पाकिस्तान में सोशल मीडिया बनाम मीडिया

 शनिवार, 16 जून, 2012 को 02:24 IST तक के समाचार
इरसलान इफ्तिख़ार और मलिक रियाज़

मुख्य न्यायधीश के बेटे और व्यापारी के ख़िलाफ भ्रष्टाचार के मामले के बाद सोशल मीडिया और मीडिया के बीच जंग शुरु हो चुकी है.

पाकिस्तान में सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव से मुख्य मीडिया यानी टीवी चैनल्स और समाचार पत्र काफ़ी परेशान हो रहे हैं.

पिछले दिनों यू-ट्यूब पर एक वीडिया अपलोड किया गया, जिसमें एक निजी टीवी चैनल ‘दुनिया न्यूज़’ के दो ऐंकर्स को दिखाया गया कि किस तरह उन्हें टेलीफ़ोन के ज़रिए बाहर से निर्देश मिल रहे थे.

दुनिया न्यूज़ के मशहूर ऐंकर्स मेहर बुख़ारी और मुब्बशर लुक़मान पाकिस्तान के वरिष्ठ व्यापारी मलिक रियाज़ से इंटरव्यू कर रहे थे और उन्हें बाहर से निर्देश मिल रहे थे कि व्यापारी को बिल्कुल तंग न किया जाए और जो वह कहते हैं केवल वहीं सवाल पूछे जाएँ.

भ्रष्टाचार का मामला

मलिक रियाज़ पाकिस्तान के एक वरिष्ठ व्यापारी और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस इफ्तिख़ार चौधरी के बेटे अरसलान इफ्तिख़ार के ख़िलाफ़ चल रहे भ्रष्टाचार के मुक़दमे में मुख्य किरदार हैं.

क़रीब एक सप्ताह पहले अरसलान इफ्तिख़ार पर करोड़ों रुपए का भ्रष्टाचार का मामला सामने आया था और सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले का नोटिस लिया था.

सोशल मीडिया टूल

"सोशल मीडिया आम नागरिकों के पास एक ऐसा हथियार है जो अपने समाज को बहतर करने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं और ऐसी चीज़ों को सामने ला सकते हैं जो मुख्य मीडिया कभी भी नहीं सामने लाएगा."

अली के. चिश्ती, सोशल मीडिया जानकार

मलिक रियाज़ ने आरोप लगाया था कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में चल रहे अपने मुकदमों में राहत हासिल करने के लिए अरसलान इफ्तिख़ार को क़रीब 34 करोड़ रुपए दिए थे.

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को इस मामले की सुनवाई की थी और मुख्य न्यायधीश के बेटे अरसलान इफ्तिख़ार और मलिक के ख़िलाफ़ कार्रवाई का आदेश दिया था.

दुनिया न्यूज़ को दिया गया मलिक रियाज़ का इंटरव्यू काफ़ी विवादास्पद रहा है और उसकी गुप्त वीडियो सामने आने के बाद पाकिस्तान में पत्रकारिता पर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं.

पाकिस्तान के वरिष्ठ सोशल मीडिया जानकार अली के. चिश्ती ने बीबीसी से बातचीत की और कहा, “पाकिस्तान में सोशल मीडिया पिछले चार सालों में काफ़ी ताक़तवर हुआ है और इसे बहुत ही अच्छे तरीक़े से इस्तेमाल किया गया है.”

ताक़तवर हथियार

उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया आम नागरिकों के पास एक ऐसा हथियार है जो अपने समाज को बहतर करने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं और ऐसी चीज़ों को सामने ला सकते हैं जो मुख्य मीडिया कभी भी नहीं सामने लाएगा.

वह कहते हैं कि एक तरफ सोशल मीडिया का सही इस्लेमाल हो रहा है तो दूसरी ओक प्रतिबंधित चरमपंथी संगठन उसे अपने प्रचार के लिए भी इस्लेमाल कर रहे हैं लेकिन सरकार को चाहिए कि वह इस संबंध में इस तरह की गतिविधियों पर भी नज़र रखे.

सोशल मीडिया के एक ओर जानकार रज़ा रुमी का कहना है कि पाकिस्तान में सोशल मीडिया की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती जा रही है और वह आम नागरिकों के हाथ में है जिस पर कोई रोक नहीं लगा सकता है.

फेसबुक

पाकिस्तान में पिछले छह महीनों में फेसबुक इस्लमाल करने वालों की संख्या 10 प्रतिशत बढ़ी है.

टीवी चैनल दुनिया न्यूज़ की वीडियो सामने आने को वह बेहतर क़रार दे रहे हैं और कहते हैं कि इससे मुख्य मीडिया में सुधार आएगा.

उन्होंने कहा, “यह एक अच्छी बात हुई है कि मीडिया का किरदार सामने आया है और अब मीडिया को चाहिए कि वह अपना सुधार करें.”

सोशल मीडिया का बढ़ता प्रभाव

वरिष्ठ पत्रकार नोशीन अब्बास कहती हैं कि पाकिस्तान में सोशल मीडिया को इस्तेमाल करने वालों की संख्या प्रतिदिन बढ़ रही है और उसकी बड़ी वजह यह है कि अब फेसबुक और ट्विटर पर उर्दू स्क्रिप्ट लिख सकते हैं.

उन्होंने बताया कि यह ऐसा मंच है जहाँ आम नागरिकों को पूरा अधिकार है कि वह अपनी बात सब तक पहुँचा सकते हैं.

ग़ौरतलब है कि सोशल मीडिया का अध्ययन करने वाली अंतरराष्ट्रीय कंपनी ‘सोशलबेकर्स’ के मुताबिक़ पिछले छह महीनों के दौरान पाकिस्तान में फेसबुक इस्लेमाल करने वालों की संख्या में 10 प्रतिशत का इज़ाफा हुआ है.

सोशलबेकर्स का कहना है कि पाकिस्ताम में फेसबुक इस्लेमाल करने वालों की संख्या लगभग 65 लाख है.

कंपनी के मुताबिक़ पाकिस्तान में 50 प्रतिशत फेसबुस इस्तेमाल करने वाले ऐसे हैं जिनकी उम्र 18 से 24 सालों के बीच में है और 26 प्रतिशत यूज़र्स 25 से 34 साल के हैं.

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