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ईशनिंदा में पहली बार जमानत, रिमशा होंगी रिहा

 शुक्रवार, 7 सितंबर, 2012 को 18:14 IST तक के समाचार
अपना घर छोड़कर जाती ईसाई महिलाएं

रिमशा के परिवार के बारे में चिंता जताई जा रही है

पाकिस्तान में ईशनिंदा के आरोप में गिरफ्तार की गई ईसाई लड़की रिमशा को गिरफ्तारी के तीन हफ्ते बाद जमानत मिल गई है.

रिमशा मसीह पर पवित्र कुरान के पन्ने और संबंधित धार्मिक किताबें जलाने का आरोप लगाया गया था. उनके बस्ते से कुछ जले हुए पन्ने मिले थे लेकिन बाद में एक मुसलमान मौलवी खालिद चिश्ती को उसी इलाके से गिरफ्तार किया गया था.

मौलवी खालिद चिश्ती पर आरोप है कि उन्होंने कुरान के जले हुए पन्ने रिमशा के बस्ते में डाले थे और कुछ प्रत्यक्षदर्शियों ने इसकी पुष्टि की है.

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इस पूरे मामले पर पाकिस्तान में ईशनिंदा कानून के दुरुपयोग के बारे में खासी बहस छिड़ी हुई है.

ईशनिंदा में पहली बार जमानत

जज मोहम्मद आजम खान ने रिमशा मसीह की जमानत पर रिहाई का आदेश दिया. माना जाता है कि रिमशा की उम्र 14 साल है.

क्लिक करें रिमशा की गिरफ्तारी से ईसाइओं में भय

बीबीसी के इस्लामाबाद संवाददाता इलियास खान का कहना है कि रिमशा पहली ऐसी पाकिस्तानी नागरिक हैं जिन्हे ईशनिंदा के मामले के तहत अभियुक्त होने के बावजूद जमानत मिली है.

पाकिस्तान में ईशनिंदा ऐसा जुर्म है जिसमें जमानत नहीं मिलती है.

रिमशा को 16 अगस्त से खासी सुरक्षा वाली जेल में रखा गया है. फिलहाल उसकी उम्र और मानसिक क्षमता के बारे में विरोधाभासी रिपोर्टें आ रही हैं.

उसके माता-पिता को भी सुरक्षा कारणों से किसी अज्ञात स्थान पर ले जाया गया है. क्लिक करें

इस्लामाबाद के पास स्थित रिमशा के गाँव से अनेक ईसाई परिवार भयभीत होकर पलायन कर चुके हैं.

ईशनिंदा के मामलों में पाकिस्तानी कट्टरपंथियों का भय तब से ज्यादा फैला है जबसे मार्च 2011 में ईशनिंदा कानून को रद्द किए जाने की मांग करने वाले पाकिस्तान के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री शहबाज भट्टी और उससे पहले पंजाब के गवर्नर सलमान तासीर की हत्या कर दी गई थी.

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