'युसूफ़ साहब बहुत ख़ुश हैं'

 गुरुवार, 9 फ़रवरी, 2012 को 18:54 IST तक के समाचार
दिलीप कुमार का घर

दिलीप कुमार का ये घर सरकार ने ख़रीदने का फ़ैसला किया है

ये हमारे लिए एक बहुत ही खूबसूरत सप्रराइज़ है, हम बहुत ही ख़ुश हैं, अभी अभी ये ख़बर आई है कि पाकिस्तान में युसूफ़ साहब के घर को राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया गया है.

हमारे एक करीबी दोस्त हैं जो पेशावर से होकर आए हैं और उस घर की ढेर सारी तस्वीरें लेकर आए हैं जिसमें युसूफ़ साहब का बचपन बीता था, उन तस्वीरों को देखकर हमारी यादें ताज़ा हो गई हैं.

क्लिक करें सुनिए सायरा बानो से बातचीत...

ये ख़बर सुनकर युसूफ़ साहब के चेहरे पर 'मिलियन डॉलर स्माइल' आ गई, उन्होंने कहा, "वाह, क्या कमाल की बात है."

मैं उम्मीद करती हूँ कि जो नेशनल हेरिटेज का आइडिया को उस इस खूबसूरत तरीक़े से पूरा किया जाए कि वह ऐतिहासिक बन जाए हमेशा के लिए.

मैंने कई साल पहले जब वह जगह देखी तो वह बहुत खूबसूरत थी, मैंने पेशावर का मशहूर क़िस्साख़ानी बाज़ार देखा था.

मुझे अच्छी तरह याद है युसूफ़ साहब का पाकिस्तान दौरा, वह एक ऐतिहासिक और यादगार दौरा था.

गली में लोगों ने कालीन बिछा दी थी, दुकानदारों ने अपने दुकानों के बाहर फानूस लटकाए थे, इत्र की बारिश हो रही थी.

उस घर में युसूफ़ साहब का ऐसा स्वागत किया गया जैसा पहले शायद कभी किसी का हुआ होगा, यह एक बहुत ही भावुक क्षण था, हमारे साथ जितने लोग थे उनकी आँखों में आँसू भर आए.

उनके घर को देश की धरोहर घोषित करके उसकी अच्छी देखभाल की जाए तो इससे अच्छी बात क्या हो सकती है.

प्यारी यादें

दिलीप कुमार और सायरा बानू

उस घर से जुड़ी युसूफ़ साहब की बहुत सारी यादें हैं जिन्हें हमने कलमबंद किया है, जो जल्दी ही उनकी आत्मकथा के रूप में प्रकाशित होगी.

इस वक़्त तो वह घर एक टूटी फूटी हालत में है, वहाँ कोई गोदाम बना दिया गया था, उसमें रहने वाले लोग घर छोड़कर चले गए हैं इसलिए उसकी हालत ठीक नहीं है.

मगर एक ज़माना था जब वह घर गुलज़ार रहा करता था, सर्दी के दिनों में खाना खाने के बाद युसुफ़ साहब अपने दस ग्यारह भाई बहनों के साथ हॉल में एक बड़े से लिहाफ़ में दुबक कर बैठते थे, क़िस्से कहानियाँ सुनते-सुनाते थे. घर में कुछ बिल्लियाँ थीं, वे भी रज़ाई के अंदर आ दुबकती थीं.

युसूफ़ साहब अपने बचपन का एक क़िस्सा सुनाते हैं, इस घर में जब कोई उन्हें पैसे देता था तो वे सिक्के को कालीन के नीचे दबाकर रख देते थे और इस उम्मीद में बार-बार कालीन पलटकर देखते थे कि सिक्के दोगुने तिगुने हो गए होंगे.

जब ये घर राष्ट्रीय धरोहर बन जाएगा तो हम ज़रूर वहाँ जाना चाहेंगे, जो बातें युसूफ़ साहब से सुन रखी हैं वो आँखों के सामने आ जाएँगीं.

मुझे उम्मीद है कि इस तरह के क़दमों से दोनों देशों के रिश्ते बेहतर होंगे, दोनों देशों के लोगों में बहुत प्यार है, जब भारत के लोग पाकिस्तान आते हैं, चाहे वे आम लोग ही क्यों न हों, उनका खुले दिल से स्वागत होता है, उनका बहुत ख़याल रखा जाता है.

जब पाकिस्तान के लोग भारत आते हैं तो उनका वापस जाने का जी नहीं करता, हमें इसे बरकरार रखना चाहिए, अगर लोगों में जो आपसी मुहब्बत है वही ऊपर बैठे लोगों की सोच में आ जाए तो हालात बहुत बेहतर हो सकते हैं.

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