अमरीका अंदरूनी मामलों में दखल न दे: पाकिस्तान

 मंगलवार, 21 फ़रवरी, 2012 को 01:01 IST तक के समाचार
हिना रब्बानी खर

हिना रब्बानी खर ने पहले भी इस प्रस्ताव पर नाराजगी जाहिर की थी

पाकिस्तान की विदेश मंत्री हिना रब्बानी खर ने अमरीका को चेतावनी दी है कि वह उसके अंदरूनी मामले में दखल देना बंद करे.

वे अमरीकी संसद में पारित प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया दे रही थीं जिसमें कहा गया है कि बलूचिस्तान के लोगों को आत्मनिर्णय का अधिकार दिया जाना चाहिए.

बीबीसी के साथ हुई बातचीत में उन्होंने कहा है कि अमरीकी संसद का प्रस्ताव बेतुका और अस्वीकार्य है.

हालांकि उन्होंने यह भी कहा है कि ये प्रस्ताव अमरीका के मौजूदा सरकार की राय नहीं है.

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इस प्रस्ताव में कहा है कि बलूचिस्तान के लोगों को ईरान, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच में से चुनने की आज़ादी दी जानी चाहिए.

बलोच लोगों की आबादी इन तीन देशों में फ़ैली हुई है. दक्षिण-पश्चिम पाकिस्तान में फैले बलूचिस्तान से पाकिस्तान को तेल, खनिज और गैस मिलता है.

यह इलाका लंबे समय से बलोच पृथकतावादी आंदोलन और तालेबान की कार्रवाईयों का केंद्र है.

नाराज़गी

ये प्रस्ताव पाकिस्तान और अमरीका के बीच पहले से चले आ रहे तनाव की एक और कड़ी बन गया है.

पाकिस्तान सरकार ने इस प्रस्ताव पर अपनी नाराजगी जाहिर करने के लिए इस्लामाबाद स्थित अमरीकी दूतावास में तैनात कार्यकारी राजदूत को तलब किया था.

बलोच

बलोच लोग लंबे समय से आजादी की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं

पाकिस्तान ने राजदूत से कहा है कि ये प्रस्ताव पाकिस्तान के अंदरूनी मामले में अमरीका की दखलंदाजी है.

अमरीका में रिपब्लिकन सांसद दाना रोहरबैकर ने शुक्रवार को दो अन्य साथियों के साथ संसद में यह प्रस्ताव पेश किया था.

दाना रोहरबैकर ने हाल ही में एक संसदीय समिति के प्रमुख के रूप में बलूचिस्तान में मानवाधिकार हनन के मामलों की सुनवाई की थी.

इस समिति के सामने बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना और ख़ुफ़िया एजेंसी पर बिना मुकदमे के बलूचिस्तान की आजादी के संघर्ष में लगे लोगों की हत्या करने और उनका अपहरण करने के आरोप लगाए गए थे.

इसके बाद उन्होंने संसद में यह प्रस्ताव रखा था.

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हालांकि इस प्रस्ताव में बलूचिस्तान के लोगों को आत्मनिर्णय का अधिकार देने की बात कही गई थी लेकिन पाकिस्तानी मीडिया में इस बात की अटकलें लगाई जा रही हैं कि मामला सिर्फ़ आत्मनिर्णय के अधिकार का नहीं है.

मीडिया में अटकलें लगाई जा रही हैं कि इस प्रस्ताव के जरिए अमरीका बलूचिस्तान में प्रवेश करना चाहता है.

अमरीकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस प्रस्ताव का ओबामा प्रशासन से कोई लेना देना नहीं है, और वह पाकिस्तान की अखंडता का पक्षधर है.

इससे पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने भी इस प्रस्ताव पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी और इसे पाकिस्तान की 'संप्रभुता का उल्लंघन' बताते हुए इसकी निंदा की थी.

तनाव भरा रिश्ता

अमरीकी ट्रक

अफगानिस्तान में तैनात सैनिकों को सामान की आपूर्ति पाकिस्तान से होती है

इस मामले ने पाकिस्तान और अमरीका के तनाव भरे रिश्ते में और तनाव पैदा कर दिया है.

गत मई में पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद के पास ऐबटाबाद में अमरीकी कमांडो ने एक सैन्य कार्रवाई करके अल कायदा के प्रमुख ओसामा बिन लादेन को मार दिया था और तब से दोनों देशों के बीच रिश्तों में तनाव है.

ऐबटाबाद की कार्रवाई के बाद अमरीकी संसद में एक और प्रस्ताव लाया गया था जिसमें कहा गया था कि पाकिस्तान को दी जाने वाली सारी सहायता खत्म कर देनी चाहिए.

अमरीका आतंक के खिलाफ लड़ाई में पाकिस्तान को अपना सहयोगी बताता है और अफगानिस्तान में अल कायदा और तालिबान के खिलाफ लड़ाई में उसका सक्रिय सहयोग लेता रहा है.

इस तनाव के बीच एक सुरक्षाचौकी पर अमरीकी हमले में कई सैनिकों के मारे जाने से भी स्थिति बिगड़ गई थी और अफगानिस्तान में अमरीकी फौज को भेजी जाने वाली सहायता का रास्ता रोक दिया गया था.

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