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अशांत इलाकों में पाक सेना का एफएम चैनल

 मंगलवार, 3 जुलाई, 2012 को 22:03 IST तक के समाचार

पाकिस्तान सेना ने अंशात क्षेत्रों में एफएम चैनल शुरु किए हैं. उसका मानना है कि अपनी बात रखने के लिए खुद का संसाधन होना चाहिए.

पाकिस्तानी सेना ने खैबर पख्तुनख्वाह और बलूचिस्तान प्रांत के अशांत इलाकों में एफएम रेडियो नेटवर्क शुरु किया है और अब इस सेवा को अन्य इलाकों तक फैलाने की योजना है.

बैंकिंग, सीमेंट, शुगर मिल, ट्रांसपोर्ट, निर्माण और अन्य क्षेत्रों में सेना की ओर से निवेश के बाद अब 'एफ़एम 96 इंटरनेशनल रेडियो नेटवर्क' के नाम से एक कंपनी शुरु की गई है. कंपनी को 'शालीमार रिकॉर्डिंग एंड ब्राडकास्टिंग कंपनी' से जोड़ा गया है.

सेना की निगरानी में चल रहे इस रेडियो नेटवर्क के जरिए स्वात घाटी, कबायली इलाके और कजई एजेंसी सहित सभी इलाकों, बलूचिस्तान और अन्य इलाकों में रेडियो कार्यक्रम प्रसारित किए जाते हैं.

इस समय उर्दू, पश्तो, बलोची और ब्राहवी भाषाओं में प्रसारण चल रहा है और ज़्यादातर संगीत, संस्कृति और धार्मिक कार्यक्रम पेश किए जाते हैं.

भारतीय संगीत

रोचक पहलू यह है कि पाकिस्तान के सरकारी रेडियो चैनल 'रेडियो पाकिस्तान' पर भारतीय संगीत प्रसारित नहीं किया जाता है, लेकिन सेना की ओर से चल रहे रेडियो स्टेशन पर इसका प्रसारण हो रहा है.

एफ़एम 96 रेडियो के प्रमुख कर्नल अकील मलिक कहते हैं कि यह सेना की व्यापारिक परियोजना नहीं है बल्कि 'कम्यूनिटी सर्विस' का एक प्रोजेस्ट है.

उन्होंने बताया कि व्यापारिक परियोजना उसे कहा जा सकता है जिसे विज्ञापन मिलते हों, लेकिन अशांत इलाक़ों से कौन से विज्ञापन मिलेंगे.

उन्होंने बीबीसी से बातचीत में कहा कि जब स्वात घाटी में मौलाना फजलुल्लाह ने कई अवैध एफएम रेडियो स्टेशन स्थापित किए और लोगों को जेहाद के लिए प्रोत्साहित किया. इसलिए सेना ने उन स्टेशनों को बंद करवा दिया.

उन्होंने आगे कहा कि स्वात घाटी में हुए सैन्य अभियान के बाद सरकार ने महसूस किया कि अशांत इलाकों के लोगों को मनोरंजन और जानकारी देने के लिए एफएम रेडियो स्टेशन शुरु किया जाए.

कर्नल अकील ने बताया, "एफएम 96 इंटरनेशन रेडियो नेटवर्क को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने मजूर किया और अपलिंकिंग की सुविधा सरकारी टीवी चैनल पाकिस्तान टेलीविजन ने दी है."

"एफएम 96 इंटरनेशन रेडियो नेटवर्क को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने मजूर किया और अपलिंकिंग की सुविधा सरकारी टीवी चैनल पाकिस्तान टेलीविजन ने दी है"

एफ़एम 96 रेडियो के प्रमुख कर्नल अकील

अकील के मुताबिक यह रेडियो स्टेशन केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, पाकिस्तान टेलीविजन, शालीमार रिकॉर्डिंग कंपनी और सेना के सहयोग से काम कर रहा है और इसमें कोई विदेशी साहयता नहीं है.

44 स्टेशन बनाने की योजना

जब उनसे पूछा गया कि सरकारी रेडियो स्टेशन रेडियो पाकिस्तान की मौजूदगी में सेना को नया नेटवर्क शुरु करने की ज़रुरत क्यों पेश आई तो उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में मीडिया का प्रभाव बढ़ रहा है और सरकार का पक्ष रखने के लिए ओर संस्थाएँ होनी ज़रुरी हैं.

उनके मुताबिक़ 21वीं शताब्दी जानकारी की शताब्दी है और इसमें सरकार के पक्ष की और व्याख्या करने के लिए और संसाघन होने चाहिएँ.

वह कहते हैं कि 'एफ़एम 96 इंटरनेशनल रेडियो नेटवर्क' को फैलाया जाएगा लेकिन इसकी विस्तार से जानकारी उन्होंने नहीं बताई.

बीबीसी को मिले एक दस्तावेज के मुताबिक सेना की ओर से 44 ऐसे स्टेशन बनाने की योजना है.

कुछ जानकार कहते हैं कि सेना रेडियो पाकिस्तान की एक वैकाल्पिक संस्था बनाना चहती है और भविष्य में सरकारी रेडियो स्टेशन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. लेकिन कर्नल अकील का कहना है कि रेडियो पाकिस्तान पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा.

खतरनाक कदम

डॉ. आयशा सिद्दीक़ा पाकिस्तान की जानी-मानी विश्लेषक है और उन्होंने सेना के व्यापार पर एक पुस्तक लिखी थी, जो काफी पंसद की गई.

सेना के एफएम रेडियो पर बातचीत में उन्होंने कहा कि सेना ने जब नेशनल लॉजिस्टिक सेल की स्थापना की तो उस समय भी यही कहा जा रहा था कि यह स्थाई नहीं है लेकिन बाद में सेना ने इसे बहुत पैसे कमाए.

उन्होंने बताया कि सेना की ओर से जो रेडियो शुरु किया गया है वह काफी ख़तरनाक कदम है.

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