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ओसामा की मौत का श्रेय पाकिस्तान को भी मिले: अहमद मुख़्तार

 गुरुवार, 3 मई, 2012 को 00:32 IST तक के समाचार

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री अहमद मुख्तार का कहना है कि ओसामा बिन लादेन के मारे जाने का श्रेय सिर्फ अमरीका को ही नही बल्कि पाकिस्तान को भी दिया जाना चाहिए.

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की सरकार और सेना की मदद के बिना ओसामा का मारा जाना संभव ही नही था. बीबीसी उर्दू के संवाददाता ऐजाज मेहर ने उऩसे एक विशेष बातचीत की.

पेश है उनकी बातचीत के मुख्य अंश:

सवाल: ओसामा बिन लादेन के मारे जाने में पाकिस्तान की क्या कोई भूमिका थी

अहमद मुख्तार: ओसामा बिन लादेन की जो मौत है, उसमें पाकिस्तान सरकार का, पाकिस्तान की सेना का भी बहुत बड़ा हाथ है. हमारा अमरीका के साथ चिप्स के आदान प्रदान को लेकर समझौता था. बहुत सारी जानकारी हम एक दूसरे के साथ साझा करते थे.

ओसामा को पकड़वाने के लिए जिस चिप की आप बात कर रहे हैं , वो दरअसल क्या चीज थी.

ये टेलीफोन की चिप थी जो उन्हें कहीं गिरी पड़ी मिली थी. इस चिप को उन्होंने चलाए रखा. कई कई दिन तक कोई आवाज नहीं आती थी. फिर कुछ जुमले सुनाई देते थे और फिर वो उसकी भाषा समझने की कोशिश करते थे.

तो ये मोबाइल फोन का सिमकार्ड था, जिसकी वजह से अमरीका ने ओसामा बिन लादेन को खोज निकाला.

पाकिस्तान ने भी उनकी मदद की.

लेकिन पाकिस्तान के खाते में तो सिर्फ गालियां ही आईं.

मुझे नहीं मालूम. ओसामा बिन लादेन कितना बड़ा नेता था, ये तो वक्त बताएगा. ये जो उसके कारनामे थे, मुस्लिम देशों के लिए कितने सकारात्मक थे.

ओसामा बिन लादेन जिस जगह रहते थे, उस जगह से हजारों दस्तावेज मिले हैं. उनमें से कोई ऐसी चीज जिसके बारे में आप बता सकें.

फौज वहां सबसे पहले गई थी. इसलिए उसे ही ये चीजें मिलीं. उसे समझने में वक्त लगेगा. हजारों चीजें मिली हैं तो उन्हें समझने में हजार दिन भी लग सकते हैं.

अहमद मुख्तार,पाक रक्षा मंत्री

"ओसामा बिन लादेन की जो मौत है, उसमें पाकिस्तान सरकार का, पाकिस्तान की सेना का भी बहुत बड़ा हाथ है. हमारा अमरीका के साथ चिप्स के आदान प्रदान को लेकर समझौता था. बहुत सारी जानकारी हम एक दूसरे के साथ साझा करते थे."

ओसामा बिन लादेन इतने सालों से कबाइली इलाकों में फिरते रहे, फिर ऐबटाबाद में आ गए. तो क्या पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों को नाकारा समझा जाए कि उन्हें इस बारे में कुछ पता ही नहीं चल पाया.

ओसामा बिन लादेन का जो हुलिया था, उससे वो गैर-पाकिस्तानी नहीं लगता था. हम जैसे ही कपड़े सलवार कुर्ता पहनता था. थोड़ी दाढ़ी रख ली तो उसे कौन पहचानता कि वो ओसामा बिन लादेन है. जब तक कोई उसके बारे में बताता नहीं, वो अपनी जिंदगी गुजार रहा था.

आप कहते हैं कि ओसामा दुनिया का मोस्ट वांटेड चरमपंथी था, उसे मरवाने में जिस व्यक्ति डॉक्टर शकील अफरीदी ने मदद की, उसे आपने अभी तक पकड़ा हुआ है

उसका मुकदमा चल रहा है. ये देख रहे हैं, पता कर रहे हैं कि उसने अमरीका को कौन कौन सी सूचनाएं दी, ये सब बातें उन्हें पाकिस्तान को भी बतानी हैं कि किस तरह से वो अमरीका की पैरोल पर आया.

क्या आपको नहीं लगता कि उसकी गिरफ्तारी गलत है, उसे तो ईनाम मिलना चाहिए

उसकी गिरफ्तारी नाजायज नहीं है, उसे सिर्फ ये चाहिए था कि जब उसे पता चल गया था तो उसे अमरीका के बजाए पाकिस्तान को जानकारी देनी चाहिए थी तब हम कहते कि उसने ओसामा को पकड़वाया. अब तो अमरीकी कहते हैं कि उन्होंने पकड़ा.

लेकिन ये सारी जानकारी तो अमरीका को बताई, आपको नही.

वो अमरीका को बताता गया फिर हमें भी बताता गया. ऐसी कोई बात नहीं थी जो अमरीका को बहुत पहले पता चली हो और हमें बहुत बाद में पता चली हो

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