पाकिस्तान में बस रोक 25 शियाओं की हत्या

 गुरुवार, 16 अगस्त, 2012 को 19:37 IST तक के समाचार

पाकिस्तान के शिया अपने ऊपर हमलों को रोकने में सरकार पर नाकाम रहने का आरोप लगाते हैं

उत्तरी पाकिस्तान में अधिकारियों के अनुसार हमलावरों ने एक बस से उतारकर 25 शिया मुसलमानों को मार डाला है.

हमला राजधानी इस्लामाबाद से 160 किलोमीटर उत्तर मनसेहरा ज़िले में हुआ.

बताया गया है कि एक सुदूर पहाड़ी इलाक़े में हथियारबंद लोगों ने रावलपिंडी से गिलगित जा रही बस को रोका और लोगों को जबरन नीचे उतारकर मार डाला.

अधिकारियों के अनुसार हमले में लोगों को या तो गोली चलाकर या गला काटकर मारा गया.

समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार मनसेहरा के एक अधिकारी ख़ालिद ओमरज़ई ने बताया, "वर्दी पहने हुए 10 से 12 लोगों ने बस को रोक लोगों को जबरन नीचे उतारा..फिर उनके कागजात जाँच करने के बाद उन्होंने उनपर गोलियाँ चलानी शुरू कर दीं."

पुलिस ने एएफ़पी को बताया कि बंदूकधारियों ने नकाब लगाया हुआ था.

संवाददाताओं के अनुसार शिया बहुल गिलगित एक लोकप्रिय पर्यटक स्थल है मगर हाल के महीनों में वहाँ जातीय तनाव बढ़ा है.

गिलगित पाकिस्तान के उत्तरी ज़िले गिलगित-बालिस्तान की राजधानी है और इसे काराकोरम और हिमालय पर्वत श्रृंखला का द्रार बताया जाता है.

हमले

"वर्दी पहने 10 से 12 लोगों ने बस को रोक लोगों को जबरन नीचे उतारा..फिर उनके कागजात जाँच करने के बाद उन्होंने उनपर गोलियाँ चलानी शुरू कर दीं"

ख़ालिद ओमरज़ई, स्थानीय अधिकारी

उत्तरी पाकिस्तान में पहले भी इस तरह से हमले होते रहे हैं जिनमें कई के पीछे सुन्नी चरमपंथियों का हाथ बताया जाता रहा है.

हिंसा की ऐसी घटनाओं में अब तक सैकड़ों लोग मारे जा चुके हैं. अधिकतर हमले उत्तरी इलाक़ों में और बलूचिस्तान सूबे में हुए हैं.

फ़रवरी में ऐसी ही घटना में उत्तरी ज़िले कोहिस्तान में एक बस पर हमला कर 18 शिया यात्रियों को मार डाला गया था.

उससे पूर्व, पिछले साल सितंबर मे बलोचिस्तान में प्रतिबंधित सु्न्नी चरमपंथी संगठन लश्करे झांगवी के बंदूकधारियों ने एक बस को रोककर 26 शिया श्रद्धालुओं को मार डाला था.

शिया और दूसरे अल्पसंख्यक समुदायों का कहना है कि ऐसी हिंसाओं में लिप्त रहनेवाले लोगों या या लश्करे झांगवी जैसे संगठनों के खिलाफ़ शायद ही कभी कार्रवाई होती है.

पंजाबी बहुल गुट लश्करे झांगवी का संबंध 2002 में अमरीकी पत्रकार डेनियल पर्ल की हत्या और दूसरे हमलों से बताया जाता है, ख़ासतौर से कराची में हुए हमलों से.

अल्पसंख्यकों पर हमले के अलावा अल क़ायदा और तालिबान से जुड़े या प्रभावित रहनेवाले सुन्नी चरमपंथी अक्सर उत्तरी पाकिस्तान में सरकारी और सुरक्षा ठिकानों पर हमले करते हैं.

पाकिस्तान में शियाओं की आबादी लगभग 20% है. दोनों समुदायों के बीच हिंसा 80 के दशक से ही होती रही है.

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