ईशनिंदा मामले से पाकिस्तानी 'चिंतित'

 मंगलवार, 4 सितंबर, 2012 को 15:41 IST तक के समाचार
पाकिस्तानी मंत्री शाहबाज़ भट्टी की शवयात्रा

पिछले साल ईशनिंदा कानून के खिलाफ़ आवाज़ उठाने वाले मंत्री शाहबाज़ भट्टी की हत्या कर दी गई थी.

पाकिस्तान में एक इमाम को एक ईसाई लड़की के बस्ते में कुरान के जले पन्ने रखने के आरोप में गिरफ्तार किया है.

ये लड़की ईशनिंदा के आरोप में हिरासत में है.

ग़ुस्साई भीड़ ने उसे सज़ा दिए जाने की मांग की थी, जिसके बाद पुलिस ने बच्ची को दो सप्ताह तक हिरासत में रखा.

चलिए जानते हैं कि पाकिस्तान की आवाम इस मामले और विवादित ईशनिंदा क़ानून के बारे में क्या सोचती है.

राणा वक़ास अनवर, सरकारी कर्मचारी, लाहौर

इमाम की गिरफ़्तारी के बाद लोगों की प्रतिक्रिया समाज के रवैए में बदलाव की ओर इशारा करती है.

पहली बार लोग इस मामले के कारण और असर के बारे में बात कर रहे हैं.

इस घटना से स्पष्ट है कि किस तरह धार्मिक नेता, धार्मिक उपदेश, क़ानून और जन भावना को अपने पक्ष में ढालते हैं.

ईशनिंदा क़ानून से अराजकता और अन्याय फैल रहा है. इसका इस्तेमाल अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ किया जा रहा है और इसकी समीक्षा की जानी चाहिए.

इससे पहले पंजाब के राज्यपाल सलमान तासीर और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री शाहबाज़ भट्टी ने इस क़ानून में बदलाव की बात की थी जिसकी प्रतिक्रिया में उनकी हत्या कर दी गई.

मुझे लगता है कि अब समाज इस बदलाव के बारे में चर्चा करने के लिए तैयार है. गिरफ़्तार किए गए इमाम खालिद के समर्थन में किसी तरह के विरोध प्रर्दशन नहीं आयोजित किए गए जबकि रिमशा के लिए ज़्यादा सार्वजनिक समर्थन है.

इसलिए समय आ गया है कि सरकार इस कानून के बारे में अपना रवैया स्पष्ट करे और संसद में इसके संशोधन के लिए बिल लाए.

सुंदास हूरैन, क़ानून की पढ़ाई कर रही छात्रा, लाहौर (फ़िलहाल ब्रिटेन में)

पाकिस्तानी छात्रा सुंदास हूरैन

क़ानून की पढ़ाई कर रहीं सुंदास हूरैन चाहती हैं कि ईशनिंदा कानून ख़त्म हो.

मैं लाहौर में ईशनिंदा क़ानून के ख़िलाफ़ प्रदर्शनों में शामिल रही हूं. पंजाब के राज्यपाल सलमान तासीर की हत्या के बाद हुई रैली के आयोजन में भी मैंने हिस्सा लिया जिसकी वजह से 'सिटीज़न्स फ़ॉर डेमोक्रेसी' नाम के नागरिक संगठन की स्थापना हुई.

इस संगठन का उद्देश्य ईशनिंदा क़ानून समाप्त करना है.

मैं मुस्लिम हूं लेकिन धार्मिक नहीं हूं. मैं किसी भी तरह के दमनकारी धार्मिक कानूनों के खिलाफ़ हूं.

रिमशा के मामले से पाकिस्तान के नागरिक समाज के रवैए में बदलाव आया है. धार्मिक दलों समेत सभी ने इस घटना की निंदा की है.

मैंने ट्वीट के ज़रिए मशहूर हस्तियों को इस बारे में अपना पक्ष रखने के लिए कहा. मसलन, इमरान ख़ान को कई ट्वीट भेजने के बाद उन्होंने आखिरकार इस मामले की निंदा की है.

मैं चाहती हूं कि ये क़ानून ख़त्म किया जाए लेकिन जानती हूं कि अभी ये संभव नहीं है.

सोहैल, छात्र, कराची

"इमाम की गिरफ़्तारी के बाद लोगों की प्रतिक्रिया समाज के रवैये में बदलाव की ओर इशारा करती है. पहली बार लोग इस मामले के कारण और असर के बारे में बात कर रहे हैं."

