आतंकवादी वहाँ रहते हैं पर वे कौन है इसकी जानकारी मुझे नहीं थी. बाद में जब पता चला था तो मैं हैरान रह गया कि मेरा नाम ओसामा की मौत से जोड़ा गया है."

डॉक्टर अफ़रीदी ने पाकिस्तान क्यों नहीं छोड़ा जब उनके पास मौका था?

दोषी ठहराए जाने के कुछ दिन बाद डॉक्टर शकील अफ़रीदी के भाई जमील अफ़रीदी ने मीडिया से कहा था कि शकील देशद्रोही नहीं है और जिस टीकाकरण अभियान का वो हिस्सा थे उसे ख़ैबर पख्तूनख्वाह प्रांत के स्वास्थ्य अधिकारियों ने मंज़ूरी दी थी.

डॉक्टर शकील अफ़रीदी के भाई ने ये भी बताया था कि अगर शकील पाकिस्तान छोड़ना चाहते तो वे ओसामा की मौत के बाद जा सकते थे क्योंकि उनके पास अमरीकी वीज़ा था. देखने से तो यही लगता है कि सीआईए अभियान के बारे में जानकारी नहीं होने के कारण डॉक्टर अफ़रीदी को लगता रहा कि उन्होंने कुछ गलत नहीं किया है. ख़ासकर तब जब ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान में भी मोस्ट वांटेड की लिस्ट में थे.

लेकिन फ़ॉक्स न्यूज़ में दिए इंटरव्यू में डॉक्टर अफ़रीदी ने देश न छोड़ने का एक और कारण बताया. ऐसा लगता है कि अमरीका ने उन्हें अफ़ग़ानिस्तान जाने के लिए कहा था. लेकिन डॉक्टर अफरीदी ऐसा करने के इच्छुक नहीं था क्योंकि उन्हें डर था कि कोई चरमपंथी गुट उनका अपहरण कर लेगा. स्थानीय अधिकारी कहते हैं कि 2009-10 में किसी मरीज़ की मौत को लेकर लश्करे-इस्लाम ने उनका अपहरण किया था.

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