राणा वक़ास अनवर, लाहौर

मानसिक रूप से कमज़ोर एक बच्ची को ईशनिंदा क़ानून के तहत गिरफ़्तार करना पहले ही विचलित करने वाली बात थी. और अब ये पता चलना कि ये उसे फंसाने के लिए किया गया था, और भी घिनौनी बात है.

इस्लाम हमें ये नहीं सिखाता है. इस मामले की जांच होनी चाहिए और उस बच्ची को उन सनकी लोगों से बचाना चाहिए जो ख़ुद को इस्लाम के ठेकेदार मानते हैं.

अगर वो इमाम दोषी पाया जाता है तो उसे धार्मिक हिंसा भड़काने के लिए ज़्यादा-से-ज़्यादा सज़ा मिलनी चाहिए. इससे एक मिसाल बनेगी और भविष्य में लोग इस क़ानून के ज़रिए व्यक्तिगत रंजिश निपटाने से पहले सोचेंगे.

लेकिन ईशनिंदा क़ानून को ख़त्म नहीं करना चाहिए. किसी भी व्यक्ति को किसी जातीय या धार्मिक समुदाय की भावनाओं से खिलवाड़ करने का अधिकार नहीं है.

ज़ेवियर पी विलियम, ईसाई कार्यकर्ता, रावलपिंडी

पाकिस्तानी ईसाई कार्यकर्ता ज़ेवियर विलियम

ज़ेवियर विलियम ईशनिंदा के कई मामलों से जुड़े हैं.

मैं एक ईसाई हूं और एक कार्यकर्ता भी. मैं अक्सर ईशनिंदा मामलों से जुड़ता हूं. इस मामले से मैं शुरुआत से ही जुड़ा हुआ हूं.

मैं रिमशा की सुरक्षा के बारे में बहुत चिंतित हूं. जब भी वो रिहा होगी, वो और उसका परिवार अपने गांव वापस नहीं लौट सकता. उन्हें या तो कहीं छिपना पड़ेगा या मौका मिलने पर पाकिस्तान छोड़ना होगा.

रिमशा पर ईशनिंदा का आरोप लगने के बाद उस इलाके से 600 अन्य ईसाई परिवार भाग चुके हैं. वो वहां वापस जाने से डर रहे हैं, खा़सकर ये जानने के बाद कि रिमशा के बस्ते में कुरान के जले हुए पन्ने एक इमाम ने रखे थे.

इन लोगों से वादा किया गया था कि नई जगह में उनके रहने और खाने का बंदोबस्त किया जाएगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ और अब उनका भविष्य अनिश्चित है.

ये एक राष्ट्रीय मुद्दा है और हर वो व्यक्ति जो ख़ुद को धर्मनिरपेक्ष और उदार कहता है, उसे इसके बारे में आवाज़ उठानी चाहिए.

अदनान, कंप्यूटर प्रोग्रामर, लाहौर

"ईशनिंदा क़ानून को ख़त्म नहीं करना चाहिए. किसी भी व्यक्ति को किसी जातीय या धार्मिक समुदाय की भावनाओं से खिलवाड़ करने का अधिकार नहीं है."

सुहैल, छात्र, कराची

जब मैंने इस मामले के बारे में सुना तो बहुत निराश हुआ. ये तो नहीं कह सकता कि मैं इससे हैरान हुआ था क्योंकि दुर्भाग्यवश हमारे देश में कोई नई बात नहीं है.

लेकिन ये मामला बहुत तकलीफ़देह है क्योंकि आरोपी बच्ची नाबालिग और मानसिक रूप से कमज़ोर है.

पश्चिमी देशों का मानना है कि ईशनिंदा क़ानून ख़त्म होना चाहिए लेकिन मैं इसे सही नहीं मानता.

ये क़ानून पुलिस अधिकारियों को ऐसे मामलों में हस्तक्षेप करने का अधिकार देता है. नहीं तो, ग़ुस्साई भीड़ कथित ईशनिंदा के लिए ख़ुद ही बदला लेने पर आमादा हो सकती है. असल में इसके लिए क़ानून नहीं बल्कि लोग ज़िम्मेदार हैं.

ये बहुत अफ़सोसजनक बात है कि इस क़ानून के बारे सार्वजनिक तौर पर भी बात नहीं की जा रही है. पाकिस्तानी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, ख़ासकर, टीवी और मशहूर टीवी एंकर इस बारे में बात करने से बच रहे हैं.


(सभी इंटरव्यू क्रासिमीरा ट्विग ने किए हैं.)

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